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नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। वीरता के कई किस्‍से आपने सुने होंगे, मगर सैनिक की शहादत के बाद वीरांगाना को जिस तरह से जनसहयोग देकर उनकी जरूरत को पूरा किया है यह वाकई काबिले तारीफ है। इस कहानी के दो किरदार हैं पहला मध्‍यप्रदेश के एक वीर सैनिक की शहादत के बाद उनकी पत्‍नी के जर्जर मकान को जिस तरह से मिलकर ठीक करवाया गया। इसकी जितनी भी तारीफ की जाए यह कम ही होगी। इतना ही नहीं जब वह वीरांगना घर में प्रवेश के लिए द्वार पर खड़ी हुईं तब गांव के युवाओं ने अपनी हथेली जमीन पर बिछा दी और वह पांव बिना जमीन पर रखे अंदर प्रवेश कर गई। वहीं कहानी के दूसरे किरदार बिहार के हैं। यहां एक गरुड़ कमांडो आतंकियों से लोहा लेने के बाद शहीद हो गया था। बहन की शादी में उनकी पूरी यूनिट आ गई और हर रश्‍मों रिवाज को बखूबी निभाया ही नहीं, बल्‍कि उसे अपनी हथेलियों पर विदा किया। दोनों की तस्‍वीरें आपके दिल को छू लेने वाली हैं।

भारत के वीर 
बता दें कि भारत सरकार के केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने शहीद जवानों के परिवार की आर्थिक मदद के लिए 2017 में विशेष तौर पर भारत के वीर (Bharat Ke Veer) नाम से वेबसाइट www.bharatkeveer.gov.in और मोबाइल एप लॉच किया था। इस सरकारी वेबसाइट के जरिए देश की आम जनता शहीदों के परिवारो को आसानी से आर्थिक मदद पहुंचा सकती है।

शहीद की पत्नी को घर का तोहफा
देश की सेवा करते हुए 27 साल पहले शहीद हो गए मध्य प्रदेश के एक जवान की शहादत को गांव वालों ने जिस तरह सलाम किया है, वह बेमिसाल है। पति के वीरगति को प्राप्त हो जाने के बाद जर्जर मकान में रह रही राजू बाई को गांव वालों ने न केवल जन सहयोग से मकान बनवाकर दिया, बल्कि हथेलियां बिछाकर उनको गृह प्रवेश कराया। मकान बनाने वाले ठेकेदार ने मुनाफा नहीं लिया।

31 दिसंबर 1992। यह वह तारीख है, जब इंदौर के समीप पीर पिपल्या गांव निवासी राजू बाई की दुनिया उजड़ गई। असम में तैनात उनके पति और सीमा सुरक्षा बल के सिपाही मोहन सिंह ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उस वक्त राजू बाई गर्भवती थीं। उनका तीन वर्ष का एक और बेटा था। मोहन सिंह की शहादत के बाद परिवार पर मुसीबतों को पहाड़ टूट पड़ा। उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गई। पेंशन ही एक मात्र सहारा थी। परिवार के पास एक कच्चा घर था, जो समय के साथ और जर्जर होता चला गया।

शहीद की पत्नी को नए अंदाज में दिया सम्मान
इस बीच शहीद समरसता मिशन के संस्थापक मोहन नारायण उनको एक मददगार के रूप में मिले। उन्होंने और उनके साथियों ने राजू बाई से वादा कि या कि उन्हें एक साल के भीतर पक्का घर बनाकर देंगे। राजू बाई को घर देने के लिए मोहन नारायण ने ‘वन चेक-वन साइन’ नाम से अभियान चलाया। इसके जरिये लोगों से आर्थिक सहायता ली गई। कुछ दिनों में 11 लाख रुपये जमा हो गए। मकान बनाने वाले ठेके दार ने के वल मजदूरों की मजदूरी ली। इस नेक काम में सहयोग स्वरूप उसने अपना मुनाफा छोड़ दिया। 15 अगस्त को राजू बाई को सम्मानित कर गृह प्रवेश कराया गया। इस दौरान लोग उनकी राह में अपनी हथेलियां बिछाकर बैठ गए, जिन पर चलकर राजू बाई अपने नए घर तक पहुंचीं।

