'Gen Z वोटर्स के मुद्दे पर चुप्पी क्यों?', EC की बैठक पर कांग्रेस का तीखा हमला; SIR प्रक्रिया तुरंत रोकने की मांग
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने चुनाव आयोग के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया पर दिए स्पष्टीकरण को गोलमोल बताया है।

EC की बैठक पर जयराम रमेश का तीखा हमला (फाइल फोटो)
HighLights
EC के स्पष्टीकरण को गोलमोल और बचावत्मक प्रयास बताया।
CEC ज्ञानेश कुमार पर 'वोट चोरी' में मदद का आरोप।
SIR प्रक्रिया में अनियमितताओं पर कांग्रेस ने उठाए सवाल।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया पर चुनाव आयोग की सफाई के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण को गोलमोल और नुकसान की भरपाई का बचावत्मक प्रयास करार देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा निर्णय लेने और 'वोट चोरी' में मदद करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, "चुनाव आयोग ने हमारे लोकतंत्र को भारी नुकसान पहुंचाने के बाद अब डैमेज कंट्रोल मोड अपना लिया है। उसने अभी-अभी एक अस्पष्ट प्रेस नोट जारी किया है, यह उसकी नीयत, ईमानदारी, निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर और सवाल खड़े करता है। उस बेबुनियाद प्रेस नोट का जवाब यहां दिया गया है।"
जयराम रमेश ने 6 बिंदुओं को उठाया-
पहला- प्रेस नोट में सीधे तौर पर कहानी या उसके निष्कर्षों का खंडन नहीं किया गया है। अनुच्छेद 3(i) और 3(ii) में इसे कम महत्व देने का बचावपूर्ण प्रयास किया गया है, लेकिन यह नहीं कहा गया है कि आरोप निराधार हैं।
दूसरा- गोवा में 97 हटाए गए मतदाताओं में से 81 के नाम दोबारा जोड़ना यह साबित करता है कि दोषपूर्ण व्यवस्था के कारण मतदाताओं को पहले मताधिकार से वंचित किया गया।
तीसरा- 7 मई, 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ लेकर आयोग अधिकारियों को लक्षित विलोपन, भ्रम और नागरिकों के हुए आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी से नहीं बचा सकता।
चौथा- दिल्ली और महाराष्ट्र के लिए पंजीकरण की समय सीमा तो बढ़ा दी गई, लेकिन कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के प्रभावित मतदाताओं की अनदेखी की गई है।
दिल्ली और महाराष्ट्र के लिए पंजीकरण की समय सीमा तो बढ़ा दी गई, लेकिन कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के प्रभावित मतदाताओं की अनदेखी की गई है।
पांचवा- आईआईटी/आईआईआईटी विशेषज्ञों से ईसीआईएनईटी पोर्टल की समीक्षा कराना एक निरर्थक कदम है। असल मुद्दा तकनीकी मजबूती का नहीं, बल्कि पोर्टल का अत्यधिक केंद्रीकरण है, जिससे जमीनी स्तर पर पंजीकरण बाधित हो रहा है।
छठवां- फॉर्म 6 में बिना संसदीय मंजूरी के किए गए अवैध बदलावों के जरिए युवा मतदाताओं पर परिजनों के विवरण देने का अनुचित दबाव डाला गया, जिस पर आयोग ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।

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