नई दिल्ली, जेएनएन। इसरो ने अंतरिक्ष यान पीएसएलवी-सी43 की मदद से 31 उपग्रहों को लॉन्च किया है। इसमें भारत की हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह (HySIS) और आठ अन्य देशों की 30 उपग्रह शामिल हैं। यह पीएसएलवी की 45वीं उड़ान है। पढ़िए 10 प्लाइंट्स में इस मिशन से जुड़ी खासियत.....

isro misson

  • भारत सहित 9 देशों के 31 उपग्रहों को पोलर सैटलाइट लॉन्च वीइकल (पीएसएलवी) सी-43 के जरिए लॉन्च किए गया। यह पीएसएलवी की 45वीं उड़ान है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV C43 छोड़ा गया। इसमें एक माइक्रो और 29 नैनो सैटेलाइट शामिल हैं। पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) की इस साल में यह छठी उड़ान थी।
  • इसरो ने दो साल में चौथी बार 30 से ज्यादा सैटेलाइट लॉन्च किए। जनवरी 2017 में 104 उपग्रह लॉन्च कर इसरो ने रिकॉर्ड बनाया था। पीएसएलवी इसरो का तीसरी पीढ़ी का प्रक्षेपण यान है। आर हटन इस मिशन के डायरेक्टर हैं।
  • इसरो ने कहा कि इन उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए उसकी वाणिज्यिक इकाई (एंट्रिक्स कारपोरेशन लिमिटेड) के साथ करार किया गया है।
  • प्रक्षेपण की उल्टी गिनती 28 घंटे पहले बुधवार की सुबह 5:58 बजे शुरू हो गई थी। इसमें इसमें भारत के अलावा अमेरिका (23 उपग्रह) और ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कोलंबिया, फिनलैंड, मलयेशिया, नीदरलैंड और स्पेन (प्रत्येक का एक उपग्रह) शामिल हैं।
  • यह प्रक्षेपण 4 स्टेज में लॉन्च हुआ।

पहली स्टेज: पीएसएलवी 139 सॉलिड रॉकेट मोटर इस्तेमाल करता है, जिसे 6 सॉलिड स्टूप बूस्ट करते हैं।
दूसरी स्टेज: लिक्विड रॉकेट इंजन का यूज होता है, जिसे विकास नाम से पहचाना जाता है।
तीसरी स्टेज: सॉलिड रॉकेट मोटर मौजूद है, जो ऊपरी स्टेज को ज्यादा ताकत से धकेलती है।
चौथी स्टेज: पेलोड से नीचे मौजूद हिस्सा चौथी स्टेज है, इसमें दो इंजन मौजूद होते हैं।

  •  भारत की हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह (हाइसइस) इस मिशन की प्राथमिक सैटलाइट है। हाइसइस 44.4 मीटर लंबे और 230 टन वजनी पीएसएलवी रॉकेट से छोड़ा गया। पृथ्वी की निगरानी के लिए इसरो ने हाइसइस को तैयार किया। हाइसइस पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड का भी अध्ययन करेगा, साथ ही सतह का भी अध्ययन करेगा।
  • HySIS एक विशेष चिप की मदद से तैयार किया जाता है जिसे तकनीकी भाषा में ‘ऑप्टिकल इमेजिंग डिटेक्टर ऐरे’ कहते हैं। इसे रणनीतिक उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा।
  • HySIS की मदद से पृथ्वी धरती के चप्पे-चप्पे पर नजर रखना आसान हो जाएगा, क्योंकि लगभग धरती से 630 किमी दूर अंतरिक्ष से पृथ्वी पर मौजूद वस्तुओं के 55 विभिन्न रंगों की पहचान आसानी से की जा सकेगी।
  • इस उपग्रह का उद्देश्य पृथ्वी की सतह के साथ इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पैक्ट्रम में इंफ्रारेड और शॉर्ट वेव इंफ्रारेड फील्ड का अध्ययन करना है। HySIS एक विशेष चिप की मदद से तैयार किया जाता है जिसे तकनीकी भाषा में ‘ऑप्टिकल इमेजिंग डिटेक्टर ऐरे’ कहते हैं।
  • हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग या हाइस्पेक्स इमेजिंग की एक खूबी यह भी है कि यह डिजिटल इमेजिंग और स्पेक्ट्रोस्कोपी की शक्ति को जोड़ती है। हाइस्पेक्स इमेजिंग अंतरिक्ष से एक दृश्य के हर पिक्सल के स्पेक्ट्रम को पढ़ने के अलावा पृथ्वी पर वस्तुओं, सामग्री या प्रक्रियाओं की अलग पहचान भी करती है। इससे पर्यावरण सर्वेक्षण, फसलों के लिए उपयोगी जमीन का आकलन, तेल और खनिज पदार्थों की खानों की खोज आसान होगी।

 

Posted By: Nancy Bajpai

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