JEE-NEET समेत कई प्रवेश परीक्षाएं साल में दो बार होंगी, सरकार ने तैयार किया ड्राफ्ट
शिक्षा मंत्रालय ने जेईई, नीट और सीयूईटी जैसी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की कोचिंग पर निर्भरता कम करने के लिए एक मसौदा तैयार किया है।

प्रवेश परीक्षाएं साल में कम से कम दो बार आयोजित होंगी

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अरविंद पांडेय, नई दिल्ली। जेईई, नीट और सीयूईटी जैसी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की कोचिंग पर से निर्भरता को कम करने के प्रयासों में जुटे शिक्षा मंत्रालय ने एक मसौदा तैयार किया है।
जिसमें इन परीक्षाओं को साल में कम से कम दो बार कराने सहित स्कूली शिक्षकों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिहाज से छात्रों को पढ़ाने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित करने के सुझाव दिए है। जेईई मेन की परीक्षा को छोड़ दें तो अभी नीट व सीयूईटी अभी साल में सिर्फ एक बार ही आयोजित होती है।
प्रवेश परीक्षाएं साल में दो बार होंगी
छात्रों की कोचिंगों पर से निर्भरता को कम करने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने जून 2025 में उस समय के उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी की अध्यक्षता में गठित नौ सदस्यीय कमेटी गठित की थी।
हालांकि अब विनीत जोशी इस पद नहीं है लेकिन उन्होंने इस पद को छोड़ने से पहले ही इससे जुड़ा एक मसौदा तैयार कर विशेषज्ञों को अंतिम राय देने के लिए साझा कर दिया था।
मसौदे में जिन अन्य बिंदुओं पर फोकस किया गया है, उनमें प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों के कठिनाई के स्तर की नए सिरे समीक्षा करने का भी सुझाव दिया है।
कोचिंगों से निर्भरता कम करने पर जोर
मौजूदा समय में छात्रों की यह शिकायत रहती है, कि परीक्षा में कई सवाल या तो पाठ्यक्रम से बाहर के थे या फिर उनका स्तर बारहवीं कक्षा के बच्चों के स्तर से काफी ज्यादा था। ऐसे में कमेटी ने मसौदे में इसे नए सिरे से जांचने के लिए कहा है।
कमेटी ने अपने मसौदे में इसके साथ ही प्रश्न पत्रों को अकेले एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम से तैयार करने की जगह उन्हें बाकी बोर्डों के पाठ्यक्रमों के अनुरूप तैयार करने की सुझाव दिया है।
कमेटी का मानना था कि परीक्षाओं में बड़ी संख्या में केंद्रीय बोर्डों के अतिरिक्त राज्यों के परीक्षा बोर्डों के होते है। इससे ग्रामीण व राज्यों के परीक्षा बोर्डों के छात्रों को भी बराबरी का अवसर मिलेगा।
गौरतलब है कि कोचिंगों से छात्रों की निर्भरता को कम करने के लिए पिछले दिनों सरकार ने डमी स्कूलों के खिलाफ भी शिकंजा कसा था।
क्या होगा इसका फायदा?
यदि यह मसौदा अंतिम रूप लेता है तो छात्रों को परीक्षाओं के तनाव से मुक्ति मिलेगी। अभी साल में एक परीक्षा होने से छात्रों पर करो या मरो वाला दबाव रहता है जबकि साल में दो बार परीक्षा होने से यह डर खत्म होगा।
वहीं शिक्षकों को प्रशिक्षण दिलाने से स्कूली स्तर पर बेहतर पढ़ाई होगी। अभिभावकों को कोचिंग की महंगी फीस नहीं देनी होगी। वहीं देश के हर बोर्ड के छात्र के लिए परीक्षा का स्तर एक जैसा होगा।
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