पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी की नई साजिश, जम्मू-कश्मीर में आतंकी राजनीतिक दलों में बना रहे पैठ; खुलासे के बाद अलर्ट
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए नई रणनीति अपना रही है, जिसके तहत आतंकी मुख्यधारा के राजनीतिक दलों में घुसपैठ कर रहे हैं।
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जम्मू-कश्मीर में आतंकी राजनीतिक दलों में बना रहे पैठ (प्रतिकात्मक तस्वीर)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद फैलाने के लिए एक नई और खतरनाक रणनीति अपना रही है। सुरक्षा एजेंसियों से बचने और आतंकी नेटवर्क को जिंदा रखने के लिए आईएसआई अब राष्ट्रीय राजनीतिक दलों का सहारा ले रही है।
इसके तहत घाटी में सक्रिय 'ग्राउंड वर्कर्स' (OGW) को मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों में घुसपैठ करने और उनके सदस्यता कार्ड को सुरक्षा बलों के खिलाफ एक 'ढाल' के रूप में इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है।
आतंकवाद विरोधी निगरानी से बचने के लिए राजनीतिक संरचनाओं के भीतर गुर्गों को तैनात करना और लोकतांत्रिक गतिविधि की आड़ में आतंकी नेटवर्क चलाना एक सोची समझी साजिश है।
जम्मू और कश्मीर पुलिस द्वारा हाल ही में पकड़े गए प्रवासी श्रमिकों से पूछताछ के दौरान इस भयावह योजना का खुलासा हुआ। जांचकर्ताओं को उनकी जेबों से राष्ट्रीय पार्टियों के बुनियादी सदस्यता कार्ड मिले।
पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने चेतावनी दी कि यह घिनौनी साजिश कुछ हद तक ओजीडब्ल्यू को सुरक्षा बलों की जांच से बचाएगी। उन्होंने कहा, "तलाशी के दौरान सदस्यता कार्ड एक ढाल का काम करता है।" उन्होंने आगे कहा, "हमारे पास ऐसे मामले आए हैं जहां ओजीडब्ल्यू ने पार्टी की सदस्यता का दुरुपयोग हथियारों की तस्करी के लिए किया है।"
यह रणनीति नई नहीं है। 1990 के दशक के उत्तरार्ध और 2000 के दशक में, ऐसे कई मामले सामने आए थे जहां विदेशी कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा एजेंसियों को मात देने के लिए पार्टी सदस्यता कार्ड का इस्तेमाल किया था।
जुलाई 2020 में रियासी गांव के ग्रामीणों ने लश्कर-ए-तैबा के वांछित आतंकवादी तालिब हुसैन को पकड़ लिया। वह भाजपा का सक्रिय सदस्य और जम्मू में पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा का सोशल मीडिया प्रभारी पाया गया। उसके पास से दो एके राइफलें, कई ग्रेनेड और अन्य हथियार व गोला-बारूद बरामद किए गए। उसने अपनी सदस्यता का इस्तेमाल पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ तस्वीरें खिंचवाने में किया, जिससे उसे पकड़े जाने तक कई जगहों पर पहुंच मिलती रही।
पहले आतंकवादी पुलिस से बचने के लिए मतदाता कार्ड और फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल करते थे। पंजाब के मलेरकोटला में लश्कर मॉड्यूल के हालिया भंडाफोड़ से पता चला कि पाकिस्तानी आतंकवादी 15 वर्षों से अधिक समय तक भारत में सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचते हुए सक्रिय रहे।
हालिया आतंकवाद-विरोधी अभियानों ने कश्मीर में सक्रिय संगठनों को करारा झटका दिया है। शीर्ष कमांडरों के मारे जाने के बाद कई समूह अब नेतृत्वहीन हो गए हैं। आतंकी तंत्र को ध्वस्त करने के लिए भूमिगत आतंकवादी नेटवर्क को भी नष्ट कर दिया गया है। आईएसआई का मानना है कि इस खालीपन का फायदा उठाकर भूमिगत आतंकवादी संगठनों को मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों में शामिल करने से उन्हें सुरक्षा मिलेगी और महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंच प्राप्त होगी, जिससे वे बिना पकड़े आतंकी कमांडरों को रसद आपूर्ति कर सकेंगे।
केंद्रीय एजेंसियां अब फिर से सक्रिय हैं। आतंकवादी संगठनों को तोड़ने और ऑनलाइन कट्टरपंथ को जड़ पकड़ने से पहले ही रोकने के लिए अभियान चल रहे हैं और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर है।
