नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। सदन के अंदर विस्फोटक (पीईटीएन) मिलने से उत्तर प्रदेश विधानसभा चर्चा में है। सत्ता पक्ष जहां मामले की जांच कराने में जुटा है वहीं विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक मौका मिल गया है। कुल मिलाकर विस्फोटक के बहाने उत्तर प्रदेश विधानसभा सुर्खियों में है। इसी बहाने आइए आपको उत्तर प्रदेश की मौजूदा विधानसभा और विधायकों के इतिहास से रूबरू कराएं...

 

हमने उत्तर प्रदेश विधानसभा के 402 विधायकों के इतिहास पर नजर डाली है। बता दें कि आपने जिन नेताओं को चुनकर विधानसभा में भेजा है उनमें से 143 यानि 36 फीसद पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि 107 यानि 26 फीसद गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपी हैं।

 

गंभीर आपराधिक मामले क्या होते हैं...

जिन 402 विधायकों की कुंडली हमने खंगाली है उनमें से 107 यानि 26 फीसद विधायकों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि आपराधिक रिकॉर्ड और गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड में क्या अंतर होता है। बता दें कि आपराधिक मामले किसी नेता के खिलाफ द्वेश भावना से भी दर्ज हो जाते हैं और कई छोटे-मोटे अपराध भी इस श्रेणी में आते हैं। लेकिन गंभीर प्रकृति के अपराध कुछ ज्यादा ही संगीन होते हैं। इस श्रेणी को ऐसे समझें...

1. पांच साल या उससे ज्यादा सजा वाले अपराध

2. गैर जमानती अपराध

3. चुनाव से संबंधित अपराध (धारा 171 या रिश्वतखोरी)

4. सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने से संबंधित अपराध

5. हमला, हत्या, अपहरण, बलात्कार से संबंधित अपराध

6. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में उल्लेखित अपराध (धारा-8)

7. भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम कानून के तहत अपराध

8. महिलाओं के खिलाफ अपराध

 

कैसे-कैसे अपराध और कितने माननीय

इन 107 में से कुल 8 विधायक ऐसे हैं जिन पर हत्या यानि आईपीसी की धारा 302 के तहत मामले दर्ज हैं। वहीं 34 विधायकों पर हत्या की कोशिश यानि धारा 307 के तहत केस रजिस्टर हैं। सत्तारूढ़ पार्टी के 1 विधायक अशोक कुमार राणा ने अपने हलफनामें में बताया कि उन पर धारा 354 यानि महिलाओं के खिलाफ अत्याचार का मामला दर्ज है। 

 

किस पार्टी के कितने गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले विधायक

पार्टीवार बात की जाए तो सबसे ज्यादा गंभीर प्रवृत्ति के अपराधिक रिकॉर्ड वाले विधायक सत्तारूढ़ भाजपा से ही चुनकर आए हैं। भाजपा के 312 में से 83, सपा के 46 में से 11, बसपा के 19 में से 4, कांग्रेस में 7 में से चार और 3 निर्दलीय नेता ऐसे हैं जिन पर गंभीर प्रवृत्ति के अपराध दर्ज हैं। मौजूदा विधानसभा में 36 फीसद विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि पिछली विधानसभा में 47 फीसद विधायक आपराधिक छवि के थे। इसी तरह इस बार 26 फीसद विधायकों पर गंभीर प्रवृत्ति के आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि पिछली विधानसभा में 24 फीसद विधायक गंभीर प्रकृति के अपराधों में लिप्त थे।


विधानसभा में धन्नासेठों की भी कमी नहीं

प्रदेश की जनता भले ही गरीब हो लेकिन, मौजूदा यूपी विधानसभा में धन्नासेठ विधायकों की भी कोई कमी नहीं है। जिन 402 विधायकों के रिकॉर्ड हमारे पास हैं उनमें से 322 यानि 80 फीसद करोड़पति हैं। यही नहीं विधायकों की औसत संपत्ति भी 5.92 करोड़ रुपये है। कुल 61 विधायक ऐसे हैं जिनकी संपत्ति 10 करोड़ से ज्यादा है। 65 विधायकों की संपत्ति 5 से 10 करोड़ के बीच है, जबकि 196 विधायकों के पास 1 से 5 करोड़ के बीच की संपत्ति है। सिर्फ 17 ही विधायक ऐसे हैं जिसकी संपत्ति 20 लाख से कम है।

 

स्रोत - एडीआर रिपोर्ट

Posted By: Digpal Singh

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस