जम्मू [दिनेश महाजन]। जम्मू-कश्मीर में पुलिस विभाग की बदहाली आतंकियों के हौसले को बढ़ाने का काम कर रही है। आलम ये है कि दक्षिण कश्मीर के शोपियां में शुक्रवार को तीन पुलिस कर्मियों की हत्या के साथ ही इस साल घाटी में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में शहीद पुलिसकर्मियों की संख्या 32 हो गई है। सबसे ज्यादा सात पुलिसकर्मी अगस्त में शहीद हुए हैं, जबकि अप्रैल में एक पुलिसकर्मी शहीद हुआ था। वहींं दूसरी तरफ राज्‍य में पुलिस अधिकारियों की कमी से जूझ रही है। हालत यह है कि डीआइजी स्तर के स्वीकृत 25 पदों में से सिर्फ पांच पर अफसर तैनात हैं। राज्य में रुकने के बजाय आइपीएस अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में सेवाएं देने को प्राथमिकता दे रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में पुलिस उप महानिरीक्षक (डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, डीआइजी) रैंक के 25 पद स्वीकृत हैं। इनमें से कुल 20 रिक्त पड़े हुए हैं। डीआइजी रैंक के इतने अधिक पद रिक्त होने से न सिर्फ जम्मू-कश्मीर पुलिस का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था सहित अन्य पुलिस सेवाएं भी बाधित हैं।

डीआइजी रैंक के पांच अधिकारियों को ही अतिरिक्त पदभार सौंप कर किसी तरह काम चलाया जा रहा है। इससे राज्य पुलिस की कई महत्वपूर्ण शाखाएं भी पंगु हो गई हैं। विजिलेंस, आर्थिक अपराध, खुफिया शाखा, सीआइडी, आपदा प्रबंधन रिस्पांड फोर्स, आम्र्ड विंग, इंडियन रिजर्व पुलिस बल, सिक्योरिटी विंग, स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप और तकनीकी विंग आदि में डीआइजी रैंक के अधिकारियों का टोटा पड़ा हुआ है।

एक वजह यह भी

अफसरों का प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में जाना इस टोटे का एक कारण है। साथ ही एक वजह और भी है। वर्ष 1999 बैच के कश्मीर पुलिस सेवा (केपीएस) के अधिकारियों को पदोन्नत होकर डीआइजी रैंक तक पहुंच जाना चाहिए था, लेकिन कुछ अधिकारियों ने अपनी पदोन्नति को लेकर कोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट में याचिका लंबित है। इस याचिका का जब तक निपटारा नहीं होता, तब तक कोई भी अधिकारी एसएसपी से पदोन्नत होकर डीआइजी नहीं बन सकता। कोर्ट ने इस बैच के सभी अधिकारियों की पदोन्नति पर रोक लगा रखी है।

राज्य में कुल सात पुलिस रेंज हैं। इनमें जम्मू संभाग में जम्मू, कठुआ, सांबा, ऊधमपुररियासी, डोडा-किश्तवाड़-रामबन, पुंछ व राजौरी हैं। कश्मीर संभाग में दक्षिण कश्मीर, उत्तरी कश्मीर व सेंट्रल कश्मीर तीन रेंज हैं। रेंज स्तर पर डीआइजी रैंक के अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। पांच डीआइजी रैंक के अधिकारियों को इन सातों रेंज का कामकाज सौंपा गया है। इसके अलावा अन्य विभिन्न शाखाओं का जिम्मा भी इन्हें सौंपा गया है।

जम्मू के डीआइजी भीमसेन टूटी के पास जम्मू, कठुआ और सांबा जिला के अलावा ऊधमपुर-रियासी रेंज का भी पदभार है। इसी प्रकार डीआइजी सेंट्रल कश्मीर विर्दी कुमार के पास उत्तरी कश्मीर का अतिरिक्त पदभार है। राज्य पुलिस की विभिन्न शाखाओं में भी डीआइजी रैंक के पद खाली होने से विंग के अन्य अधिकारियों पर काम का बोझ बढ़ गया है। डीआइजी कार्यालयों में तैनात स्टाफ भी लगभग बेकार होकर रह गया है।

केंद्र में जा रहे अफसर

पड़ताल करने पर सामने आया है कि इतने अधिक पदों के रिक्त रहने का मुख्य कारण पुलिस अधिकारियों का केंद्र में प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर जाना है। राज्य से प्रतिनियुक्ति पर गए डीआइजी स्तर के अफसरों में उत्तम चंद (केंद्रीय विभाग में गए), केशव राम (सीबीआइ में), अतुल कुमार गोयल (एनआइए में), सुनील गुप्ता और सुजीत कुमार शामिल हैं।

