गुमला। घाघरा थाना क्षेत्र के सेहल बरांग गांव में माओवादियों द्वारा देर रात सात ग्र्रामीणों की हत्या कर दिए जाने की सूचना है। हत्या जहां हुई है वह घोर नक्सल प्रभावित इलाका है और वहां संचार का कोई माध्यम भी नहीं। इस संबंध में जिला पुलिस कप्तान भीमसेन टूटी का कहना है कि उन्हें भी सात ग्र्रामीणों के मारे जाने की सूचना मिली है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है।

इस बीच यह सूचना भी आ रही है कि यह अफवाह हो सकती है। पुलिस को जंगल की छानबीन के दौरान कोई शव नहीं मिला है। सुबह 6 बजे से ही घाघरा क्षेत्र के सेहल बरांग गांव के पास चटकदांग जंगल में सर्च अभियान चल रहा है। 150 से अधिक पुलिस, आईआरबी और जैप के जवान इसमें शामिल हैं। एसपी भीमसेन टूटी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी सर्च ऑपरेशन में मौजूद हैं। आसपास के कई गावों के लोग भी काफी संख्या में पुलिस के साथ मिलकर खोजबीन कर रहे हैं ।

नक्सली मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी शहीद

पुलिस मौके पर पहुंचने के बाद ही कुछ कह सकती है। रांची रेंज के डीआइजी प्रवीण कुमार ने कहा कि उन्हें घाघरा में पांच से सात शव मिलने की सूचना मिली है। घटनास्थल के आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें चटकदांग जंगल की ओर से गोलियां चलने की आवाज तो सुनाई दी, लेकिन किसकी और कितनी हत्याएं हुई हैं इसकी सूचना नहीं।

नक्सली अधिकार के लिए लड़ने वाले योद्धा : मांझी

जानकारी के अनुसार नक्सलियों से संपर्क में रहने वाले ग्रामीणों के हवाले से यह खबर घाघरा के गांव में फैली। बताया गया कि सात ग्र्रामीण जंगल में खून से लथपथ पड़े हुए । माना जा रहा है कि जिन लोगों की हत्या हुई है वह किसी अन्य गांव से लाकर यहां मारे गए हैं।

नक्सली हुए कमजोर लेकिन खतरा बरकरार

सेहल बरांग का यह इलाका पूरी तरह से माओवादियों के प्रभाव में है। छह माह पहले इसी गांव में नक्सलियों ने चार ग्र्रामीणों की हत्या कर दी थी। साथ ही चार माह पहले दो अपराधियों को भी यहां नक्सलियों ने घेरकर मार डाला था। नक्सल प्रभावित गुमला जिला नक्सली वारदातों के लिए कुख्यात रहा है। अभी तीन माह पहले कामडारा के रेड़वा जंगल में पीएलएफआई के उग्रवादियों ने शांति सेना के सात लोगों की है।

Edited By: vivek pandey