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'आतंकवाद पर सहानुभूति नहीं, तो रिश्ते प्रभावित होंगे'; अमेरिका-पाकिस्तान की गलबहियां पर पहली बार खुल कर बोले विदेश मंत्री

Published: Tue, 29 Sep 2026 02:36 PM (IST)Updated: Tue, 29 Sep 2026 02:46 PM (IST)

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका दौरे पर भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव पर पहली बार बात की, जिसमें व्यापार मतभेद और पाकिस्तान-पोषित आतंकवाद प्रमुख मुद्दे रहे।

एस. जयशंकर ने एशिया सोसाइटी में दिया बड़ा बयान। (फोटो- एएनआई।)

एस. जयशंकर ने एशिया सोसाइटी में दिया बड़ा बयान। (फोटो- एएनआई।)

HighLights

  1. जयशंकर ने अमेरिका में भारत-अमेरिका संबंधों पर खुलकर बात की।

  2. आतंकवाद और व्यापार मतभेद भारत के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

  3. साझेदार देश भारत की संवेदनाओं का ख्याल रखें, वरना रिश्ते प्रभावित होंगे।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका दौरे के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों में पिछले डेढ़ वर्षों से चले आ रहे तनाव पर खुलकर बात की। एशिया सोसायटी में सोमवार को हुए कार्यक्रम में उन्होंने साफ कहा कि व्यापार मतभेद और पाकिस्तान-पोषित आतंकवाद, ये दोनों मुद्दे भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने संकेत दिया कि अगर साझेदार देश भारत की प्रमुख संवेदनाओं का ख्याल नहीं रखते, तो उसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा। आतंकवाद पर भारतीय विदेश मंत्री ने खास तौर पर जोर दिया और इसे भारत के लिए प्राथमिक संवेदनशील मुद्दा करार दिया। जयशंकर न्यूयार्क में एशिया सोसायटी की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।

'हमारी चिंताओं का ख्याल नहीं तो संबंधों पर असर पड़ेगा'

उन्होंने कहा, “एक-दूसरे की संवेदनाओं का ख्याल रखना महत्वपूर्ण मुद्दा है। भारत के लिए खास तौर पर आतंकवाद का मुद्दा काफी संवेदनशील है। हमें लगता है कि दुनिया में बहुत कम देश हैं जिन्होंने अपने पड़ोसी देश की तरफ से जान-बूझकर पोषित आतंकवाद को उस तरह से झेला है जैसा हमने झेला है। जो मुद्दा हमारे लिए इतना महत्वपूर्ण है, अगर कोई हमारा साझेदार हमारी प्रमुख चिंताओं का ख्याल नहीं रखता है तो इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा।”

उन्होंने अमेरिका की तरफ से भारत की इन संवेदनाओं का पर्याप्त ख्याल न रखे जाने की ओर भी संकेत किया।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान?

यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में आ रहे सुधार पर इतने स्पष्ट शब्दों में शायद पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी असहजता रखी है। पिछले वर्ष राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रुकवाने का बार-बार दावा किया। पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर का व्हाइट हाउस में स्वागत भी हुआ।

भारत इन घटनाक्रमों को असहजता से देखता रहा है लेकिन कभी कोई प्रतिक्रिया देने से परहेज करता रहा है। राष्ट्र्पति ट्रंप के समर्थन से आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा करने की भारत की कूटनीति इस समय कमजोर पड़ती दिख रही है, क्योंकि अमेरिका के बाद कई यूरोपीय देश भी पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक और आर्थिक रिश्ते पटरी पर ला रहे हैं। नई दिल्ली की आशंका है कि इस माहौल में पाकिस्तान को आतंकवाद पोषित करने की और गुंजाइश मिल सकती है।

अमेरिका के साथ व्यापार पर भारत की टो टूक

व्यापार पर जयशंकर ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी दो टूक कह दिया कि भारत अपने हितों से पीछे नहीं हट सकता। उन्होंने कहा कि अगर कारोबारी समझौता पूरा होता है तो द्विपक्षीय रिश्ते “बेहतर” होंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि वार्ता तेजी से आगे बढ़ेगी लेकिन इसमें कुछ परेशानी आ गई हैं।

उनके शब्दों में, “ध्यान रहे, भारत छोटे उत्पादकों, छोटे कृषि उत्पादकों और छोटी फैक्ट्रियों का समाज है। भारत और अमेरिका के बीच प्रति व्यक्ति आय के अंतर के अलावा उत्पादन का स्वरूप और समाज की प्रकृति बहुत अलग है। व्यापार वार्ता को पूरा करने के लिए धैर्य और बारीकी की जरूरत है, तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद थी लेकिन जमीनी हकीकत की जटिलता सामने आ गई है।”

उन्होंने कहा कि अब समझौते पर लगभग समझ बन चुकी है, लेकिन उसे अंतिम रूप देने का समय अमेरिका की धारा 301 प्रक्रिया से भी जुड़ा है। जयशंकर ने स्वीकार किया कि कारोबारी समझौते में देरी से रिश्तों को “धक्के” भी लगे।

सनद रहे कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल मंगलवार को सात दिवसीय अमेरिका दौरे पर पहुंच रहे हैं। वे मिलवाकी में जी-20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे और अंतरिम व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी पक्ष से बात करेंगे।

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