नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए सरकार का संकल्प दोहराते हुए धर्मांतरण पर सवाल उठाया है। राज्य अल्पसंख्यक आयोगों के सम्मलेन को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने पूछा कि आखिरकार सेवा के लिए धर्मांतरण जरूरी क्यों है?

घर वापसी के विवादों पर बयानबाजी से बचते रहे राजनाथ ने सोमवार को धर्मांतरण पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि हम एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करते हुए साथ-साथ रहते हैं, तो धर्मांतरण की कोई जरूरत ही नहीं रह जाएगी। धर्मांतरण और घर वापसी के विवादों से सरकार को दूर रखते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे मामले में समाज की भूमिका ज्यादा अहम होती है।

इसके साथ ही राजनाथ ने यह भी कहा कि सरकार अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। भगवान की शपथ लेते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है। उनके अनुसार अल्पसंख्यकों की राष्ट्रभक्ति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है और किसी धर्म का अन्य धर्म पर प्रभुत्व सिद्ध करने का कोई कारण नहीं है।

पिछड़ापन दूर करेगी सरकार

अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेप्तुल्ला ने भी भरोसा दिया कि मोदी सरकार अल्पसंख्यकों के आर्थिक एवं शैक्षिक पिछड़ेपन की समस्या सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है। जबकि अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने भी अल्पसंख्यक कल्याण के लिए आवंटित धन के उचित तरीके से उपयोग का भरोसा दिया।

कानून की वकालत

राजनाथ ने कहा कि घर वापसी और धर्मांतरण के बारे में कभी-कभी अफवाहें फैलती हैं। विवाद भी होते हैं। ऐसे में धर्मांतरण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना सबसे सरल उपाय है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में अल्पसंख्यक समुदाय धर्मांतरण विरोधी कानून की मांग करता है, लेकिन भारत में स्थिति इसके उलट है। धर्मांतरण विरोधी कानून की आवश्यकता पर देश में बहस होनी चाहिए।

राजनाथ ने पूछा

* क्या धर्मांतरण जरूरी है?

* क्या धर्मांतरण का सहारा लिए बिना समाज सेवा नहीं की जा सकती?

* क्या धर्मांतरण को बढ़ावा दिए बगैर कोई धर्म फल-फूल नहीं सकता?

* क्या कोई देश अपने जनसांख्यिकीय चरित्र में परिवर्तन की अनुमति देगा?

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Edited By: Rajesh Niranjan