अंतरिक्ष में और मजबूत हुई भारत की नजर, 'नाविक' के 4 उपग्रह हुए सक्रिय; जल्द ग्लोबल क्लब में शामिल होगा इंडिया
इसरो ने एनवीएस-03 उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया, जिससे भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली 'नाविक' और मजबूत हुई। अब भारत के पास चार नेविगेशन उपग्रह हैं।

अंतरिक्ष में भारत की बढ़ती ताकत

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डिजिटल डेस्क, श्रीहरिकोटा। अंतरिक्ष में भारत की ताकत लगातार बढ़ रही है। एनवीएस-03 के सफल प्रक्षेपण के साथ भारत का स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली 'नाविक' (नेविगेशन विद इंडियन कान्स्टेलेशन) और सशक्त हो गया है।
जीएसएलवी-एफ18 राकेट ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से शुक्रवार रात 11 बजकर 51 मिनट पर एनवीएस-03 के साथ सफलता की उड़ान भरी थी और 2,232 किलोग्राम वजनी एनवीएस-03 निर्धारित कक्षा में स्थापित हो गया। अब भारत के पास कक्षा में चार नेविगेशन उपग्रह हो गए हैं।
इस मिशन की सफलता के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा, बेहतर पोजीशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग (पीएनटी) सेवाओं के लिए कम से कम चार उपग्रहों की जरूरत होती है। इस प्रक्षेपण के साथ अब भारत के चार नेविगेशन उपग्रह कक्षा में हैं। हालांकि, निर्बाध सेवाएं और बेहद सटीक स्थिति निर्धारण सुनिश्चित करने के लिए कक्षा में सात उपग्रहों को तैनात करना होगा।
इसरो अगले पांच महीने में एनवीएस-04 और दस महीने में एनवीएस-05 के प्रक्षेपण की तैयारी। एक अन्य उपग्रह को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया चल रही है। इसके पूरा होने पर भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा, जिनके पास अपना स्वतंत्र नेविगेशन उपग्रह समूह है।
नारायणन ने बताया कि नाविक के माध्यम से 10,400 रेल इंजनों और 64 हजार मछली पकड़ने वाली नौकाओं की वास्तविक समय में निगरानी की जा रही है। देशभर के वाहनों में 15 लाख ट्रैकिंग उपकरण लगाए जा चुके हैं। इस बीच इसरो के पूर्व चेयरमैन जी. माधवन नायर ने एनवीएस 3 के सफल प्रक्षेपण को भारत के लिए गर्व का क्षण बताया। एएनआइ के साथ बातचीत में नायर ने कहा कि इस मिशन की सफलता इसरो की क्षमता को दर्शाता है।
गगनयान जी मिशन समेत पांच प्रक्षेपण की तैयारी
इसरो अध्यक्ष ने चालू वित्त वर्ष के लिए अंतरिक्ष अभियानों की महत्वाकांक्षी योजना भी साझा की। उन्होंने बताया कि इसरो का लक्ष्य इस अवधि में पांच और प्रक्षेपण करना है। इनमें बहुप्रतीक्षित मानवरहित 'गगनयान जी' मिशन भी शामिल है।
'गगनयान जी' गगनयान मिशन के तहत प्रस्तावित मानवरहित मिशन से है। इस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों के बिना स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रणाली को अंतरिक्ष में भेजकर उसकी क्षमताओं का परीक्षण किया जाएगा।
इसरो प्रमुख ने कहा, हमारा लक्ष्य इस वित्त वर्ष में मानवरहित ‘गगनयान जी’ मिशन समेत पांच और लॉन्च करना है।
नारायणन ने गगनयान कार्यक्रम को देश का अत्यंत प्रतिष्ठित, महत्वपूर्ण और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण अभियान बताया। इसका उद्देश्य स्वदेशी राकेट के माध्यम से भारतीय अंतरिक्षयात्रियों यानी गगनयात्रियों को अंतरिक्ष में भेजना है। इसरो अब तक आठ हजार से अधिक परीक्षण पूरे कर चुका है।
मानव को अंतरिक्ष में भेजने से पहले तीन मानवरहित मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गगनयात्रियों की सुरक्षा इसरो की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए फिलहाल मानवरहित अभियानों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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