नई दिल्ली, पीटीआइ। तब्लीगी जमात प्रकरण में जमीयत उलेमा ए हिंद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। उसने वहां पर मीडिया के एक वर्ग पर तब्लीगी जमात के खिलाफ 'घृणास्पद खबरें' प्रकाशित करने और दिखाने का आरोप लगाया है। जमीयत उलेमा ए हिंद ने अपनी दलील में कहा है कि इससे सांप्रदायिक कटुता बढ़ रही है। अर्जी में जमीयत ने इस तरह की खबरों पर तत्काल रोक लगाने की शीर्ष न्यायालय से मांग की है। संस्था ने यह बात दिल्ली के निजामुद्दीन में मार्च में हुए तब्लीगी जमात के कार्यक्रम को लेकर मीडिया में आ रही खबरों की बाबत कही है।

इस कार्यक्रम में शामिल होने आए श्रद्धालुओं ने बचाव की पर्याप्त कोशिश नहीं की थी जिसके कारण देश में कोविड-19 का प्रकोप बढ़ा। वकील एजाज मकबूल के जरिये दायर अर्जी में कहा गया है कि मीडिया में आ रही खबरों की वजह से पूरे मुस्लिम समुदाय को लेकर घृणा का वातावरण बन रहा है। तमाम फर्जी वीडियो, फोटो और खबरें जनता के बीच लाई जा रही हैं। इन्हें तत्काल रोका जाए।

हालांकि, अब तक यदि अदालतों की बात करें तो उनका रुख तब्लीगी जमात के सम्मेलन को लेकर सख्‍त ही रहा है। गुजरात उच्च न्यायालय कह चुका है कि वीजा नियमों का उल्लंघन कर दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के सम्मेलन में शामिल विदेशियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इसी तरह कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी कहा है कि जमात में शामिल होकर लौटे लोगों की पहचान कर जरूरी कदम उठाना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। यही नहीं कर्नाटक हाई कोर्ट ने तो राज्‍य सरकार से इस बारे में कार्रवाई की रिपोर्ट तक तलब कर ली है। 

गुजरात हाई कोर्ट और कर्नाटक हाई कोर्ट में गत शुक्रवार को तब्लीगी जमात के लोगों से कई राज्यों में कोरोना संक्रमण फैलने का मामला उठा था जिसमें अदालतों ने सरकार से हालात की जानकारी ली थी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करने की बात कह कर ऐसे लोगों की पहचान कर उचित कदम उठाने की भी नसीहत दी है। वहीं कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा था कि आयोजन में शामिल होने वालों की पहचान करना राज्य सरकार का दायित्व है। राज्य सरकार केंद्र और दिल्ली सरकार की मदद लेकर तत्काल ऐसे लोगों की पहचान करके उन्हें क्वारंटाइन करे।

 

Posted By: Krishna Bihari Singh

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