नई दिल्ली। कहानी, इतिहास के गौरव गाथा की। फिल्मी हस्तियों के हर दिल पर राज करने की। राजनीति की सुचिता की। खेलों में भारत के रुतबे की। कहानी, आजादी के मतवालों की। उनके संघर्ष की, उनके जज्बों की और उनके विचारों की। मैडम तुसाद संग्रहालय में मोम के पुतले लगाने से लेकर पोज तय करने की पूरी प्रक्रिया से यहां हों रूबरू...

मैडम तुसाद संग्रहालय में 50 हस्तियों के मोम के पुतले लगे हैं। महात्मा गांधी, सरदार बल्लभ भाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह के पुतले स्वतंत्रता संग्राम की वीर गाथा से रूबरू कराएंगे। बॉलीवुड की बात करें तो अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, श्रेया घोषाल, करीना कपूर, कैटरीना कैफ, अनिल कपूर, आशा भोंसले, मधुबाला के मोम के पुतले लगे हैं। एपीजे अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पुतले भी लोगों को लुभाएंगे।

 

खेल की दुनिया से हमेशा दिलों पर राज करने वाले क्रिकेट खिलाड़ी कपिल देव का पुतला 1983 विश्व कप की याद दिलाएगा। मिल्खा सिंह का पुतला उनके रिकॉर्ड को फिर से जीवंत बना देगा। अंतरराष्ट्रीय शख्सियतों की बात करें तो एंजलीना जोली, निकोल किडमैन, लेडी गागा, जेनिफर लोपेज, किम कार्दशियन, माइकल जैक्सन, जस्टिन बीबर, मर्लिन मुनरो, डेविड बेकहम, लियोनेल मेस्सी के पुतले भी लगे हैं।

 

 

ये है सेलिब्रिटी चयन की प्रक्रिया

पदाधिकारी कहते हैं कि हस्तियों के चयन में विशेष सतर्कता बरती जाती है। चयन, सर्वे और लोगों के ओपिनियन के बाद ही तय होता है। कहते हैं, भारत के विभिन्न शहरों में पांच हजार से ज्यादा कर्मचारी सर्वे करते हैं। इसमें महानगरों से लेकर छोटे शहरों में टीम जाकर लोगों से फिल्म, खेलकूद, राजनीति, कला संस्कृति समेत अन्य क्षेत्रों में उनकी पसंद पूछती है। इंटरनेट पर ऑनलाइन सर्वे भी किया जाता है। हजारों लोगों की राय लेने के बाद महीनों डाटा कंपाइल किया जाता है। इसके बाद ही अधिक लोगों की पसंद हस्तियों की लिस्ट तैयार की जाती है।

 

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छह घंटे की मंथन के बाद तय होता पोज 

मैडम तुसाद डेढ़ सौ साल से अधिक समय से वैक्स के पुतले बनाते आए हैं। प्रत्येक मास्टरपीस को बनाने में चार महीने से ज्यादा का समय लगता है और 20 से ज्यादा कलाकारों की टीम लगती है। पदाधिकारी कहते हैं कि किसी भी सेलिब्रिटी का नाम लेते ही जेहन में उसकी एक खास तस्वीर उभरती है। एक तस्वीर जो किसी खास मौके पर लोगों की पसंद बन चुकी हो। मोम का पुतला बनाने से पहले हम शख्सियत के पोज के बारे में सोचते हैं। हमारी 20 से ज्यादा कलाकारों की टीम सेलिब्रिटी से बात करती है। प्रत्येक पुतले के लिए शरीर के विभिन्न हिस्सों की 500 से ज्यादा माप ली जाती हैं। पुतले में असली बाल एक एक कर लगाए जाते हैं। इसके अलावा स्किन टोन तैयार करने के लिए पेंट्स तथा टिंट्स की अनगिनत परतों को लगाया जाता है। तब कहीं जाकर असल मेल खाते पुतले बनकर तैयार होते हैं। पोज तय करने में दर्शकों की पसंद का ख्याल रखा जाता है लेकिन अंतिम निर्णय सेलिब्रिटी का ही होता है।

 

 

