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ISRO को लगातार दूसरी बार मिली असफलता, मिशन 'अन्वेषा' फेल होने पर 16 सैटेलाइट के भविष्य पर संकट

Published: Mon, 12 Jan 2026 01:12 PM (IST)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का PSLV-C62/EOS-N1 मिशन PS3 स्टेज में गड़बड़ी के कारण विफल हो गया। DRDO द्वारा विकसित ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज PSLV-C62/ईओएस-एन1 मिशन के तहत DRDO द्वारा विकसित अत्यंत गोपनीय हाइपरस्पेक्ट्रल निगरानी उपग्रह 'अन्वेषा' का प्रक्षेपण किया। लेकिन PS3 स्टेज पर आई गड़बड़ी के कारण यह मिशन फेल हो गया। ऐसा लगातार दूसरी बार है, जब पीएसएलवी रॉकेट परियोजनाओं में असफलता का सामना करना पड़ा।

सोमवार सुबह 10:18 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरने वाले PSLV-C62 मिशन के तीसरे चरण में एक 'असामान्य विचलन' (deviation) देखा गया, जिससे इसमें सवार EOS-N1 और अन्वेषा सहित सभी 16 उपग्रहों का भविष्य अधर में लटक गया है। इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने पुष्टि की है कि रॉकेट अपने निर्धारित पथ से भटक गया है।

असफल होने से किया परहेज

इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने कहा कि डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है और अंतरिक्ष एजेंसी जल्द से जल्द विवरण साझा करेगी, हालांकि उन्होंने मिशन को सफल या असफल घोषित करने से परहेज किया।

इसरो के अनुसार, प्रक्षेपण के शुरुआती कुछ मिनट योजना के अनुरूप रहे। चार चरणों वाले रॉकेट, पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल के पहले और दूसरे चरण ने सामान्य रूप से काम किया। हालांकि, तीसरे चरण के दौरान समस्याएं उत्पन्न हुईं, जहां रॉकेट के प्रक्षेप पथ में विचलन देखा गया। इसके बाद यह अपेक्षित मार्ग पर आगे नहीं बढ़ सका। 64 प्रक्षेपणों में पाँच विफलताएँ कोई खराब रिकॉर्ड नहीं मानी जातीं।

मानक प्रक्रिया के अनुसार, इसरो ने 2025 मिशन के बाद एक विफलता विश्लेषण समिति का गठन किया था। हालांकि, उस समिति के निष्कर्ष कभी सार्वजनिक नहीं किए गए, जिससे विफलता का सटीक कारण अज्ञात ही रह गया। इसके बावजूद, इसरो ने 2026 के अपने पहले प्रक्षेपण के रूप में पीएसएलवी-सी62 को लॉन्च करने का निर्णय लिया।

PSLV-C62 में कुल 16 उपग्रह थे, जिनमें EOS-N1 और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित अन्वेषा नामक एक निगरानी उपग्रह शामिल थे। जो अंतरिक्ष में ही भटक गए हैं।

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