नई दिल्‍ली, सीमा झा। International Happiness Day 2021 मेरी मां जब वनीला फ्लेवर वाला कस्टर्ड और छोले-भटूरे बनाती हैं तो मैं खुश हो जाता हूं, लेकिन यह खुशी अधिक समय तक नहीं ठहरती- कहते हैं चैतन्य। दसवीं में पढ़ने वाले चैतन्य के मुताबिक, उन्हें नहीं पता कि खुशी क्या होती है। हां, बस यही चाहते हैं कि वह हमेशा खुश रहें। कोई टेंशन न हो। चैतन्य के दोस्त सोहम जब अपनी पसंद का काम करते हैं, तो उन्हें खूब खुशी होती है, पर जैसे ही पढ़ाई की बात आती है, उन्हें तुरंत मम्मी की नसीहतें, पापा की हिदायतें और सही समय पर टास्क पूरा करने को लेकर शिक्षकों की चेतावनी याद आने लगती है। इसके बाद उन्हें खुशी कहीं नजर नहीं आती। सिर पर बना रहता है एक अजीब तरह का दबाव।

हर साल 20 मार्च को ‘अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस’ मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के सलाहकार जेमी इलियन ने पहली बार 2006 में इसका प्रस्ताव रखा था। उसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने जुलाई 2012 में इसे मनाने की घोषणा की और पहला अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस 20 मार्च, 2013 को मनाया गया। कोविड महामारी को देखते हुए इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस का थीम है-‘शांत रहिए, बुद्धिमान एवं दयालु बनिए।’

आखिर क्या है खुशी? : आप जरूर जानना चाहेंगे कि क्या है यह खुशी और कैसे इसे हमेशा बनाए रखा जा सकता है? इस सवाल के जवाब में स्कूल काउंसलर और मनोवैज्ञानिक डॉ. गीतिका कपूर कहती हैं, ‘खुशी को यदि आप पार्टी करने, मस्ती धमाल या शोर-शराबे से जोड़ते हैं तो वास्तव में यह सच नहीं है। यह खुशी का प्रतीक भर है, जो हमेशा सच हो यह जरूरी नहीं।’ दरअसल, खुशी एक अच्छे एहसास से कहीं ज्यादा बड़ी चीज है। यह केवल हंसता हुआ चेहरा यानी ‘स्माइली’ नहीं है। गीतिका कपूर इसे और खूबसूरत ढंग से बताती हैं, ‘खुशी यानी जब मन प्रफुल्लित होने का एहसास हो। आप कोई ऐसा काम करें, जिससे संतुष्टि मिले। आपको लगे कि मैंने वह किया, जो मायने रखता है। जिस काम को करने के बाद आत्मसम्मान बढ़े, खुद पर गर्व का एहसास हो। वह एहसास जो उमंग से भर देता है और आपको हरदम बेस्ट करने के लिए प्रेरित करता रहता है।’

कहां से आती है खुशी: हम सब खुश रहना चाहते हैं, पर कभी-कभी कुछ चीजें हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं। कोविड -19 के दौर में आप यह बात अच्छी तरह समझ गए होंगे कि कैसे आप भले न चाहें, लेकिन अचानक कुछ परिवर्तन आएं, तो उन्हें स्वीकार करना होता है। चैतन्य यहां बड़े पते की बात कहते हैं, ‘लोगों को लगता है कि मुश्किल समय खत्म होगा, तो खुश हो लेंगे, पर ऐसा हो यह जरूरी नहीं।’ तो फिर कहां मिलेगी, कैसे मिलेगी खुशी? डॉ. गीतिका कपूर के मुताबिक, ‘मैं तो बस यही सलाह देती हूं कि खुशी को वास्तव में समङों। इसे तब समङोंगे, जब आपको पता होगा कि आपको क्या चाहिए। आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं, औरों की नजर में आप किस तरह से याद किया जाना पसंद करेंगे, उसके लिए क्या कर रहे हैं, यह पता हो। इसलिए अपने अंदर कुरेदने की कोशिश करें कि वह क्या चीज है, जो आपको संतोष देती है, आपको आत्मगौरव का एहसास कराती है। यदि यह जान गए तो आप उसी दिशा में प्रयास करेंगे और खुशी को अक्सर अपने पास पाएंगे।’

कोविड का असर है यह : यदि आप इन दिनों अधिक चिड़चिड़े हो रहे हैं, छोटी-छोटी बातों पर झल्ला जाते हैं, अपनी बात कहना चाहते हैं, पर उसे किसी कारण से मन में रख लेना सही समझते हैं, तो इसके लिए आप कोविड को भी दोषी ठहरा सकते हैं। बच्चों, किशोरों और युवाओं के मेंटल हेल्थ के लिए कार्यरत ‘योरदोस्त डॉट कॉम’ की सह-संस्थापक ऋचा सिंह के अनुसार, कोविड ने बच्चों, किशोरों की मानसिक सेहत को बहुत नुकसान पहुंचाया है। डॉक्टर गीतिका कपूर भी इसी तरह की बात कहती हैं। वह कहती हैं, ‘स्कूल में बच्चे बिना किसी रोकटोक के दिल की बात दोस्तों से साझा कर लेते थे। अचानक वह सब बंद हो गया। दोस्तों के साथ जिस बेफिक्री से सारी बातें कह देते थे, वह घर पर नहीं हो सकता था।’ चैतन्य भी कहते हैं कि हमने समय के साथ एडजस्ट भले किया, मम्मी-पापा अच्छे दोस्त भी बन गए, लेकिन दोस्तों की जगह उन्हें नहीं दे सकते। दोस्त तो दोस्त ही होते हैं।

