विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कीट-पतंगों से फसलों को मिलेगी राहत, 10 साल के शोध के बाद तैयार हुआ देश का पहला स्वदेशी कीटनाशक

Published: Sat, 31 Oct 2026 07:36 PM (IST)

पीआई इंडस्ट्रीज ने भारत का पहला स्वदेशी कीटनाशक 'पियोक्सानिलिप्रोले' विकसित किया है, जिसे धान, मिर्च, टमाटर और चना जैसी प्रमुख फसलों में कीट नियंत्रण के लिए मंजूरी मिली है।

कीट-पतंगों से फसलों को मिलेगी राहत (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

कीट-पतंगों से फसलों को मिलेगी राहत (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

HighLights

  1. भारत का पहला स्वदेशी कीटनाशक 'पियोक्सानिलिप्रोले' विकसित।

  2. धान, मिर्च, टमाटर, चना में कीट नियंत्रण हेतु स्वीकृत।

  3. पीआई इंडस्ट्रीज द्वारा एक दशक की मेहनत का परिणाम।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। फसलों को कीट-पतंगों से बचाने के लिए खेती को नया विकल्प मिलने जा रहा है। देश में विकसित एक नए कीटनाशक को धान, मिर्च, टमाटर और चना में इस्तेमाल की मंजूरी मिली है। हालांकि, इस पर किसानों का भरोसा तभी बढ़ेगा जब खेतों में इसके प्रभावी एवं सुरक्षित इस्तेमाल के साथ लागत तथा फसल की उपज पर पड़ने वाले असर के ठोस नतीजे सामने आएंगे।

पीआइ इंडस्ट्रीज ने मालिक्यूल पियोक्सानिलिप्रोले नाम की कीटनाशक को लगभग एक दशक की मेहनत से विकसित किया है। दावा किया है कि भारत में खोजा गया यह पहला स्वदेशी कीटनाशक है। इसे छह नवंबर को बाजार में उतारने की तैयारी है। अभी इसका इस्तेमाल चुनिंदा क्षेत्रों में किया जाएगा।

कंपनी का कहना है कि पहले सीमित मात्रा में दवा उपलब्ध कराकर किसानों के खेतों में इसका प्रदर्शन किया जाएगा और उनके अनुभव जुटाए जाएंगे। पिछले आठ दशकों से पीआई इंडस्ट्रीज भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों एवं वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम कर रही है।

कीटनाशक को धान में तना छेदक, पत्ती लपेटक और फाल आर्मीवर्म जैसे कीटों के नियंत्रण के लिए मंजूरी मिली है। मिर्च में फल छेदक और तंबाकू की इल्ली, टमाटर में फल छेदक तथा चने में फली छेदक इसके लक्षित कीट हैं। इससे किसानों को फसल के अनुसार कीट नियंत्रण का एक नया विकल्प मिल सकता है।

नई दवा का इस्तेमाल करने से पहले किसानों को इसकी कीमत, प्रति एकड़ जरूरी मात्रा और छिड़काव के सही समय की जानकारी लेनी होगी। यह भी देखना होगा कि दूसरी प्रचलित दवाओं की तुलना में इससे कितना लाभ मिलता है। केवल नई तकनीक या स्वदेश में विकास के आधार पर किसी दवा को बेहतर नहीं माना जा सकता।

प्रारंभ में एक लाख किसानों तक पहुंचने, नमूने बांटने और खेतों में प्रदर्शन करने की तैयारी है। इससे अलग-अलग मिट्टी और माहौल में दवा के प्रदर्शन को समझने में मदद मिल सकती है। किसानों के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि दवा का असर कितने समय तक रहता है और कीटों के दोबारा प्रकोप की स्थिति में क्या करना चाहिए।

कृषि रसायनों के विकास में प्रयोगशाला अनुसंधान, विषाक्तता की जांच, खेतों में परीक्षण और नियामकीय मंजूरी जैसी लंबी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इस नए अणु को विकसित करने में भी दस साल से अधिक समय लगा है। भारत में विकसित इस कीटनाशक को भविष्य में दूसरे देशों में भी उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसके लिए अलग-अलग देशों की नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।