विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 24, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पहली कोशिश में ही लालग्रह की कक्षा में पहुंचा भारत का यान

By Edited By:
Published: Wed, 24 Sep 2014 05:30 AM (IST)Updated: Wed, 24 Sep 2014 08:41 PM (IST)

24 सितंबर 2014 की भोर भारत के लिए अंतरिक्ष में कामयाबी की नई लालिमा लेकर आई। 10 महीने की यात्रा ...और पढ़ें

News Article Hero Image

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। 24 सितंबर 2014 की भोर भारत के लिए अंतरिक्ष में कामयाबी की नई लालिमा लेकर आई। 10 महीने की यात्रा के बाद मंगलयान को 'लाल ग्रह' की कक्षा में पहुंचाने के साथ ही इसरो के वैज्ञानिकों ने एक नया इतिहास लिख दिया। अमेरिका और रूस जैसे मुल्कों ने कई बार की नाकामी के बाद जो सफलता हासिल की, उसे भारत ने पहले प्रयास में कर दिखाया। मार्स आर्बिटर मिशन (एमओएम) की सफलता ने भारत को मंगल ग्रह तक पहुंचने वाला दुनिया का चौथा मुल्क बना दिया। भारतीय यान से सूचनाएं और तस्वीरें मिलनी शुरू हो गई हैं।

इसरो के बेंगलूर केंद्र में ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगल और मार्स ऑर्बिटर मिशन के मिलन को ऐतिहासिक उपलब्धि करार देते हुए सीमित साधनों के बावजूद इस कामयाबी के लिए वैज्ञानिकों का अभिनंदन किया। साथ ही पूरे देश को बधाई दी। मोदी ने कहा कि विषमताएं हमारे साथ रही हैं और मंगल के 51 मिशनों में से 21 मिशन ही सफल हुए हैं। लेकिन हम सफल रहे। खुशी से फूले नहीं समा रहे प्रधानमंत्री ने इसरो अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की पीठ थपथपाकर उन्हें बधाई दी।

बीते साल 5 नवंबर को अपने सफर पर रवाना हुए मंगलयान के मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंचने के 12 मिनट और 28 सेकंड बाद इससे संकेत मिलने शुरूहो गए। नासा के केनबरा और गोल्डस्टोन स्थित डीप स्पेस नेटवर्क स्टेशनों की मदद से इन संकेतों को बेंगलूर स्थित इसरो केंद्र भेजा गया। मंगलयान अपने उपकरणों के साथ करीब छह माह तक मंगल की दीर्घवृत्ताकार कक्षा में घूमता रहेगा और आंकड़े व तस्वीरें धरती पर भेजेगा।

व्याकुलता से भरे थे आखिरी क्षण

इसरो केंद्र में आखिरी क्षण सर्वाधिक व्याकुलता से भरे थे, जब उस मुख्य मोटर को शुरू किया गया जो 300 दिनों से सुप्तावस्था में थी। यान का मंगल की कक्षा में पहुंचना इसी पर निर्भर था और जरा सी चूक मंगल मिशन को अनंत अंतरिक्ष में धकेल सकती थी। सोमवार को चार सेकंड के परीक्षण के बाद बुधवार सुबह सात बजकर 17 मिनट पर 300 दिन से सोई लिक्विड एपोजी मोटर (मुख्य इंजन) को फिर चालू किया गया।

यान को मंगल की कक्षा में प्रवेश कराने के लिए इसकी गति को 22.14 किलोमीटर प्रति सेकेंड से घटाकर 4.4 किलोमीटर प्रति सेकेंड किया गया, ताकि लाल ग्रह उसे अपनी ओर खींच ले। यान दिसंबर 2013 में धरती के गुरुत्वाकर्षण की परिधि से बाहर निकला था।

सबसे किफायती अभियान

कुल 450 करोड़ रुपये की लागत वाला मंगलयान अपनी श्रेणी का सबसे कामयाब और किफायती अभियान है। यूरोपीय, अमेरिकी और रूसी यान लाल ग्रह की कक्षा में या जमीन पर पहुंचे हैं लेकिन कई प्रयासों के बाद।

लाल ग्रह का अध्ययन करेगा

मंगलयान का उद्देश्य लाल ग्रह की सतह तथा उसके खनिज अवयवों का अध्ययन करना तथा उसके वातावरण में मीथेन गैस की खोज करना है। पृथ्वी पर जीवन के लिए मीथेन एक महत्वपूर्ण रसायन है।

पढ़ें: भारतीय मंगलयान दुनियाभर में सबसे सस्ता

पढ़ें: कामयाबी की ओर मंगल मिशन