नई  दिल्ली [स्पेशल डेस्क] । डोकलाम के मुद्दे पर चीन को ये उम्मीद नहीं थी कि भारत, भूटान की मदद के लिए सामने आएगा। डोकलाम इलाके में चीनी सेना ने अतिक्रमण करने की कोशिश की तो वो भूटान के लिए सहज स्थिति नहीं थी। भूटान सरकार की मांग पर भारतीय सेना के जवानों ने मानव श्रृंखला बनाकर चीनी सैनिकों को खदेड़ दिया। एक महीने से ज्यादा वक्त गुजर चुका है। चीनी मीडिया की तरफ से हर रोज उत्तेजक बयान आते हैं।

चीनी मीडिया एक तरफ 1962 की लड़ाई की याद दिलाता है, तो दूसरी तरफ अपनी आर्थिक शक्ति का हवाला देता है। चीनी मीडिया के जरिए शी चिनफिंग की सरकार भारत को चुनौती दे रही है। अब वहां की मीडिया ने एक नया राग अलापा और वो नाम है हिंदू राष्ट्रवाद का। हिंदू राष्ट्रवाद का नाम अलाप कर वो भारत को सलाह और सीख दोनों दे रहा है कि उसे इस भावना के तहत किसी तरह की कार्रवाई से बचना चाहिए। अब हम आपको बताते हैं कि चीनी मीडिया की वो बातें जो खुद ब खुद साबित करती हैं कि कैसे चीन खुद डरा हुआ है, कैसे वो भारत को उकसाने में जुटा है।

हिंदू राष्ट्रवाद से डरा चीन

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि भारत में राष्ट्रवादियों की मांग होती है कि वह चीन से बदला लें और यही भावना तनाव बढ़ाने का काम करती है। नरेंद्र मोदी ने 2014 का चुनाव राष्ट्रवादी भावनाओं के इर्द-गिर्द लड़ा था। हिन्दू राष्ट्रवाद में उभार के कारण मोदी को फ़ायदा मिला था। भारत लगातार सीमा पर उकसाने का काम कर रहा है और दूसरी तरफ भारत में हिन्दू राष्ट्रवाद की आड़ में चीन विरोधी भावना को हवा मिल रही है।

ग्लोबल टाइम्स पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए लिखता है कि इसमें दो मत नहीं कि हिंदू राष्ट्रवाद से उन्हें ताकत मिली। लेकिन भारत में रूढ़िवादियों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। इसका असर ये हो रहा है कि भारत की आर्थिक तरक्की प्रभावित हो रही है। इतना ही नहीं भारत का एक बड़ा तबका सरकार पर दबाव बना रहा है कि अब चीन और पाकिस्तान को सबक सिखाने का समय आ गया है। डोकलाम के इलाके में भारत सरकार के रुख से साफ है कि वो हिंदू रुढ़िवादियों के दबाव में है। धार्मिक राष्ट्रवाद के समर्थकों की मांग पर भारत सरकार नहीं चाहती है कि सीमा पर तनाव को कम करने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई करे।

चीनी सेना हटने के बाद ही बातचीत

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लोकसभा में कहा कि डोकलाम से चीनी सेना के हटने के बाद ही किसी तरह की बातचीत की जाएगी। डोकलाम में चीन अपनी मौजूदगी से भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत हमेशा से पंचशील के सिद्धांतों का हिमायती रहा है। समय की मांग है कि चीन खुद पंचशील के सिद्धांतों पर अमल करे।

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, 'चीन और भारत में प्रतिस्पर्द्धा ताकत और विवेक पर निर्भर करती है। राष्ट्रीय ताकत के मामले भारत और चीन में मुकाबला नहीं है। चीन की तुलना में भारत सभी मायनों में कमजोर है। भारतीय रणनीतिकार और राजनेता ये नहीं समझ पा रहे हैं कि उग्र हिंदू राष्ट्रवाद की भावना खुद उनके लिए कितनी खतरनाक साबित होगी। धार्मिक राष्ट्रवाद की वजह से दोनों देश युद्ध का सामना कर सकते हैं।

'तो पीएम मोदी खुद पड़ जाएंगे खतरे में' 

ग्लोबल टाइम्स एक कदम और आगे बढ़ते हुए लिखता है कि मोदी सरकार को खुद धार्मिक राष्ट्रवाद के अतिवाद से बचना चाहिए। अगर वो ऐसा करने में नाकाम होते हैं तो खुद उनके स्थायित्व के लिए खतरा बढ़ जाएगा। भारत की मौजूदा सरकार सबका साथ, सबका विकास की बात करती है। लेकिन 2014 के बाद मुस्लिमों के खिलाफ बढ़ी हिंसा को रोकने में सरकार नाकाम रही है।

इसके अलावा ग्लोबल टाइम्स अपने संपादकीय में लिखता है कि आश्चर्य की बात है कि 1962 के युद्ध में चीन से मिली हार के बाद भी भारतीय वहीं अटके हुए हैं। वो अपनी हार को भूल नहीं पाते हैं। 1962 का युद्ध भारत के लिए धीमे दर्द की वजह है। ऐसे में भारत को चीन का हर कदम संदेह में डालता है। चीन के विकास को भारत के लिए दुर्भाग्य के रूप में देखा जाता है। चीन जितनी तेजी से तरक्की कर रहा है भारत उससे खुद को डरा हुआ पाता है।

चीनी मीडिया के बोल, भारत कहीं नहीं ठहरता

अगर चीन और भारत के बीच युद्ध हुआ तो अमरीका और जापान किस हद तक भारत को मदद करेंगे ? अगर अमरीका ने भारत का साथ दिया तो क्या दोनों देशों के बीच युद्ध का नतीजा कुछ और होगा? इन सवालों पर साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने लिखा है कि भारत सच को स्वीकार कर लेना चाहिए। चीन का विस्तार चौतरफा हो रहा है। रोड, रेल, आर्थिक शक्ति और तकनीकी विकास में चीन के सामने भारत कहीं नहीं ठहरता है। इसके साथ ही भारतीय उपमहाद्वीप में चीन बड़ी नौसैनिक शक्ति के रूप में उभर रहा है।


साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने लिखा है कि ट्रंप के आने के बावजूद भी अमेरिका वन चाइना नीति के खिलाफ जाने के हालात में नहीं है। सच ये है कि 2008 के बाद से हिंद महासागर में चीनी नौसैनिकों का प्रभुत्व बढ़ा है। तकनीकी विकास किसी भी देश के भौगोलिक स्वरूप को निर्धारित करता है। रेल और सड़कों के जरिए दूरियां कम की जाती है। और ये काम सिर्फ चीन कर रहा है। रेल और सड़क विकास के मामले में भारत बहुत ही पीछे लिहाजा आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं भारत अब चीन का मुकाबला कर सकेगा।

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Posted By: Lalit Rai