नई दिल्‍ली (ऑनलाइन डेस्‍क)। 20 जनवरी 2021 की दोपहर को नए राष्‍ट्रपति के तौर पर जो बाइडन के शपथ लेने के साथ ही उनके आधिकारिक घर का पता भी बदल जाएगा। राष्‍ट्रपति के तौर पर उनका नया घर व्‍हाइट हाउस होगा। ये दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र के साथ-साथ विश्‍व की महाशक्ति के प्रमुख का घर भी है। इस व्‍हाइट हाउस का इतिहास काफी दिलचस्‍प है।

1792 में रखी गई थी आधारशिला 

1791 में अमेरिका के पहले राष्‍ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन ने पहली बार इसकी कल्‍पना को साकार करने के लिए इसकी जगह का चयन किया था। 1792 में इसकी आधारशिला रखी गई थी। इसका डिजाइन एक आइरिश मूल के आर्किटेक्‍ट जेम्‍स हॉबन ने तैयार किया था। 1800 में पहली बार इस इमारत में जॉन एडम अपनी पत्‍नी एबीगेल रहने के लिए आए थे। हालांकि उस वक्‍त तक इस इमारत के बनने का काम पूरा नहीं हुआ था।

ब्रिटेन ने लगाई थी आग 

1812 में छिड़ने युद्ध के बाद सन 1814 ब्रिटेन ने इस विशाल इमारत को आग के हवाले कर दिया था। इसके बाद इसको दोबारा बनाने का जिम्‍मा जेम्‍स हॉबन को सौंपा गया था। 1817 में जब ये इमारत अपने पुराने रंग रूप में वापस आई तो तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति जेम्‍स मोनरो इसमें रहने के लिए आए थे। उनके ही कार्यकाल के दौरान 1824 में यहां पर साउथ पोर्टिको का निर्माण कराया गया था। 1829 में एंड्रयू जैक्‍सन ने इसके नॉर्थ पोर्टिको का निर्माण करवाया। आपको बता दें कि यहां पर पोर्टिको का अर्थ ब्‍लॉक है। 19वीं शताब्‍दी के दौरान इस भवन को पूरी तरह से नया बनाने पर विचार किया गया, हालांकि इस प्‍लान को लागू नहीं किया जा सका। 

राष्‍‍‍‍‍ट्रपति रूजवेल्‍ट ने करवाई मरम्‍मत और दिया व्‍हाइट हाउस का नाम

1902 में जब राष्‍ट्रपति रूजवेल्‍ट सत्‍ता में थे तब उन्‍होंने इस इमारत की मरम्‍मत का काम शुरू करवाया।। उन्‍होंने इसकी मरम्‍मत का काम न्‍यूयॉक की प्रमुख आर्किटेक्‍ट कंपनी मेककिम मीड एंड व्‍हाइट को सौंपा था। इस दौरान राष्‍ट्रपति कार्यालय , आधिकारिक निवास को पहले और दूसरे तल पर शिफ्ट किया गया। इसके मौजूदा वेस्‍ट विंग को उस वक्‍त टेंपरेरी एग्‍जीक्‍यूटिव ऑफिस बिल्डिंग कहा जाता था। उन्‍होंने ही इस इमारत को 1901 में आधिकारिक रूप से व्‍हाइट हाउस का नाम दिया था। रूजवेल्‍ट के बाद जब विलियम हॉवर्ड राष्‍ट्रपति के रूप में यहां पर रहने के लिए आए तो उन्‍होंने यहां पर ऑवल ऑफिस के साथ ही एक बड़े से ऑफिस विंग का निर्माण करवाया।

ट्रूमैन ने करवाई इमारत की मरम्‍मत 

मरम्‍मत के 50 साल बाद ही ये इमारत कमजोर होती हुई दिखाई दी। जिसके बाद इसके दोबारा मरम्‍मत की जरूरत महसूस की जाने लगी थी। इस बार इस जिम्‍मेदारी को तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने आर्किटेक्‍ट लॉरेंजो विंस्‍लो को दी। उन्‍होंने इस इमारत को एक नई शक्‍ल दी। इसकी बाहरी दीवार को हटा दिया गया। रेनोवेशन का काम पूरा होने के बाद 1952 ट्रूमैन अपने परिवार के साथ इस इमारत में रहने वापस लौट आए।

इसकी बाहरी दीवारों पर लगता है 2157 लीटर पेंट 

इस इमारत की दीवारों पर जॉन एडम से अब तक के सभी राष्‍ट्रपतियों के चित्र लगे हुए हैं। इसके ग्राउंड फ्लोर पर सर्विस एरिया है। यहां पर दुनिया के नेताओं के मनोरंजन के लिए अलग जगह है। यहां पर अमेरिकी इतिहास की जानकारी देने के लिए एक म्‍यूजियम भी है। इस इमारत में 132 कमरे, 35 बाथरूम हैं। इसके अलावा यहां पर 412 गेट, 147 खिड़कियां, 28 फायरप्‍लेसेज, 8 स्‍टेयरकेस और तीन एलिवेटर्स हैं। यहां की रसोई में करीब 140 मेहमानों का खाना तैयार किया जा सकता है। इसकी बाहरी दीवारों के रंग-रोगन के लिए 2157 लीटर (570 गैलन) पेंट लगता है। आपको जानकर हैरान होगी कि अमेरिकी इतिहास में इसको कई बार प्रेजीडेंट्स पैलेस तो कई बार प्रेजीडेंट हाउस कहा गया है। इसके अलावा कई बार इसको एग्‍जीक्‍यूटिव मेंशन भी कहा गया है।  

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