मैडम तुसाद संग्रहालय में अपना पुतला लगाए जाने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि इसमें दुनियाभर की विशेष हस्तियों को जगह दी गई है, मैं स्वयं को उन हस्तियों के बराबर में खड़े होने लायक कैसे मान सकता हूं। लेकिन, जब मुझे पता चला कि संग्रहालय का फैसला आम लोगों की राय और भावनाओं पर आधारित है तब मुझे खुशी हुई। वहीं लोग 1983 विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव की मौजूदगी का भरपूर लुत्फ लेंगे और उन्हें करीब से जानने का मौका पाएंगे। दिवंगत अभिनेत्री मधुबाला का मोम का पुतला यहां मैडम तुसाद संग्रहालय का हिस्सा बनेगा। यह मोम का पुतला वर्ष 1960 की मशहूर फिल्म 'मुगल-ए-आजम' के अनारकली के किरदार से प्रेरित है। श्रेया घोषाल का पुतला गायिकी के अंदाज में दिखेगा।

 

लंदन में बनते हैं पुतले 

पदाधिकारी कहते हैं कि तुसाद संग्रहालय में भारतीय अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के पुतलों का अनुपात 60 : 40 का है। तुसाद संग्रहालय लंदन, लास वेगस, हॉलीवुड, न्यूयार्क, आरलेंडो, सैन फ्रांसिस्को, वाशिंगटन डीसी, एम्सटर्डम, बर्लिन, वियना, बैंकाक, बीजिंग, हांग कांग, टोक्यो, शंघाई, सिंगापुर, वुहान, ब्लैकपूल यूके, सिडनी, नैशविले में संग्रहालय खुल चुका है। कहते हैं कि पुतले लंदन में बनाए जाते हैं। इन्हें बनाने में विशेष तापमान संतुलन की जरूरत होती है। करीब छह महीने लग जाते हैं एक पुतला बनाने में। पुतला बनाने के बाद विशेष विमान से दिल्ली लाया जाता है। संग्रहालय में भी एक निश्चित तापमान में इन्हें रखा जाता है।

 

 

वहीं संग्राहलय के लिए दिल्ली को चुनने की बात पर पदाधिकारी कहते हैं कि दिल्ली देश की राजधानी है। पर्यटकों की बात करें तो भारत घूमने आने वाला हर पर्यटक दिल्ली जरूर आता है। राजधानी में ऐतिहासिक धरोहरों की अधिकता है। लिहाजा, अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की अच्छी खासी तादाद यहां आती है। हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को संग्रहालय दिखाना चाहते हैं। इसलिए दिल्ली को चुना गया। संग्रहालय के सफलतापूर्वक एक साल पूरा करने के बाद ही हम किसी अन्य शहर में संग्रहालय खोलने के बारे में सोचेंगे।

 

यूं गढ़ा जाता है पुतला

- जिस शख्स का मोम का पुतला बनाया जाने वाला होता है, उसके सिर से लेकर पांव तक हर एंगल से 500 नाप लिए जाते हैं।

- अलग-अलग लेंसों की मदद से 180 फोटो लिए जाते हैं। 

- यदि शख्सियत मौजूद नहीं रहता तो कलाकार सैकड़ों फोटो और कई घंटों तक वीडियो देखकर स्टडी करते हैं।

- बिल्कुल शुरुआत से लेकर मोम का पुतला पूरा होने की प्रक्रिया में 4 महीने का वक्त लगता है। कई बार इससे अधिक भी लग जाते हैं। 

- एक पुतला बनाने में डेढ़ करोड़ से ज्यादा खर्च होता है। 

- एक पाउंड बीवैक्स बनाने में जितनी हनी लगती है उसके लिए 1 करोड़ 70 लाख फूलों की जरूरत होती है। बता दें कि किसी पुतले का सिर बनाने में 10 पाउंड वैक्स लग जाता है।

- जब वैक्स को सिर के खांचे में उड़ेला जाता है तो उस वक्त वैक्स का तापमान 70 डिग्री सेल्सियस होता है।

- क्ले से किसी सिर को गढऩे में 6 हफ्ते का समय लगता है।

- मोम के पुतले के सिर पर बाल लगाने में औसतन 140 घंटे का वक्त लगता है।

- मोम के पुतले को असली शख्स से दो फीसद बड़ा बनाया जाता है क्योंकि वैक्स सिकुड़ता है।

 

 

