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ईरान-यूएई की मौजूदगी में भारत ने दिया कूटनीतिक संतुलन का संदेश, जयशंकर बोले- चुनिंदा नहीं हो सकती स्थिरता

Published: Fri, 15 May 2026 10:53 AM (IST)Updated: Fri, 15 May 2026 11:02 AM (IST)

भारत ने मध्य-पूर्व संकट, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर में ऊर्जा आपूर्ति पर इसके प्रभाव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।

BRICS सम्मेलन में भारत ने मिडिल ईस्ट और होर्मुज संकट पर जताई चिंता(फोटो: पीटीआई )

BRICS सम्मेलन में भारत ने मिडिल ईस्ट और होर्मुज संकट पर जताई चिंता(फोटो: पीटीआई )

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत ने मध्य-पूर्व संकट के साथ-साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर में ऊर्जा आपूर्ति तथा समुद्री स्थिरता पर इसके असर को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।

भारत ने ईरान और संयुक्त अरब अमीरात सहित अन्य ब्रिक्स देशों से आग्रह किया है कि वे अभूतपूर्व भू-राजनीतिक व आर्थिक अनिश्चितता और एकतरफा जबरदस्ती वाले प्रतिबंधों से निपटने के लिए व्यावहारिक तरीके विकसित करें।

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शांति टुकड़ों में नहीं मिल सकती: एस. जयशंकर

ब्रिक्स देशों के दौरे पर आए विदेश मंत्रियों, जिनमें ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और यूएई के विदेश राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार शामिल थे, को संबोधित करते हुए भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि स्थिरता चयनात्मक नहीं हो सकती, और शांति टुकड़ों में नहीं मिल सकती।

जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर सहित अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवाजाही वैश्विक आर्थिक भलाई के लिए बेहद जरूरी है।

किसी देश का नाम लिए बिना उन्होंने स्पष्ट किया कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय संबंधों का आधार होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत और कूटनीति ही संघर्षों को सुलझाने का एकमात्र टिकाऊ रास्ता है।

भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत तनाव कम करने और स्थिरता बहाल करने के मकसद से शुरू की गई पहलों का समर्थन करने तथा उनमें रचनात्मक योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने, नागरिकों की सुरक्षा करने और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने से बचने के लिए शांति बेहद जरूरी है।

इसके अलावा, विदेश मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि नए सदस्यों के लिए यह आवश्यक है कि वे विभिन्न अहम मुद्दों पर BRICS की आम सहमति वाली व्यवस्था को पूरी तरह समझें और उसका पालन करें। उनकी ये टिप्पणियां ऐसे समय में आईं हैं, जब मध्य-पूर्व संघर्ष को लेकर UAE और ईरान के बीच गहरे मतभेद चल रहे हैं।

ईरान और UAE के बीच तीखी बहस और मतभेद

हाल के हफ्तों में तेहरान और अबू धाबी के बीच तीखी तकरार देखने को मिली है। इसका मुख्य कारण UAE में ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर ईरान के कथित हमले हैं, जिसके चलते BRICS देश पश्चिम एशिया संकट पर कोई आम सहमति वाला बयान जारी नहीं कर पाए।

जानकारी के अनुसार, सम्मेलन के एक सत्र के दौरान अराघची और UAE के खलीफा शाहीन अल मरार के बीच तीखी बहस भी हुई थी, जिसके बाद रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को बीच-बचाव कर माहौल शांत करना पड़ा।

खाड़ी के इन दोनों पड़ोसी देशों के बीच पनपे गहरे अविश्वास को देखते हुए, जयशंकर ने कूटनीतिक रूप से दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की। उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति में रुकावटों के साथ-साथ एकतरफा जबरदस्ती वाले उपायों और प्रतिबंधों का भी जिक्र किया और गाजा में चल रहे संघर्ष के गंभीर मानवीय परिणामों पर चिंता जताई।

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ब्रिक्स का बढ़ता वैश्विक प्रभाव

BRICS में शुरू में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे, अब एक बेहद प्रभावशाली समूह के तौर पर उभरा है। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और UAE भी इसके सदस्य बन गए, और 2025 में इंडोनेशिया भी इसमें शामिल हो गया। यह समूह दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है, जो दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी, 40% वैश्विक GDP और 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है।

ईरान का अमेरिका और इजरायल पर निशाना

सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान अराघची ने कहा कि ईरान अवैध विस्तारवाद और युद्ध भड़काने की नीतियों का शिकार है। उन्होंने BRICS देशों से आग्रह किया कि वे अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों की स्पष्ट रूप से निंदा करें।

उन्होंने कहा, "सच तो यह है कि ईरान, कई अन्य स्वतंत्र देशों की तरह, अवैध विस्तारवाद का शिकार है। ऐसी बुरी चीज़ों की आज की दुनिया में कोई जगह नहीं है।" ईरानी विदेश मंत्री ने BRICS से आह्वान किया कि वे "पश्चिमी वर्चस्व और अमेरिका की मनमानी का विरोध करें"।

PM मोदी की आगामी UAE यात्रा

क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बीच भारत मध्य पूर्व में अपने हितों का संतुलन बनाए हुए है और UAE व ईरान दोनों के साथ इसके महत्वपूर्ण संबंध हैं। शुक्रवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार यूरोपीय देशों की यात्रा पर निकलेंगे, तो UAE उनका पहला पड़ाव होगा।

वहां वे UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। मध्य पूर्व संकट के दौरान भी UAE भारत के सबसे भरोसेमंद ऊर्जा साझेदारों में से एक बना रहा है। लंबे समय के लिए हुए सप्लाई एग्रीमेंट ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत किया है।

इस यात्रा में ऊर्जा सहयोग को और बढ़ाना PM मोदी के एजेंडे में प्रमुख रहेगा। साल 2014 से अब तक PM मोदी ने सात बार UAE का दौरा किया है, जबकि शेख मोहम्मद पांच बार भारत आ चुके हैं। उनकी पिछली भारत यात्रा जनवरी 2026 में हुई थी, जिसमें उनके साथ UAE के अगली पीढ़ी के नेता भी मौजूद थे। जो दोनों देशों के बीच पीढ़ी-दर-पीढ़ी मजबूत होते रिश्तों को दर्शाता है।

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