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'आतंकवाद पर जीरो टालरेंस जरूरी', जयशंकर का अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो को दोटूक संदेश

By Jayprakash RanjanEdited By: Shubham Tiwari
Published: Tue, 20 Oct 2026 10:09 PM (IST)

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से कहा कि भारत अपने साझेदारों से आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की अपेक्षा करता है।

आतंकवाद पर जीरो टालरेंस जरूरी- जयशंकर (फोटो- PTI)

आतंकवाद पर जीरो टालरेंस जरूरी- जयशंकर (फोटो- PTI)

HighLights

  1. जयशंकर ने आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस' की अपेक्षा जताई।

  2. पाक-अमरीकी संपर्कों के बीच भारत ने अपना रुख स्पष्ट किया।

  3. भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई।

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। पाकिस्तान के साथ अमेरिका के बढ़ते संपर्कों के बीच भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से कहा कि भारत अपने साझेदारों से आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टालरेंस' की अपेक्षा करता है।

जयशंकर ने मंगलवार को मुंबई में अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित ‘फ्रीडम-250’ समारोह में यह बात कही। उनका संदेश साफ था- भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बनाने के लिए आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता जरूरी है।

हालांकि, इस संदेश का अर्थ यह नहीं था कि दोनों देशों के बीच बातचीत में कोई तनाव सामने आया। दोनों पक्षों ने वार्ता को सकारात्मक बताया। रूबियो ने दिन में जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी विचार साझा किए।

बैठक से पहले रूबियो और जयशंकर ने मुंबई आतंकी हमले में मारे गए लोगों को ताज होटल स्थित स्मारक पर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान आतंकवाद के खिलाफ साझा संकल्प का संदेश दिया गया।

‘फ्रीडम-250’ समारोह में रूबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों को 21वीं सदी की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण रिश्ता बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश सुरक्षित और मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र तथा मुक्त व्यापार के महत्व को समझते हैं। भारत को शक्तिशाली और प्रभावशाली देश बताते हुए उन्होंने दोनों देशों के साझा हितों और मूल्यों पर जोर दिया।

जयशंकर ने कहा कि विश्व व्यवस्था बदलाव के दौर से गुजर रही है और देश अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत के विकास में योगदान दिया है, जबकि भारतीय प्रतिभा और कौशल ने अमेरिकी प्रौद्योगिकी क्षेत्र को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

जयशंकर ने यह भी माना कि दोनों देशों के बीच कुछ जटिल मुद्दे रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ दशकों में साझेदारी का विस्तार हुआ है। रक्षा, ऊर्जा और नागरिक उड्डयन के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ना इसका उदाहरण है।