मित्रों, ये मोम के पुतले बहुत मेहनत से तैयार किए जाते हैं। इन्हें बनाने में चार माह लगते हैं। शख्सियत की आदम कद माप ली जाती है और भाइयों-बहनों इसके बाद पुतले ढालने का सफर शुरू हो जाता है। बेशक ये आवाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है, जो मैडम तुसाद में दर्शकों को पुतले बनने की प्रक्रिया समझा रहे हैं।

 

कनॉट प्लेस के रीगल सिनेमा के भवन में अब एक पता मैडम तुसाद का भी है। गुरुवार को आधिकारिक तौर पर यह आम दर्शकों के लिए खोल दिया गया। अब लोग यहां अपने चहेते सितारों को देख सकते हैं, छू सकते हैं और सेल्फी तो बनती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो के जरिए पुतला बनाने का सफर भी देख सकते हैं।

 

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घूमने का शौक तो आना चांदनी चौक

बॉलीवुड की हस्तियों के बीच सलमान खान आपका स्वैग से स्वागत करते नजर आएंगे। उनका पुतला चांदनी चौक के बीच बनाया गया है और वह रिक्शा चलाते नजर आ रहे हैं। 'प्रेम रतन धन पायो' फिल्म के दृश्यांकन से यहां चांदनी चौक को बखूबी उभारा गया है। फलों की दुकानें, चाट-पकौड़ी के ठेले, कपड़ों की दुकानें और दिल्ली का ठेठ अंदाज उनके बैक ग्राउंड की शान है। हल्का-हल्का बजता फिल्मी संगीत मायानगरी का अहसास कराने को काफी है। आगे बढ़िए तो मधुबाला की नजाकत, माधुरी की शोखी, आशा की खनकती आवाज और सोनू निगम का सुरीला अंदाज एक के बाद एक नजर आएंगे। कपिल शर्मा, माइकल जैक्सन, अनिल कपूर, कटरीना, जस्टिन बीबर, मर्लिन मुनरो के भी यादगार भूमिकाओं वाले पुतले यहां खास हैं।

 

 

कल आज और कल की बेहतरीन कड़ी को पेश करते हुए सबसे आकर्षक पुतले राजकपूर और रणबीर कपूर के हैं। कपूर खानदान के ये दोनों चिराग आसपास ही हैं और अपने-अपने समय के यादगार-बेहतरीन अंदाज पेश कर रहे हैं। राजकपूर आवारा हूं (श्री 420) गाने के अंदाज में हैं तो रणबीर बद्तमीज दिल (ये जवानी है दिवानी) के खास लुक में हैं।

 

इसके बाद नजर आते हैं बॉलीवुड के शहंशाह, सदी के महानायक अमिताभ बच्चन। नीले-बैंगनी रंगत लिए नेहरू गले के कुर्ते में बिग बी बेहद खास लग रहे हैं। इसमें भी खास यह कि इस पुतले को बच्चन ने खुद अपने कपड़े दिए हैं। अभिनेत्रियों के पुतले भी उनके दिए गहनों और कपड़ों से सजाए गए हैं।

 

इसी के साथ खिलाड़ियों के पुतले भी उनके चिर-परिचित अंदाज को बयां कर रहे हैं। मिल्खा सिंह, सचिन तेंदुलकर, अनिल कुंबले के पुतलों को देखना रोमांचक है।

 

यहां हिंदी की भी है खास जगह

संग्रहालय भारत में है तो इस लिहाज इसका भारतीयकरण होना तो लाजिमी है। इसके लिए यहां हर पुतले के नीचे लिखी जानने योग्य बातें हिंदी में भी दर्ज हैं। भारतीय दर्शक और भारतीयता के लिहाज से यह लुभाने वाला प्रयोग है। इस बारे में मर्लिन इंटरटेनमेंट के महाप्रबंधक अंशुल जैन कहते हैं कि चांदनी चौक जहां लोगों को दिल्ली के रंग में रंगने की कोशिश करेगा वहीं हिंदी भाषा के जरिए लोग संग्रहालय से दिल से जुड़ सकेंगे। लोगों को वीडियो के जरिए पुतला बनने की कहानी सुनना भी पसंद आ रहा है।

 

संजीव कुमार मिश्र के साथ नेमिष हेमंत

Posted By: Digpal Singh

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