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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 08, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नीतीश और मांझी में जोर आजमाइश

By Sachin kEdited By:
Published: Sun, 08 Feb 2015 12:23 AM (IST)Updated: Sun, 08 Feb 2015 12:32 AM (IST)

बिहार की राजनीति का ऊंट तेजी से करवटें ले रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ...और पढ़ें

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जागरण ब्यूरो, पटना। बिहार की राजनीति का ऊंट तेजी से करवटें ले रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी एक-दूसरे के खिलाफ जोर आजमाइश पर उतर आए हैं। एक दिन पहले दोनों के समर्थकों के बीच जंग के बाद शनिवार को बिहार की सत्ता के लिए दम दिखाने का दौर चलता रहा।

मांझी ने कैबिनेट की बैठक बुला विधानसभा भंग करने की सिफारिश की, जिसके समर्थन में सात मंत्री आए और 21 मंत्रियों ने विरोध किया। तो, शाम चार बजे जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने विधायक दल की बैठक बुलाई, जिसमें जीतन राम को बर्खास्त कर नीतीश कुमार को फिर नेता चुना गया।

मांझी ने भी फिर अपनी चाल चली और देर शाम 15 अन्य मंत्रियों को बर्खास्त करने की अनुशंसा राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी को भेज दी, जबकि पांच मंत्रियों ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को भेज दिया है। देर शाम दिल्ली पहुंचे मांझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मांगा है।

मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शुक्रवार को दो मंत्रियों को हटाने की अनुशंसा राज्यपाल को भेजी थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। मामले को गंभीर होता देख जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने आखिरी कोशिश के तहत शनिवार को मांझी व नीतीश के साथ बंद कमरे में बात की, जिसमें मांझी समर्थक मंत्री नरेंद्र सिंह और वृशिण पटेल भी उपस्थित रहे। लेकिन इसका भी कोई नतीजा नहीं निकला। मुलाकात के बाद मांझी ने दोपहर दो बजे कैबिनेट की बैठक बुलाई और विधानसभा को भंग करने का प्रस्ताव रखा। मांझी समर्थक मंत्रियों ने बिहार में चुनाव की राज्यपाल को सही समय पर अनुशंसा भेजने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया, जबकि नीतीश समर्थक 21 मंत्री इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए बाहर निकल गए।

मांझी ने देर शाम नीति आयोग की बैठक के लिए दिल्ली रवाना होने से पहले अपनी कैबिनेट के 15 और मंत्रियों को बर्खास्त करने की अनुशंसा राज्यपाल को भेज दी। इसमें विजय कुमार चौधरी, विजेंद्र प्रसाद यादव, दामोदर राउत, नरेंद्र नारायण यादव, श्याम रजक, अवधेश प्रसाद कुशवाहा, लेसी सिंह, श्रवण कुमार, रामधनी सिंह, जय कुमार सिंह, जावेद इकबाल अंसारी, बीमा भारती, रंजू गीता, बैद्यनाथ सहनी व बिनोद प्रसाद यादव का नाम शामिल हैं।


मांझी के पास बहुमत नहीं : नीतीश
विधायक दल की बैठक में नेता चुने जाने के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि जीतन राम मांझी के पास बहुमत नहीं है। हमें 130 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। जदयू विधानमंडल दल की बैठक में पार्टी के 111 में से 97 विधायक और 41 में से 37 विधान पार्षद शामिल हुए। कहा, हमें राजद, कांग्रेस और वामदल का भी समर्थन है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने सत्ता प्राप्त करने के लिए हमारी पार्टी में सेंधमारी की है। हम इस खेल का जवाब देंगे। हमारी यह लड़ाई दिल्ली तक चलेगी। इससे पहले बिहार विधानसभा एनेक्सी में बुलाई गई बैठक में विधायक अरुण मांझी ने नीतीश कुमार के नाम का प्रस्ताव किया, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने विधायकों से पटना में डटे रहने की अपील करते हुए कहा कि राज्यपाल चाहें तो हमसे परेड करा सकते हैं।

मंत्रिमंडल में बचे सिर्फ नौ मंत्री
नीतीश समर्थकों में से पांच मंत्रियों ने देर शाम अपना इस्तीफा राज्यपाल को भेज दिया है। इसके बाद कुल 31 सदस्यीय मांझी मंत्रिमंडल में अब मुख्यमंत्री समेत महज नौ मंत्री बचे हैं। इसमें 17 मंत्रियों की बर्खास्तगी हो चुकी है।

किसने, क्या-कहा

'हमें अधिसंख्य विधायकों का समर्थन हासिल है, फिलहाल हम इस्तीफा देने नहीं जा रहे। जरूरत पर बहुमत साबित कर देंगे।'
-जीतन राम मांझी, मुख्यमंत्री, बिहार

'जीतन राम मांझी हमारी बात को नहीं समझ सके। वे भाजपा के इशारों पर काम करते रहे। हम सरकार बनाने का दावा ठोकेंगे।'
-नीतीश कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री, बिहार

'बिहार विधानसभा भंग करने संबंधी कोई पत्र मुझे नहीं मिला है। शुक्रवार को दो मंत्रियों की बर्खास्तगी की अनुशंसा मिली थी, जिसे मान लिया।'
-केसरी नाथ त्रिपाठी, राज्यपाल, बिहार
पढ़ेंः राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा बिहार

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