ISRO कैसे रोक रहा VB-G RAM G में फर्जीवाड़ा? कागजों में काम दिखाकर नहीं हड़प सकेंगे पैसा
ग्रामीण रोजगार योजना VB-G RAM G में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए इसरो की मदद ली जा रही है।
-1786459076425_m.webp)
VB-G RAM G में ISRO की सैटेलाइट से पकड़ा जा रहा फर्जीवाड़ा

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। गांवों में रोजगार देने वाली नई व्यवस्था वीबी-जी राम जी में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए इसरो की मदद ली जा रही है।
अब सिर्फ यह नहीं देखा जा रहा कि मस्टर रोल में कितने मजदूरों के नाम दर्ज हैं, बल्कि यह भी जांच हो रही है कि काम पर पहुंचा मजदूर वही है या कोई अन्य।
साथ ही जिस काम के नाम पर पैसा खर्च किया जा रहा है, वह जमीन पर सचमुच में हुआ है या नहीं। यानी निगरानी के दो स्तर हैं- मजदूर की हाजिरी और काम की सच्चाई।
मजदूरों की पहचान के लिए फेस आथेंटिकेशन और काम की जगह की निगरानी के लिए जियो-टैगिंग का प्रयोग हो रहा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय का कहना है कि इससे फर्जीवाड़े में काफी हद तक कमी आ गई है।
मजदूरों की पहचान के लिए फेस ऑथेंटिकेशन का उपयोग
काम की जगह और निर्मित परिसंपत्तियों की निगरानी में इसरो का नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) मदद कर रहा है। यह उपग्रह से मिली तस्वीरों और आंकड़ों की पहचान करता है।
इसरो का 'भुवन' नामक प्लेटफार्म पर नक्शे और उपग्रह आधारित जानकारी उपलब्ध होती है। इसी प्लेटफार्म पर जुलाई से 'भूग्राम' नाम से एक आनलाइन व्यवस्था शुरू की गई है।
इसमें बने तालाब, सड़क एवं अन्य परिसंपत्तियों के साथ चल रहे कामों की जानकारी नक्शे पर अपलोड की जाती है।
उपग्रह डेटा से ली जा रही मदद
उपग्रह से मिली जानकारी और पंचायत के आंकड़ों को भी इससे जोड़ा जाता है। पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की योजना बनाने में मदद के लिए भी इसरो का एक 'युक्तधारा' प्लेटफार्म है।
इसके जरिये तय किया जाता है कि कहां-किस तरह के काम की जरूरत है। 'युक्तधारा' के माध्यम से अभी तक 26.97 लाख कामों की योजना बनाई जा चुकी है। इनमें से 6.03 लाख काम वीबी-जी राम जी के तहत लिए गए हैं और 2.27 लाख काम अभी चल रहे हैं।
एक ही जगह बार-बार काम दिखाने की गुंजाइश नहीं के बराबर
'युक्तधारा' का एक बड़ा फायदा यह है कि एक ही जगह पर बार-बार काम दिखाने की गुंजाइश नहीं के बराबर होती है। अगर किसी गांव में पहले से तालाब या सड़क बनी हुई है तो उसकी सूचना नक्शे पर मौजूद रहेगी।
नया काम तय करते समय अधिकारी उसे देख सकते हैं। इससे एक ही काम को अलग-अलग योजनाओं में दो बार दिखाकर फर्जीवाड़ा नहीं हो सकेगा।
कार्य की प्रगति पर भी होती है नजर
सरकार ने कामों की निगरानी के लिए भौगोलिक जानकारी को नक्शे पर प्रदर्शित करने की प्रणाली (जीआइएस), योजनाओं की जानकारी और प्रगति का आनलाइन रिकार्ड (एमआइएस) और दूसरे डिजिटल सिस्टम को भी जोड़ा है। इससे काम कहां हो रहा है, कितनी प्रगति है और वहां क्या बनाया गया, इसकी जानकारी मिलती है।
मजदूरों की हाजिरी मौके पर ही फोटो के जरिये दर्ज की जाती है। इससे दूसरे के नाम पर हाजिरी लगाने की गुंजाइश कम होती है। अगर तकनीकी कारणों से वास्तविक मजदूर की हाजिरी नहीं लग पाए तो उसके लिए अलग व्यवस्था भी रखी गई है।