कराया गृह प्रवेश
शहीद समरसता मिशन के मोहन नारायण और विशाल राठी ने बताया कि शहीद के परिवार के लिए दस लाख रुपये में एक हजार वर्ग फीट जमीन पर सर्वसुविधायुक्त घर तैयार कराया गया है। एक लाख रुपये मोहन सिंह की प्रतिमा के लिए रखे गए हैं। प्रतिमा तैयार है। इसे पीर पीपल्या गांव के मुख्य मार्ग पर स्थापित कराया जाएगा। मोहन सिंह ने कहा,शाहीद के परिवार को किसी भी शासकीय योजना का लाभ नहीं मिल सका है। परिवार मेहनत-मजदूरी कर गुजारा कर रहा है। अलबत्ता, अब छोटा बेटा बीएसएफ में भर्ती हो चुका है।

मदद ही है मिशन
शहीद के परिवार को नया घर देने वाला संगठन शहीद समरसता मिशन अब एक नए मिशन पर है। मोहन नारायण का कहना है कि यह संगठन अब तक 22 शहीदों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और सम्मान कार्यक्रम आयोजित कर चुका है। अब शहीद के परिजनों की मदद करना ही मिशन है। जर्जर मकान में रह रही राजू बाई को जन सहयोग से बनाकर दिया मकान, गांव वालों ने जुटाए 11 लाख, ठेकेदार ने छोड़ दिया मुनाफा, 27 साल पहले असम में देश पर न्योछावर हो गए थे मोहन सिंह।

शहीद कमांडो ज्योति प्रकाश निराला
ऐसा ही एक वाक्‍या बिहार के रोहतास जिले का है 18 नवंबर 2017 को कश्मीर के बांदीपोरा में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए एयरफोर्स की गरुड़ यूनिट के कमांडो ज्योति प्रकाश निराला की। उनकी अपनी बहन शशिकला की शादी में गरूड़ यूनिट के 50 कमांडो मौजूद रहे। उन्‍होंने शादी की पूरी व्‍यवस्‍था तो की ही, दुल्‍हन की विदाई के दौरान उसके पैरों तले अपनी हथेलियां बिछा दीं।

गरुड़ कमांडो यूनिट और एयर चीफ मार्शल को दिया था निमंत्रण
देश पर न्योछावर होने वाले शहीद ज्‍योति प्रकाश निराला माता-पिता के इकलौते पुत्र और तीन बहनों के भाई थे। पिता तेजनारायण सिंह बताते हैं कि दूसरी बेटी शशिकला की शादी इसी साल तीन जून को डेहरी के पाली रोड निवासी उमाशंकर यादव के पुत्र सुजीत कुमार के साथ तय की। शादी की जानकारी गरुड़ कमांडो यूनिट और एयर चीफ मार्शल बीएस धनवा को भी दी थी।

शादी में पहुंचे 50 कमांडो, संभाल ली पूरी व्‍यवस्‍था
पिता तेजनारायण सिंह की आंखें फटी रह गईं, जब यूनिट के करीब 50 कमांडो यहां पहुंच गए। उन्होंने शादी की पूरी व्यवस्था अपने हाथों में ले ली थी। बेटी की शादी कैसे हुई, पता ही नहीं चला। मेरी आंखें छलक रही थीं। यह महसूस हुआ कि मेरे तो कई निराले बेटे साथ खड़े हैं।

बहन की राह में कमांडोज ने बिछा दीं अपनी हथेलियां
शादी में भाई की हर रस्म इन कमांडो ने ही अदा की। उस बहन का सौभाग्य इससे और ज्यादा क्या होगा, जिसके इतने-इतने भाई उसकी अपनी पलकों पर बिठाने को आतुर हों। उस दृश्य ने तो कन्या और वर दोनों ही पक्ष को भावविह्वल कर दिया, जब मंडप पर जा रही बहन की राह में कमांडोज ने अपनी हथेलियां बिछा दीं। बहन को विदा भी इन्हीं हथेलियों पर किया।

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ काफिले पर हुए आतंकी हमले को लेकर पूरे देश में गुस्सा था। इस हमले में देश ने अपने 40 वीर सपूतों को खो दिया था, जबकि कई जवान गंभीर रूप से घायल हैं। लोगों की आंखें नम हैं और दिलों में दुश्मन से बदला लेने की आग धधक रही थी। गुस्साए लोग जगह-जगह अपने शहीद जांबाजों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे। साथ ही आतंकवाद और पाकिस्तान के पुतले भी फूंके।

भारत सरकार के केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने शहीद जवानों के परिवार की आर्थिक मदद के लिए 2017 में विशेष तौर पर भारत के वीर (Bharat Ke Veer) नाम से वेबसाइट www.bharatkeveer.gov.in और मोबाइल एप लॉच किया था। इस सरकारी वेबसाइट के जरिए देश की आम जनता शहीदों के परिवारो को आसानी से आर्थिक मदद पहुंचा सकती है।

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Posted By: Sanjay Pokhriyal

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