ISS से गगनयान तक... दूसरी अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी में जुटे कैप्टन शुभांशु शुक्ला, भारत रचेगा इतिहास
कैप्टन शुभांशु शुक्ला, भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री, गगनयान मिशन के लिए अपनी दूसरी अंतरिक्ष यात्रा की तैयारी कर रहे ...और पढ़ें

भारत के अंतरिक्ष अभियानों के लिए यह महत्वपूर्ण समय- शुभांशु शुक्ला (फाइल फोटो)
HighLights
शुभांशु शुक्ला गगनयान मिशन की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा हेतु तैयार।
गगनयान भारत को मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन में चौथा देश बनाएगा।
आईएसएस से लौटकर इसरो के गगनयान प्रशिक्षण में जुटे।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जाने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री कैप्टन शुभांशु शुक्ला का कहना है कि भारत के अंतरिक्ष अभियानों के लिए यह महत्वपूर्ण समय है। गगनयान मिशन के प्रशिक्षण में वह वायु सेना के पायलट के रूप में मिले अनुभवों का लाभ उठा रहे हैं।
जो भी नया विमान आए, उसे उड़ाकर यह साबित करना होता है कि उसकी परिचालन सीमाएं सुरक्षित हैं। अपनी दूसरी अंतरिक्ष यात्रा की तैयारी कर रहे शुभांशु ने इसरो की पहली मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान को एक 'प्रोटोटाइप' मिशन बताया।कैप्टन शुक्ला ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारतीय अंतरिक्ष बिरादरी, विशेष रूप से इसरो के प्रति बहुत सम्मान है।
मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन
मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन की ओर बढ़ना एक बहुत बड़ा बदलाव है। यह हमारे अब तक के कार्यों और भविष्य के कार्यों से बिल्कुल अलग है। गगनयान मिशन अंतरिक्ष अनुसंधान की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को एक विशिष्ट स्थान दिलाएगा।
पिछले साल जून में तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ कैप्टन शुक्ला ने नासा के एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रा की और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 18 दिन बिताए। यह 41 वर्षों के बाद किसी भारतीय की अंतरिक्ष में वापसी थी। इससे पहले विंग कमांडर राकेश शर्मा 1984 में अंतरिक्ष यात्रा करने वाले पहले भारतीय बने थे। ठीक एक साल बाद शुक्ला अब बेंगलुरु में हैं।
वह तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ इसरो के गगनयान मिशन के लिए चुने गए हैं। वह अपने परिवार के साथ बेंगलुरु के अंतरिक्ष उड़ान केंद्र में रहते हैं और अपनी दूसरी अंतरिक्ष यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। अनुमानित रूप से 2027 के मध्य में निर्धारित इस मिशन का उद्देश्य मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान में भारत की क्षमता का प्रदर्शन करना है।
भारतीय समुद्री क्षेत्र
इसके तहत तीन अंतरिक्ष यात्रियों की एक टीम को तीन दिनों के लिए 400 किलोमीटर की निचली-पृथ्वी कक्षा में भेजकर उन्हें भारतीय समुद्री क्षेत्र में सुरक्षित रूप से वापस लाया जाएगा। यदि यह प्रयास सफल होता है, तो भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन में सफलता हासिल करने वाला विश्व का चौथा देश बन जाएगा।
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