श्रीहरिकोटा [आंध्रप्रदेश]। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में एक और सफलता दर्ज करते हुए इसरो ने गुरुवार तड़के अपने तीसरे नेवीगेशन सेटेलाइट आइआरएनएसएस 1सी को प्रक्षेपित किया। वह इसके साथ ही अमेरिकी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम [जीपीएस] की तरह खुद का नेवीगेशन सिस्टम स्थापित करने के करीब पहुंच गया है। इसे पीएसएलवी सी26 राकेट से प्रक्षेपित किया गया। इस सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को बधाई दी है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन [इसरो] की भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली [आइआरएनएसएस] स्थापित करने के लिए सात उपग्रह भेजने की योजना है। इसे 1420 करोड़ रुपये की लागत से 2015 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस श्रृंखला में आइआरएनएसएस 1सी तीसरा उपग्रह है। इसे प्रक्षेपित करने के साथ ही भारत ने पहली बार एक साल में चार उपग्रह लांच किए हैं।

राकेट तड़के ठीक 1.32 बजे फ‌र्स्ट लांच पैड से ऊपर उठना शुरू हुआ। रात के अंधरे में उससे निकलने वाली लपटें सुनहरी तरंगों जैसी लग रही थीं। प्रक्षेपण के 20 मिनट बाद ही 1,425.4 किलो वजनी उपग्रह को सफलतापूर्वक तय कक्षा में स्थापित कर दिया गया। प्रक्षेपण को सफल बताते हुए इसरो चेयरमैन राधाकृष्णन ने उम्मीद जताई कि 45 दिनों के भीतर जीएसएलवी मार्क 3 को प्रक्षेपित किया जाएगा। यह इसरो की बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं में एक है।

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दो उपग्रह हो चुके हैं प्रक्षेपित

इससे पहले श्रृंखला के दो उपग्रह प्रक्षेपित किए जा चुके हैं। इनमें से आइआरएनएसएस 1ए को एक जुलाई 2013 और आइआरएनएसएस 1बी को इस साल 4 अप्रैल को प्रक्षेपित किया गया था। आइआरएनएसएस प्रणाली शुरू करने के लिए कम से कम चार उपग्रहों का प्रक्षेपण जरूरी है।

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नेवीगेशन सेटेलाइट का मकसद

स्थलीय और समुद्री नौवहन, आपदा प्रबंधन, वाहनों का पता लगाना, बेड़ा प्रबंधन, पर्वतारोहियों और यात्रियों के यात्रा मार्ग में मदद और चालकों को नौवहन में मदद करना है।

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शीर्ष देशों के समूह में भारत

तीसरा नेवीगेशन सेटेलाइट लांच करने के साथ ही भारत शीर्ष देशों के समूह में शामिल हो गया है जिनका अपना नेवीगेशन सिस्टम है। यह अमेरिका के जीपीएस, रूस के ग्लोनास और यूरोप के गैलीलियो की तरह का है। चीन और जापान की भी इसी तरह की प्रणालियां बेईदोउ और क्वासी जेनिथ हैं।

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Posted By: Sachin k

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