क्या PM-CM बर्खास्तगी वाले बिल से विपक्ष के नेता को भी हटाया जा सकेगा? संसदीय पैनल ने पूछा सवाल
संसद की एक समिति ने सवाल उठाया है कि क्या गंभीर आपराधिक मामलों में एक महीने के भीतर जमानत न ...और पढ़ें

संसदीय समिति ने नेता प्रतिपक्ष पर बिल के दायरे पर सवाल उठाया
HighLights
संसदीय समिति ने नेता प्रतिपक्ष पर बिल के दायरे पर सवाल उठाया।
प्रस्तावित कानून पीएम-सीएम को गंभीर मामलों में पद से हटाएगा।
अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता में संयुक्त समिति विचार कर रही है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसद की एक समिति के सदस्यों ने बुधवार को यह सवाल किया कि क्या नेता प्रतिपक्ष का पद भी उस प्रस्तावित कानून के दायरे में आता है जिसके तहत गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी के एक महीने के भीतर जमानत नहीं मिलने पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को उनके पद से हटाने का प्रविधान है।
भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली संयुक्त समिति संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार (संशोधन) विधेयक पर विचार कर रही है।
संसदीय समिति ने नेता प्रतिपक्ष पर बिल के दायरे पर सवाल उठाया
समिति ने विधि आयोग के अध्यक्ष दिनेश माहेश्वरी और कुछ अन्य के विचारों को सुना। पूरे घटनाक्रम से अवगत एक सूत्र ने बताया कि कई सदस्यों ने यह जानने की कोशिश की कि क्या विपक्ष के नेता को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार होने के बाद एक महीने के भीतर जमानत नहीं मिलने पर पद से हटाया जा सकता है।
विपक्ष के एक नेता ने तीन मसौदा कानूनों पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए उन राजनीतिक दलों के नेताओं को आमंत्रित करने की जोरदार वकालत की, जो संयुक्त समिति का हिस्सा नहीं हैं। समिति के सदस्यों का एक वर्ग विपक्षी सदस्य द्वारा व्यक्त किए गए विचार से सहमत नहीं था।
प्रस्तावित कानून पीएम-सीएम को गंभीर मामलों में पद से हटाएगा
एनसीपी(एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले, एआइएमआइएम नेता असदुद्दीन ओवैसी, शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सदस्य एस निरंजन रेड्डी 31 सदस्यीय समिति में शामिल विपक्षी सदस्य हैं।
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक, शिवसेना (उद्धव) और आप ने यह कहते हुए समिति का हिस्सा बनने से इन्कार कर दिया था कि ये विधेयक कानून के उस मूल सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं कि किसी व्यक्ति को दोषी साबित होने तक निर्दोष माना जाता है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
