भोपाल, राज्‍य ब्‍यूरो। नई दिल्ली से रानी कमलापति स्टेशन के बीच चलने वाली शताब्दी में दो यात्रियों ने चाय पी। एक चाय की कीमत 20 रुपये थी, लेकिन प्रति यात्री 70-70 रुपये चुकाने पड़े। जब यात्रियों ने बिल मांगा तो पता चला कि चाय तो तय कीमत पर ही दी गई, लेकिन उसे परोसने का शुल्क 50-50 रुपये ले लिया गया। इस कारण एक यात्री दीपक कुमार झा नाराज हो गए। उन्होंने चलती ट्रेन में चाय परोसने वाले कर्मचारी को तलब किया और खरी-खोटी सुनाई। फिर क्या था, ट्रेन में खानपान व्यवस्था देने वाली ठेका एजेंसी के प्रबंधक आ गए और बहस होने लगी।

प्रबंधक ने यात्री को नियमों का पाठ पढ़ा डाला। यात्री ने पूरे मामले की शिकायत रेल मंत्रालय और खानपान सुविधा देने वाले इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन (आइआरसीटीसी) को कर दी। इसके बाद से ट्रेन में 20 रुपये की चाय पर 50 रुपये के सेवा शुल्क को लेकर इंटरनेट मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। घटनाक्रम 28 जून को नई दिल्ली से ग्वालियर के बीच का है।

जून 2018 से लिए जा रहे 50 रुपये

शताब्दी जैसी प्रीमियम श्रेणी की ट्रेनों में टिकट लेते समय पूछा जाता है कि ट्रेन में खानपान सेवा चाहिए या नहीं। यदि यात्री सहमति देते हैं तो उन्हें चाय, नाश्ता व भोजन का सिर्फ सामग्री के शुल्क के साथ किराया चुकाना पड़ता है। जो यात्री टिकट लेते समय खानपान सुविधा से मना कर देते हैं और ट्रेन के अंदर सफर करते समय चाय, नाश्ता या भोजन मंगवाते हैं, उन्हें कीमत के साथ खानपान सेवा शुल्क 50 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। यह नियम 27 जून 2018 से लागू है।

आइआरसीटीसी का तर्क

दिल्ली स्थित आइआरसीटीसी के कार्यालय में पदस्थ एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नियमानुकूल ही सेवा शुल्क लिया जाता है। इसका प्रविधान रेलवे बोर्ड ने रेल खानपान नीति में किया है। हालांकि, उक्त अधिकारी भी 20 रुपये की चाय पर 50 रुपये सेवा शुल्क लेने को तर्क संगत नहीं मानते हैं।

रेलवे शुल्क लेने के लिए स्वतंत्र है

चार्टर्ड अकाउंटेंट रोहित पाटीदार का कहना है कि रेलवे ने नीति में सेवा शुल्क तय किया है तो वेंडर उसे यात्रियों से ले सकता है। हालांकि, होटल उद्योग के लिए सेवा शुल्क वैकल्पिक है, जिसे इच्छुक उपभोक्ता से ही लिया जा सकता है। यहां सेवा शुल्क लेने के मामले में रेलवे स्वतंत्र है।

Edited By: Arun Kumar Singh