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US President Election: अमेरिकी चुनाव में भारतीयों की भूमिका होगी खास, ट्रंप को कमतर आंकना भी होगा अभी गलत

US President Election अमेरिका में राष्‍ट्रपति चुनाव की घड़ियां लगातार नजदीक आ रही हैं। ऐसे में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट प्रत्‍याशी पूरा जोर लगा रहे हैं।

By Kamal VermaEdited By: Published: Fri, 28 Aug 2020 12:57 PM (IST)Updated: Fri, 28 Aug 2020 01:18 PM (IST)
US President Election: अमेरिकी चुनाव में भारतीयों की भूमिका होगी खास, ट्रंप को कमतर आंकना भी होगा अभी गलत

नई दिल्‍ली (ऑनलाइन डेस्‍क)। US President Election अमेरिका के राष्‍ट्रपति चुनाव को दो माह का समय बचा है ऐसे में राजनीतिक सरगर्मियां वहां काफी तेज हो चुकी है। राष्‍ट्रपति पद के उम्‍मीदवार जो बिडेन और डोनाल्‍ड ट्रंप के बीच आरोप-प्रत्‍यारोपों का दौर भी शुरू हो चुका है। ऐसे में में दो माह के बाद किसके सिर दुनिया की महाशक्ति के राष्‍ट्रपति होने का ताज सजेगा ये कह पाना फिलहाल काफी मुश्किल है। किंग्‍स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर हर्ष वी पंत मानते हैं इस चुनाव में भारतीयों का रोल भी काफी अहम होगा।

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उनके मुताबिक, भले ही शुरुआत में बिडेन का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है, लेकिन अभी दो महीने का समय है। इस दौरान राष्‍ट्रपति ट्रंप की स्थिति भी मजबूत हो सकती है। उन्‍होंने इस चुनाव में भारतीयों की भूमिका के सवाल के जवाब में कहा कि वहां रहने वाले भारतीय डेमोक्रेट के परंपरागत वोटर रहे हैं। हालांकि, जिस वक्‍त ट्रंप ने चुनाव लडा था उस वक्‍त ये समीकरण बदल गया था और भारतीयों का झुकाव रिपब्लिकन की तरफ हुआ था। रिपब्लिकन की तरफ भारतीयों के झुकाव की एक बड़ी वजह पीएम मोदी का अमेरिकी दौरा भी रहा है। इसके साथ ही मोदी और ट्रंप की जुगलबंदी ने भी वहां बसे भारतीयों को ट्रंप के साथ जोड़ने में मदद की है।

प्रोफेसर पंत के मुताबिक, भारत से अगर अमेरिका के रिश्‍ते की बात करें तो बीते चार वर्षों के दौरान ट्रंप प्रशासन ने भारत के साथ मिलकर कई कदम आगे बढ़ाए हैं। चीन के मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन खुलकर भारत के समर्थन में आया है। पाकिस्‍तान के मुद्दे पर भी राष्‍ट्रपति ट्रंप खुलकर भारत का पक्ष लेते रहे हैं। सुरक्षा परिषद में भारत की अस्‍थाई सीट के लिए दावेदारी और उसका समर्थन भी इस बात का सुबूत है। रणनीतिक और व्‍यापारिक मुद्दों पर भी दोनों देशों ने खुलकर एक-दूसरे का पक्ष लिया है। कई मुद्दों पर ट्रंप ने भारत की खुलकर तारीफ भी की है। वहीं, कई बार खास मौकों पर उन्‍होंने वहां पर बसे भारतीयों का शुक्रिया कहते हुए उनका अमेरिका अर्थव्‍यवस्‍था में अहम योगदान बताया है। ऐसे कई दूसरे कारण भी है, जिनकी वजह से डेमाक्रेट को मिलने वाला पारंपरिक भारतीय वोट छिटक गया है।

वर्तमान में भी अमेरिका में बसे भारतीय न पूरी तरह से डेमोक्रेट के साथ हैं और न ही रिपब्लिकन के साथ हैं। जो कोई भी इनको अपनी तरफ मिलाने में सफल होता है तो उसको जरूर फायदा पहुंचने की उम्‍मीद है। डेमोक्रेट पार्टी की उपराष्‍ट्रपति पद के लिए उम्‍मीद्वार कमला हैरिस की मजबूत दावेदारी के सवाल पर पंत ने कहा कि इतने वर्षों तक उन्‍होंने कभी भी अपनी भारतीय पहचान का न कहीं जिक्र किया न ही कहीं खुलासा किया। अब जबकि उन्‍हें पार्टी ने अपना प्रत्याशी बनाया है तो एकाएक उन्‍हें अपनी भारतीय पहचान की याद आ गई है। उनके मुताबिक, डेमोक्रेट पार्टी ने भारतीयों को अपने खेमे में लाने के लिए उन्‍हें एक मौहरे के तौर पर इस्‍तेमाल किया है। इसके बावजूद वो भारतीयों को कितना लुभा पाएंगी ये आने वाला समय ही बताएगा।

प्रोफेसर पंत के मुताबिक, ट्रंप इस चुनाव को अपनी उन कामयाबियों के साथ लड़ना चाहते हैं, जो उन्‍होंने हासिल की है। चीन पर लगाम लगाना और उसको उसी आक्रामकता के साथ जवाब देना इसकी ही एक कड़ी है। ये भी सही है कि स्‍थानीय तौर पर कई मुद्दे ऐसे हैं, जिनमें ट्रंप पिछड़ गए है। लेकिन अमेरिका की जो चुनाव प्रणाली है उसमें इलेक्‍टोरल कॉलेज ही अहम भूमिका निभाते हैं। उनका कहना है कि ट्रंप पारंपरिक नेता नहीं हैं इसलिए वो दूसरे नेताओं की तरह बात नहीं करते हैं। चीन समेत दूसरे अंतरराष्‍ट्रीय मुद्दों को उन्होंने जो उठाया है उसको अमेरिकी भी गलत नहीं मानते हैं। वहीं, डेमोक्रेट प्रत्‍याशी जो बिडेन भी इन मुद्दों पर ट्रंप का विरोध करते नजर नहीं आते हैं।


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