खुशियों का अभ्यास

  • ऐसी कौन-सी चीजें हैं, जिन्हें आप बहुत महत्व देते हैं। उन्हें बनाए रखने के लिए आप क्या कोशिशें करते हैं, उन्हें बिंदुवार लिख डालें
  • कौन-सी चीज है, जो आपको खुशी से दूर ले जा सकती है। उन्हें भी लिख डालें और अपनी कमियों पर काम करें। लिखने का कार्य खुद के प्रति जवाबदेह बनाएगा
  • यह न कहें कि मुङो तो यह काम करना ही होगा, इसके अलावा कोई चारा नहीं। यह सोचें कि यदि यह काम करेंगे, तो यह कितना संतोष देगा
  • आपको किन बातों से खुशी मिलती है, इसे आप लिखकर सार्वजनिक कर दें, तो उस पर आप बेहतर ध्यान दे सकेंगे
  • अपनी पसंद का काम करना खुशी देता है, इसलिए रोजाना कुछ समय अपने पसंदीदा काम में लगाएं
  • अलग से कुछ सीख रहे हैं तो यह आपकी मजबूती बन सकता है। चाहे वह संगीत हो, कला हो, पढ़ना-लिखना हो अथवा कुकिंग। किसी भी स्किल को सीखते हैं तो यह आपकी खुशी को और बढ़ाता है
  • उन कामों पर फोकस करें, जो सचमुच महत्व रखते हैं। जो आपको सिखाते हैं कि दूसरों की जिंदगी में हम कैसे बदलाव लाएं। चाहे पर्यावरण को बचाना हो या लोगों की मदद करना, खुशी से इन चीजों का गहरा नाता है
  • दया भाव, करुणा, समानुभति का भाव, हास्यबोध या नेतृत्व के गुण, इनमें से कोई न कोई गुण या एक से अधिक गुण आपमें होंगे। उनका अभ्यास करें। इससे व्यक्तित्व की मजबूती बढ़ती जाएगी और खुशी भी देर तक रहेगी आपके पास
  • खुशी के लिए रिश्तों की मजबूती भी जरूरी है

फिनलैंड की हेलसिंकी यूनिवर्सिटी ने कोविड काल में किशोरों-युवाओं के अनुभवों पर स्टडी की है। इसके अनुसार, इंटरनेट पर अधिक निर्भरता के कारण किशोरों में अकेलापन बढ़ा है। सामाजिक संपर्क कम होने के बाद किशोरों ने पहले से अधिक इंटरनेट पर निर्भरता दिखायी। वे इंटरनेट पर खुशी की तलाश कर रहे थे, पर वह आभासी था। वास्तव में उन्हें खुशी मिली नहीं और वे एंग्जायटी महसूस करने लगे। इस स्टडी में शोधकर्ताओं ने पाया कि इंटरनेट से हटकर जब वे घर के बड़ों की ओर देखते, तो वहां से भी निराशा हाथ लगती। सबको व्यस्त पाकर वे वापस इंटरनेट की ओर रुख कर लेते।

स्कूल काउंसलर डॉ. गीतिका कपूर ने बताया कि घर पर बच्चों की पहले सी स्वाभाविक हंसी नहीं मिलती, तो इसमें पैरेंट्स उनकी मदद करें। किशोर उम्र ऐसी होती है जब वे अपनी पहचान के लिए संघर्ष करते हैं। अपनी पसंद और नापसंद को तय कर रहे होते हैं। ऐसे में हर बात में टोकने के बजाय उन्हें घर में कोई सुनने वाला समझदार व्यक्ति चाहिए। केवल किसी के सुन भर लेने से वे खुद ब खुद सुलझने लग जाते हैं। उन्हें साथ होने का यकीन दिलाएं।

मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट सह-संस्थापक, योरदोस्त डॉट कॉम की ऋचा सिंह ने बताया कि कोविड काल में मुख्य रूप से तीन तरह की परेशानियां किशोरों में आ रही हैं। पहली, बड़ों और अपने दोस्तों से रिश्तों का उलझना। उन्हें लगा कि बड़े या उनके दोस्त उनका साथ नहीं देते, उनकी प्रशंसा नहीं करते आदि। दूसरी, आत्मसम्मान की कमी महसूस होना। खुद पर भरोसा घटना। उन्हें लगता है कि पढ़ाई में वे पीछे जा रहे हैं। करियर को लेकर सशंकित हैं। तीसरी, वे अपने काम और जिंदगी में संतुलन नहीं बना पा रहे हैं। बड़े यदि उन्हें समझ लें तो वे किशोरों को खुशी का बड़ा उपहार दे सकेंगे। वहीं, खुद किशोर भी अपनी भावनाओं की जिम्मेदारी लें। पॉजिटिव सेल्फ टॉक इसमें उनकी मदद कर सकता है।

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