'GSAT-7C और वरुणास्त्र से बढ़ेगी वायुसेना, नौसेना की ताकत', रक्षा मंत्रालय ने किए 4,106 करोड़ रुपये के 2 बड़े रक्षा समझौते
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 'जीसैट-7सी' संचार उपग्रह और नौसेना के लिए 'वरुणास्त्र' टारपीडो के अधिग्रहण हेतु 4,106 करोड़ रुपये के दो अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं।
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वायुसेना के लिए जीसैट-7सी संचार उपग्रह का अधिग्रहण।
HighLights
वायुसेना के लिए जीसैट-7सी संचार उपग्रह का अधिग्रहण।
नौसेना को मिला मारक क्षमता वाला वरुणास्त्र टारपीडो।
4,106 करोड़ के अनुबंध 'आत्मनिर्भर भारत' को बढ़ावा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की सुरक्षा क्षमताओं को अभूतपूर्व मजबूती देने की दिशा में सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए एक समर्पित 'जीसैट-7सी' संचार उपग्रह और नौसेना के लिए मारक क्षमता वाले भारी 'वरुणास्त्र' टारपीडो के अधिग्रहण हेतु कुल 4,106 करोड़ रुपये के दो महत्वपूर्ण अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' के विजन को एक नया आयाम देती है, जो देश को रक्षा उपकरणों के मामले में तेजी से आत्मनिर्भर बना रही है।
मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, 'यह स्वदेशी तकनीकी विकास न केवल हमारी सेनाओं की मारक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि देश के घरेलू रक्षा उद्योगों और एमएसएमई सेक्टर के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा।'
इस दिशा में, पहला अनुबंध 2,563 करोड़ रुपये की लागत से बेंगलुरु की न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड के साथ भारतीय वायुसेना के लिए 'जीसैट-7सी' संचार उपग्रह हेतु किया गया है। पूरी तरह से देश में ही डिजाइन और विकसित यह उपग्रह वायुसेना के विभिन्न उपकरणों के लिए अत्यंत सुरक्षित और मजबूत संचार नेटवर्क स्थापित करेगा, जिससे युद्ध के मैदान में सामरिक प्रभावशीलता कई गुना बढ़ जाएगी।
वहीं, दूसरा अनुबंध 1,543 करोड़ रुपये का है, जिसे हैदराबाद स्थित भारत डायनामिक्स लिमिटेड के साथ 'वरुणास्त्र' भारी टारपीडो के लिए साइन किया गया है। नौसेना विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला द्वारा विकसित यह स्वदेशी पोत-आधारित पनडुब्बी रोधी टारपीडो अपनी आधुनिक दक्षता और लंबी रेंज की क्षमताओं के साथ दुश्मन की पनडुब्बियों को नेस्तनाबूद करने में सक्षम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन स्वदेशी समझौतों से न केवल तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बेहतर होगा, बल्कि भारत वैश्विक रक्षा बाजार में एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में तेजी से उभरकर सामने आएगा।
सोर्स-न्यूज एजेंसी PTI के इनपुट के अनुसार
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