तब क्या होगा

कुछ महीनों में इन पांच डीआइजी में से दो सेवानिवृत्त हो रहे हैं। राजौरी-पुंछ रेंज के डीआइजी दीपक कुमार जनवरी 2019 और डोडा-किश्तवाड़-रामबन रेंज के डीआइजी रफीक उल हसन फरवरी 2019 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इसके बाद राज्य में सिर्फ तीन डीआइजी ही रह जाएंगे। तीन डीआइजी में से अमित कुमार एसएसपी रैंक के अधिकारी हैं। उन्हें दक्षिण कश्मीर का इंचार्ज डीआइजी बनाया गया है।

कश्मीर घाटी में इस साल 32 पुलिसकर्मी हो चुके हैं शहीद

दक्षिण कश्मीर के शोपियां में शुक्रवार को तीन पुलिस कर्मियों की हत्या के साथ ही इस साल घाटी में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में शहीद पुलिसकर्मियों की संख्या 32 हो गई है। सबसे ज्यादा सात पुलिसकर्मी अगस्त में शहीद हुए हैं, जबकि अप्रैल में एक पुलिसकर्मी शहीद हुआ था। जानकारी के मुताबिक जनवरी में चार पुलिसकर्मी अलग-अलग आतंकी हमलों में शहीद हुए थे। फरवरी में शहीद हुए चार पुलिसकर्मियों में से दो पुलिसकर्मी मुश्ताक अहमद और बाबर खान अनंतनाग में पांच फरवरी को एसएमएचएस अस्पताल में लश्कर कमांडर नवीद जट्ट को छुड़ाने के लिए हुए आतंकी हमले में शहीद हुए थे।

इसके बाद 25 फरवरी को दो पुलिसकर्मी कुलतार सिंह और फारूक अहमद इटटु शहीद हुए थे। कुलतार सिंह चरार ए शरीफ जबकि फारूक अहमद श्रीनगर के सौरा इलाके में स्थित अलगाववादी नेता फजल हक कुरैशी के घर पर हुए आतंकी हमले में शहीद हुए थे। मार्च में 20 तारीख की मध्यरात्रि में हलमतपोरा कुपवाड़ा में हुई मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। इस मुठभेड़ में सेना के तीन जवान शहीद हुए थे और पांच विदेशी आतंकी मारे गए थे। इसके बाद 29 मार्च को बिजबिहाड़ा में एसपीओ (स्पेशल पुलिस ऑफिसर)मुश्ताक अहमद और 31 मार्च को पुलवामा में एसपीओ मुहम्मद अशरफ आतंकी हमले में शहीद हुए थे।

अप्रैल के दौरान पुलिसकर्मी लतीफ गोजरी ने लाम त्राल में हुई मुठभेड़ में शहादत पाई थी। इस मुठभेड़ में चार आतंकी मारे गए थे। मई में दो पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। पुलिसकर्मी शमीम अहमद 11 मई को वाडवुन बडगाम और अब्दुल रशीद 15 मई को बिजबिहाड़ा में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए थे। दो जून को पंजगाम पुलवामा के रहने वाले पुलिसकर्मी आकिब वागे और 13 जून को कोर्ट कॉम्प्लेक्स पुलवामा पर आतंकी हमले में दो पुलिसकर्मी गुलाम हसन वागे व गुलाम रसूल शहीद हुए थे।

तनवीर अहमद नामक पुलिसकर्मी गलंदर पांपोर में आतंकी हमले में और आशिक हुसैन 22 जून को खिरम सिरीगुफवारा में चार आतंकियों को मार गिराने के दौरान शहीद हुए। पांच जुलाई को जावेद अहमद डार नामक एक पुलिसकर्मी को वेहल शोपियां में आतंकियों ने अगवा कर मौत के घाट उतार दिया था। जबकि 16 जुलाई को नेशनल कांफ्रेंस नेता गुलाम मोहिउद्दीन मीर के सुरक्षा दस्ते में शामिल पुलिसकर्मी मुदस्सर अहमद मुरन पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए थे।

अगस्त में सात पुलिसकर्मी शहीद हुए। तीन पुलिसकर्मी इंस्पेक्टर मुहम्मद अशरफ डार, याकूब शाह और फैयाज अहमद 22 अगस्त को पुलवामा और कुलगाम में ईद उल जुहा के मुबारक मौके पर आतंकी हमलों में शहीद हुए थे। चार अन्य पुलिसकर्मी कांस्टेबल इश्फाक अहमद मीर, कांस्टेबल मुहम्मद इकबाल मीर, कांस्टेबल जावेद अहमद बट और एसपीओ आदिल मंजूर 29 अगस्त को अरहमा शोपियां में आतंकी हमले में शहीद हुए थे। इसके अलावा 21 सितंबर को शोपियां में तीन पुलिस कर्मियों को आतंकियों ने मौत के घाट उतार दिया।  

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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