नई दिल्ली, प्रेट्र। भारतीय रेलवे नेटवर्क के रखरखाव कार्यो के कारण पिछले साल 3,000 से ज्यादा ट्रेनें रद हुईं। वर्ष 2014 के बाद पिछले ही साल सबसे ज्यादा ट्रेनें रद की गईं। रेलवे ने एक आरटीआइ के जवाब में यह जानकारी दी।

आरटीआइ के जवाब में रेलवे ने बताया कि वर्ष 2014 में रखरखाव कार्यो के कारण 101 ट्रेनें रद हुईं, जबकि वर्ष 2017 में इनकी संख्या 829 हो गई। वर्ष 2018 में 2,867 ट्रेनों को रद करना पड़ा तो वर्ष 2019 में कुल 3,146 ट्रेनें रद हुईं। मध्यप्रदेश निवासी चंद्रशेखर गौर ने सूचना का अधिकार (आरटीआइ) कानून के तहत रेलवे से ट्रेनों के रद किए जाने से संबंधित जानकारियां मांगी थीं।

अधिकारियों ने बताया कि गत वर्ष रेलवे के 58 सुपर क्रिटिकल प्रोजेक्ट्स में सात को पूरा किया गया। इनमें से एक परियोजना वर्ष 2018 में ही पूरी हो चुकी है। बाकी 50 परियोजनाओं को मार्च 2022 तक पूरा किया जाना है।

एक अधिकारी ने बताया, 'बड़े पैमाने पर जारी सुधारात्मक कार्यो के कारण बड़ी संख्या में ट्रेनों को रद करना पड़ा। इसके कारण यात्रियों को परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है, लेकिन यह बेहद जरूरी और लंबे समय से लंबित काम है।' अधिकारियों ने बताया कि रेलवे ने अपने नेटवर्क के विद्युतीकरण का कार्य वर्ष 2023 तक व मार्गो के दोहरीकरण का काम वर्ष 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

उल्लेखनीय है कि रेलवे के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया जारी है। सरकार ने वर्ष 2020-21 में नई पटरियां बिछाने के लिए 12,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जबकि पिछले वर्ष यह राशि 7,881 करोड़ रुपये थी। ट्रैकों के नवीकरण पर चालू वर्ष में 8,461 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिसे आगामी वर्ष के लिए बढ़ाकर 10,599 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

पटरियों का रखरखाव नहीं होने से होते हैं हादसे

रेलवे का कहना है कि पटरियों के रखरखाव का काम ठीक से न होने और मरम्मत कार्यो के लंबित होने की वजह से ज्यादातर ट्रेन हादसे होते हैं। पिछले पांच वर्षो में 50 फीसद दुर्घटनाएं ट्रेनों के पटरी से उतरने के कारण हुईं।

Posted By: Nitin Arora

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