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ISRO के निजीकरण पर 9 कर्मचारी यूनियनों ने लिखी चिट्ठी, पूछा- क्या हम सिर्फ रिसर्च करेंगे

Published: Sun, 06 Sep 2026 10:28 AM (IST)Updated: Sun, 06 Sep 2026 10:31 AM (IST)

भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोले जाने के फैसले के छह साल बाद, इसरो के नौ कर्मचारी ...और पढ़ें

ISRO के निजीकरण पर 9 कर्मचारी यूनियनों ने लिखी चिट्ठी(फोटो: एएनआई)

ISRO के निजीकरण पर 9 कर्मचारी यूनियनों ने लिखी चिट्ठी(फोटो: एएनआई)

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डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के सरकार के फैसले के छह साल बाद पहली बार, इसरो केंद्रों के नौ कर्मचारी संघों ने इस बदलाव की दिशा और इसके आधार को लेकर औपचारिक रूप से चिंता जाहिर की है।

अंतरिक्ष विभाग के तहत हजारों कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन संघों ने अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष से इस मुद्दे पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है, जो DoS के सचिव और इसरो अध्यक्ष भी हैं।

रिसर्च बुटीक तक सीमित न रहे इसरो

4 सितंबर को सौंपे गए मांग पत्र में कर्मचारी संघों ने कहा कि तय व्यावसायिक गतिविधियों में निजी भागीदारी एक मजबूत और सार्वजनिक स्वामित्व वाले इसरो के साथ सह-अस्तित्व में रह सकती है।

लेकिन बिना किसी चर्चा के ऐसी नीति को स्वीकार नहीं किया जा सकता, जो इसरो को केवल एक R&D बुटीक यानी रिसर्च और डेवलपमेंट तक सीमित बना दे और देश के लॉन्च वाहनों का निर्माण और संचालन सार्वजनिक हाथों से बाहर चला जाए।

कर्मचारियों ने इसरो द्वारा विकसित तकनीक को राष्ट्रीय संपत्ति बताते हुए कहा कि इसका हस्तांतरण पारदर्शी, जवाबदेह और रणनीतिक सुरक्षा और रोजगार के हितों के अनुकूल होना चाहिए।

इस संयुक्त ज्ञापन पर इसरो स्टाफ एसोसिएशन SHAR एम्प्लॉइज एसोसिएशन, Isac एम्प्लॉइज एसोसिएशन सहित नौ प्रमुख संगठनों ने हस्ताक्षर किए हैं।

IN-SPACe अध्यक्ष के बयान पर उठे सवाल

कर्मचारी संघों ने इन-स्पेस के अध्यक्ष पवन गोयनका के हालिया सार्वजनिक बयान का भी जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि इसरो अंततः किसी भी लॉन्च वाहन का निर्माण नहीं करेगा।

संघों ने सवाल पूछा है कि क्या गोयनका का बयान भारत सरकार, अंतरिक्ष आयोग या अंतरिक्ष विभाग का स्वीकृत निर्णय है? यदि हां, तो इस नीतिगत फैसले की तारीख और आधिकारिक जानकारी साझा की जानी चाहिए।

यूनियनों ने PSLV, LVM-3 और SSLV जैसे वाहनों के डिजाइन, विकास, एकीकरण, परीक्षण और लॉन्चिंग में इसरो की भविष्य की भूमिका को लेकर भी स्पष्टता मांगी है।

नई भर्तियों पर संकट की आशंका

कर्मचारियों ने करदाताओं के पैसे और पीढ़ियों की मेहनत से तैयार की गई तकनीक, परीक्षण सुविधाओं और लॉन्च कॉम्प्लेक्स को निजी ऑपरेटरों को सौंपने की प्रक्रिया पर भी लिखित जवाब मांगा है। उनका मानना है कि लॉन्च व्हीकल और सैटेलाइट निर्माण से इसरो के पीछे हटने से इन-हाउस काम घटेगा।

उन्हें इस बात का डर है कि इससे मौजूदा कर्मचारियों को सरप्लस मान लिया जाएगा या उनके पास कोई काम नहीं बचेगा। इसके अलावा, ग्रुप A, B और C पदों पर नियमित भर्तियां और भी कम हो जाएंगी, जिससे उन मेधावी युवाओं को निराशा होगी जो इसरो में काम करने का सपना देखते हैं।

रचनात्मक भावना से उठाई गई चिंता

हाल ही में GSLV-F17/EOS-05 मिशन की शानदार सफलता पर इसरो को बधाई देते हुए पत्र में कहा गया कि हमने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हम राख से उठकर फीनिक्स पक्षी की तरह उड़ सकते हैं।

संघों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह ज्ञापन एक रचनात्मक और लोकतांत्रिक भावना के साथ सौंपा है। उन्होंने कहा कि इसरो और राष्ट्रीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रति हमारी वफादारी पर कोई सवाल नहीं है।

इसी वफादारी के कारण हम मानते हैं कि अनिश्चितता के एक स्थायी नीति में बदलने से पहले स्पष्टता की मांग करना हमारा कर्तव्य है। संघों ने कहा है कि लिखित जवाब मिलने के बाद ही वे आगे की कार्रवाई तय करेंगे।

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