यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 25, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जागरण संस्कारशाला: जंक फूड को कहें ना
मनोचिकित्सक सोनिया पुआर ने बताया कि खान-पान की चीजों की खरीदारी करते समय या भोजन बनाते समय बच्चों को भी ...और पढ़ें

नई दिल्ली, गीताश्री। टोया और टुकटुक दोनों ही बहनें फिर से डिनर के लिए बाहर चलने की जिद कर रही थीं, जबकि उनकी बड़ी बहन रुचि उन्हें बाहर ले जाने के मूड में नहीं थी। टोया और टुकटुक दोनों ही ग्यारह साल की थीं और बड़ी बहन की बात सुनने और मानने से परहेज करती थीं। ‘दीदी, हमें लेकर फूड प्वाइंट चलिए या फिर हमारे लिए बर्गर ऑर्डर कर दीजिए।’ टोया ने पैर पटके! ‘हां दीदी!’ टुकटुक ने रुचि को देखते हुए कहा। ‘नहीं, आज तुम दोनों कहीं नहीं जाओगी और न मैं कुछ मंगवाऊंगी ही!’ रुचि ने उन्हें प्यार से हड़काया। ‘दीदी ठीक है, फिर तो हम मां से बोल देंगे!’ टोया ने आखिरी तीर छोड़ा। रुचि थोड़ी सहम गई, लेकिन बहनों के दबाव में नहीं आई।
रुचि उनकी गोद ली हुई बेटी थी। उसके घर आने के छह साल बाद ये दोनों मां की गोद में आई थीं। पापा रुचि को बहुत प्यार करते थे, लेकिन मां बहुत चिड़चिड़ी हो गई थीं। रुचि दोनों छोटी बहनों को जिम्मेदार बहन की तरह अच्छा खाना-पीना देना चाहती थी। वह चाहती थी कि उसकी दोनों बहनें जंक फूड जैसी बेकार चीजें न खाकर घर का खाना खाएं। मगर टोया और टुकटुक तो उसकी बात मानने को तैयार ही नहीं होती थीं। दोनों बहनें मां के अत्यधिक दुलार-प्यार में बिगड़ गई थीं। ब्रेकफास्ट से लेकर डिनर तक सिर्फ नूडल्स, मैगी, पिज्जा, बर्गर आदि चीजें ही खाना चाहतीं। घर का बना दाल-चावल, रोटी देखते ही उनकी भूख खत्म हो जाती। फिर भूखी रहने का नाटक कर मां पर दबाव बनातीं और सारी चीजें आधे घंटे में घर पर हाजिर।
रुचि मां को समझाती कि सप्ताहांत में कोई एक फूड मंगवा दिया करिए या उन दोनों को बाहर डिनर करा दीजिए। हर दूसरे दिन बाहर से खाना मत मंगवाइए। इन्हें आदत पड़ गई है। ये घर का खाना अब खाना ही नहीं चाहती हैं। मां को लगता कि रुचि उन दोनों से जल रही है। वे रुचि को ताना देतीं कि उन दोनों के आने से उसका प्यार बंट गया है, इसलिए रुचि उनके खाने-पीने पर नजर रखती है। रुचि अपनी दोनों छोटी बहनों की आदतें इस तरह खराब होते नहीं देख पा रही थी।
घर में कोल्डड्रिंक की बोतलें रखी रहतीं। वह ताजा मौसमी फल लाती, तो वे दोनों बहनें ग्लास में कोल्ड ड्रिंक डाल कर ले आतीं। जूस देख कर दोनों बहनें मुंह बिचका लेतीं। मां और दोनों बहनें रुचि की बात सुनती नहीं थीं। सभी को रुचि की याद तब आती, जब उनके पेट में दर्द होने लगता। रुचि हमेशा संतुलित आहार लेती थी। वह दूध, ताजा जूस और रोटी-दाल-चावल आदि खाती थी। वह खूब फल खाती इसलिए बीमार भी कम पड़ती, जबकि ये दोनों बहनें जब देखो, तब बीमार पड़ती रहतीं। एक बार डॉक्टर ने साफ कहा कि इन दोनों बहनों को संतुलित आहार दें। बाहर का कुछ न खिलाएं, मगर मां का लाड़ इतना ज्यादा था कि उन दोनों बहनों पर असर ही नहीं होता था। मां इस बार हालांकि थोड़ा परेशान थीं, क्योंकि टुकटुक के पेट में हमेशा दर्द रहने लगा था। डर कर मां भी रुचि केसाथ डॉक्टर के पास गईं। डॉक्टर ने उन्हें साफ-साफ कहा कि दोनों बहनों को न केवल बाहर के खाने से बचाना है, बल्कि उन्हें घर में भी केवल दाल, रोटी, चावल, दही, अंडा जैसी चीजें ही देनी हैं। टुकटुक को ज्यादा जंकफूड खाने से पेट में इंफेक्शन हो गया था, जिसके कारण अक्सर उसके पेट में दर्द रहने लगा था।
‘डॉ. साहब, इसका दर्द ठीक तो हो जाएगा न?’ मां ने रुआंसा होकर पूछा... ‘जी, एकदम ठीक हो जाएगा। जंक फूड खाने से इसके पेट में कीड़े हो गए हैं। इसके कारण इंफेक्शन हो गया है! आप दवाइयों के साथ बाहर के खाने से परहेज रखिए। आपकी बेटी ठीक हो जाएगी।’ मां ने रुचि का हाथ पकड़ा। उनकी आंखों में गहरा अफसोस भरा था। वे सोच रही थीं कि उन्होंने हमेशा रुचि की बात को गलत माना और बच्चियों की बात को सही। वे बोलीं-‘मैं इनके प्यार में इतनी अंधी हो गई थी कि उनकी हर गलत बात मानती चली गई!’ रुचि ने हंसते हुए मां के गले में बांहें डाल दीं! आज उसे अपनी बहनों के लिए बहुत खुशी हो रही थी। उसे भी लग रहा था कि उसकी दोनों बहनें बस जल्द ठीक हो जाएं।
मनोचिकित्सक की राय
मनोचिकित्सक सोनिया पुआर ने बताया कि खान-पान की चीजों की खरीदारी करते समय या भोजन बनाते समय बच्चों को भी शामिल करें। इससे पौष्टिक भोजन और पोषण के प्रति उनकी जागरूकता बढ़ेगी। बच्चों को बाजार ले जाकर उन्हें अपनी पसंद के फलों व सब्जियों का चुनाव करने को कहें। खाना बनाते समय उनकी छोटी-मोटी सहायता लें, जैसे कि पानी लाना, सब्जी धोना-साफ करना आदि। घर में स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले भोजन सीमित मात्रा में रखें। पौष्टिक भोजन आसानी से मिलने वाली जगह पर रखें। उदाहरण के लिए, फलों वाली टोकरी डाइनिंग टेबल पर रखें। साबुत अनाज वाले ब्रेड या अन्य खाद्य पदार्थ अलमारी में सबसेआगे रखें। बढ़िया और खराब भोजन बताने की बजाय संतुलित और पौष्टिक आहार खाने पर बल दें। जब भूख लगी हो, तभी उन्हें खाने को दें। कोई एक फल या भोजन खाने पर जोर देने की बजाय कई तरह के विकल्प उनके सामने रखें।
यह भी पढ़ें: जागरण संस्कारशाला: पौष्टिक आहार से मिली जीत
