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मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री जेल से चला सकेंगे सरकार? JPC की बैठक में क्या-क्या हुआ?

Published: Thu, 08 Jan 2026 08:23 AM (IST)

संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने 7 जनवरी को एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें जेल से सरकार चलाने वाले मुख्यमंत्रियों और ...और पढ़ें

जेल से सरकार चलाना अपमानजनक (फाइल फोटो)

जेल से सरकार चलाना अपमानजनक (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जेपीसी ने जेल से सरकार चलाने वाले विधेयकों पर चर्चा की।

  2. अपराजिता सारंगी ने कुछ दलों के बहिष्कार पर चिंता जताई।

  3. जेल से सरकार चलाना लोकतंत्र के लिए अपमानजनक बताया गया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने बुधवार, 7 जनवरी को एक अहम बैठक की। यह 31 सदस्यों वाली संयुक्त संसदीय समिति की तीसरी बैठक थी। इस बैठक में तीन विधेयकों पर चर्चा की गई। ये विधेयक लगातार 30 दिनों तक सलाखों के पीछे रहकर सरकार चलाने वाले मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को लेकर हैं।

जेपीसी ने इन तीन विधेयकों 130वां संविधान संशोधन विधेयक 2025, जम्मू एवं कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार (संशोधन) विधेयक 2025 पर करीब तीन घंटे समीक्षा बैठक की।

जेल से चलेगी सरकार?

जेपीसी की बैठक के बाद समिति की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों को भी इस बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रण भेजा था, लेकिन बहुत ही आश्चर्य की बात है कि उन्होंने आने से मना कर दिया।

अपराजिता सारंगी ने आगे कहा कि मोदी सरकार कानून के दायरे में रहना चाहती है और वहीं कुछ राजनीतिक दल हैं जो कानून के दायरे से बाहर रहकर सरकार चलाना चाहते हैं। सारंगी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जेल से सरकार चलाना लोकतंत्र के लिए बेहद ही अपमाजनक बात है।

संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में विपक्षी दल के एक सांसद ने मांग उठाई कि इस विधेयक के लिए विपक्षी दलों के सांसदों को भी सुझाव देने के लिए और अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया जाए।

अमित शाह ने पेश किया था बिल

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगस्त 2025 में इन तीनों विधेयकों को लोकसभा में पेश किया था। इन विधेयकों के मुताबिक, अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, या किसी भी केंद्रीय/राज्य मंत्री को किसी भी गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया जाता है और गिरफ्तारी के बाद वह लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहता है तो उसे अरेस्ट होने के 31वें दिन अपने पद से इस्तीफा देना होगा। अगर वह मंत्री इस्तीफा नहीं भी देता है तो वह स्वतः ही अपने पद से हट जाएगा.

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