ईरान-अमेरिका-इजरायल जंग का दिखने लगा असर, मोबाइल फोन से प्लास्टिक तक के बढ़ने लगे दाम
ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है, जिससे आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं।
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डॉलर के मुकाबले रुपया 94 तक गिरा, आयात महंगा हुआ

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राजीव कुमार, नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले रुपए में हो रही लगातार गिरावट से आयात से जुड़ी सभी वस्तुओं के दाम बढ़ने की आशंका बढ़ती जा रही है। ईरान व अमेरिका के बीच जारी जंग के समाप्त नहीं होने के आसार से कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होना अब तय माना जा रहा है।
और टूटा रुपया
कच्चे माल के आयात महंगे होने व युद्ध की वजह से सप्लाई बाधित होने से कई वस्तुओं के उत्पादन भी प्रभावित होने जा रहे हैं। एक डॉलर का मूल्य 94 रुपए तक चला गया है।
डॉलर के मुकाबले रुपए में हो रही गिरावट को देखते आरबीआई से हस्तक्षेप की उम्मीद की जा रही है, लेकिन वैश्विक उथल-पुथल के इस काल में आरबीआई फिलहाल हस्तक्षेप करता नहीं दिख रहा है।
गत 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक डॉलर के मुकाबले रुपए के मूल्य में तीन रुपए से अधिक की गिरावट हो चुकी है।
क्या-क्या हुआ महंगा?
रुपए के कमजोर होने से आयात के लिए पहले के मुकाबले अधिक रुपए देने पड़ते हैं जिससे आयात महंगा हो जाता है।
मोबाइल फोन रिसर्च एजेंसी काउंटरप्वाइंट के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक ने बताया कि मोबाइल फोन समेत अन्य इलेक्ट्रानिक्स आइटम के निर्माण से जुड़े 80 प्रतिशत कच्चे माल के लिए भारत आयात पर निर्भर करता है।
उन्होंने बताया कि अगले महीने तक आयात की लागत बढ़ने व युद्ध की वजह से कच्चे माल की कमी को देखते हुए मोबाइल फोन के दाम बढ़ने लगे हैं।
लैपटाप, पैड जैसे आइटम महंगे
इसके अलावा फोन में लगने वाले मेमोरी के दाम में पिछले कुछ महीनों में दोगुनी बढ़ोतरी हो चुकी है। इस कारण अगले माह तक मोबाइल फोन के दाम 15 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। लैपटाप, पैड जैसे सभी आइटम महंगे होने लगे हैं या होने वाले हैं। प्लास्टिक आइटम के दाम पहले ही बढ़ चुके हैं।
कनफेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष संजय जैन ने बताया कि कच्चे माल व निर्माण लागत बढ़ने से टेक्सटाइल उद्योग वालों अपने-अपने उत्पादों के दाम में एक राउंड की बढ़ोतरी कर दी है।
कीमतों में दूसरे राउंड की बढ़ोतरी भी शुरू हो गई है। जैन कहते हैं कि अगले कुछ दिनों में युद्ध समाप्त भी हो जाता है तो सप्लाई चेन को दुरुस्त होने में महीनों लग जाएंगे। यह भी तय है कि आने वाले महीनों में खपत में भी कमी आने वाली है।
