यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 04, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आलिया का फतवेबाज मुल्लाओं को जवाब, गीता पाठ से कमजोर नहीं होता इस्लाम !
गीता श्लोक का पाठ करने वाली आलिया ने मौलवियों को जवाब देते हुए कहा कि कहा कि इस्लाम इतना कमजोर नहीं है कि वो खतरे में पड़ जाए।

नई दिल्ली [ स्पेशल डेस्क ] । स्वतंत्रता दिवस का गवाह रहे लखनऊ समझौते के 101 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में कृष्ण के वेष में गीता पाठ करने वाली मेरठ की आलिया खान ने खुद के खिलाफ फतवा जारी करने वाले मुल्लाओं को जवाब देते हुए कहा है कि इस्लाम इतना कमजोर नहीं कि किसी के गीता पाठ करने या कृष्ण जैसा परिधान धारण करने से वह उससे खारिज हो जाए। आलिया ने फतवा जारी करने वालों से कहा कि कृपा करके मुझे अपनी राजनीति में न घसीटें।
आलिया का कृष्ण रुप धारण करना व गीता पाठ करना उलेमाओं को पंसद नहींआया। उलेमाओं ने इस वर्ष का पहला फतवा आलिया के नाम जारी कर दिया था।देवबंद के उलमा ने आलिया के इस कृत्य पर कड़ी नाराजगी जताई है। इस पर उलमा ने साफ कहा कि मुस्लिम बच्चों को इस तरह के कार्यक्रम में भागेदारी करने की इस्लाम इजाजत नहीं देता। देवबंदी मुफ्ती ने आलिया खान उसके गीता श्लोक पढ़ने और कृष्ण रूप धारण करने को इस्लाम विरोधी बताया था।
क्या है मामला ?
आलिया का कृष्ण का रुप धारण करना व गीता का पाठ करने से उलेमाओं में खलबली मच गई थी। इस छात्रा के स्टेज परफॉर्मेस को लेकर दारुल -उलूम देवबंद के ऑनलाइन फतवा विभाग ने आलिया खान पर फतवा जारी कर उसे गैर- इस्लामी करार दे दिया है। फतवे पर आलिया ने कहा हैं कि वह इस फतवे का डटकर मुकाबला करेगी।लखनऊ में हाल ही में बाल गंगाधर तिलक पर कार्यक्रम राज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है। इस नारा के 101 वर्ष पूरा होने पर यूपी सरकार ने 30 दिसंबर को लोक भवन में 'तिलक महोत्सव का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में राज्यपाल राम नाईक व विधानसभा अध्यक्ष तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस भी थे।
आलिया खान ने गीता का पाठ किया था। जिसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने उनकी जमकर तारीफ की थी। साथ में मुख्यमंत्री ने सभी को संदेश दिया था की मजहब के नाम पर बांटने वाले आलिया से सीखें। आलिया की चर्चा करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि उसका मजहब इस्लाम है, लेकिन जिस लय के साथ गीता का गायन किया, वह सराहनीय है। आलिया ने जब गीता पाठ किया तो उस समय उसने भगवान श्रीकृष्ण की तरह ही अपना रूप बना रखा था। यही बात मुस्लिम उलेमाओं को नागवार गुजरी उसके बाद ही नए साल पर आलिया के खिलाफ फतवा निकाल दिया। फतवा जारी करने वाले उलेमा यहीं तक नहीं रुके। उन लोगों ने आलिया खान को गैर- इस्लामिक तक करार दे दिया।

देवबंद ने कहा ये तो शिर्क है
देवबंद के उलमा ने आलिया के इस कृत्य पर कड़ी नाराजगी जताई है। इस पर उलमा ने साफ कहा कि मुस्लिम बच्चों को इस तरह के कार्यक्रम में भागेदारी करने की इस्लाम इजाजत नहीं देता। ऑनलाइन फतवा विभाग संस्था के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि मुस्लिम तालिब इल्म (छात्रा) के गीता के श्लोक पढ़ना और श्रीकृष्ण का रूप धारण करने इस्लाम इजाजत नहीं देता। यह शिर्क कहलाता है। फारुखी स्कूल प्रबंधन से भी इस तरह के कार्यक्रमों में मुस्लिम बच्चों को शामिल न करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि किसी भी मुसलमान बच्ची या बच्चे का जो स्कूल के छात्र हैं, ऐसे रूप को इख्तियार करना जो इस्लाम के मुखालिफ हैं वह शिर्क (अल्लाह के अलावा किसी दूसरे मजहब को मानना) कहलाता है। इस्लाम में इसकी इजाजत नहीं है। इस कारण अगर किसी छात्रा ने गीता के शब्द और श्लोक पढ़े हैं और कृष्ण का रूप इख्तियार किया है तो शिर्क जैसी बात है। ऐसी ड्रामों में और कार्यक्रमों में मुसलमान बच्चों को शामिल ना करें जो उनके मजहब के खिलाफ हो। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि जब टीवी सीरियल सिया के राम में दानिश खान हनुमान का रोल कर सकते हैं तो आलिया के गीता पढऩे पर कुछ लोगों को दिक्कत क्यों हो रही है।
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