ट्रेन से कैसे भेजते हैं टू-व्हीलर, कितना लगता है किराया? रेलवे का पार्सल बुकिंग नियम जानिए
भारतीय रेलवे की पार्सल सेवा भारी सामान, जैसे बाइक या साइकिल, को एक शहर से दूसरे शहर भेजने का एक सस्ता और भरोसेमंद विकल्प है।

रेलवे पार्सल सेवा से बाइक भेजने की पूरी प्रक्रिया (यह तस्वीर AI से बनाई गई है)

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लंबी दूरी की यात्रा के लिए ट्रेन हमेशा से ही सस्ता और आरामदायक आप्शन रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ट्रेन सिर्फ यात्रियों को ही नहीं, बल्कि सामान को भी एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाती है?
कई बार जब हम शहर बदलते हैं, तो सबसे बड़ा टास्क यही होता है कि भारी-भरकम सामान (जैसे- बाइक, साईकिल) को कैसे भेजा जाए? ऐसे में भारतीय रेलवे की पार्सल सेवा एक सस्ता और भरोसेमंद समाधान साबित होती है।
ट्रेन से पार्सल भेजने में कितना किराया लगता है, कितनी दूर तक सामान भेजा जा सकता है और क्या-क्या नियम हैं? आज हम आपको इन सबके बारे में विस्तार से बताएंगे।
पार्सल बुकिंग कैसे करें?
ट्रेन से अपनी बाइक/साईकिल या कोई अन्य वाहन भेजने के लिए सबसे पहले उस रेलवे स्टेशन जाना होगा जहां पार्सल बुकिंग सुविधा उपलब्ध हो।
पार्सल ऑफिस से फॉर्म लें और मालिक का नाम, डेस्टिनेशन स्टेशन, मोबाइल नंबर और बाइक की डिटेल भरें।
इसके बाद रेलवे स्टाफ बाइक की जांच और वजन करता है। दूरी और वजन के आधार पर शुल्क तय होता है।
पेमेंट के बाद रसीद दी जाति है जिसे डिलीवरी तक संभल के रखना सबसे जरुरी है।
कौन-कौन से लगेंगे डॉक्युमेंट?
आधार कार्ड, बाइक की आरसी, वैध इंश्योरेंस और एक्टिव मोबाइल नंबर जरूरी हैं। अगर बाइक किसी अन्य के नाम पर है तो सिर्फ फोटोकॉपी काफी नहीं है। कई बार ओरिजिनल डॉक्युमेंट की मांग की जाती है।
भेजने से पहले की तैयारी
रेलवे नियमों के अनुसार बाइक/साइकिल या अन्य किसी वहां को पार्सल करने से पहले पेट्रोल टंकी लगभग खाली की जाति है। साइड मिरर निकाल लेना बेहतर होता है। हैंडल और बॉडी को सुरक्षित कवर करके पैकिंग करवाएं।
यह काम खुद या स्टेशन वेंडर से हो सकता है। पैकिंग का खर्च आमतौर पर 300 से 600 रुपये तक आता है, जो बाइक के आकार और क्वालिटी पर निर्भर करता है।
किराया कितना लगेगा?
चार्ज दूरी और वजन पर निर्भर है। जैसे 800 किलोमीटर तक कुल खर्च लगभग तीन हजार रुपये तक पहुंच सकता है। इसमें पार्सल, पैकिंग और अन्य शुल्क शामिल हो सकते हैं।
ट्रेन के प्रकार (एक्सप्रेस या अन्य) से भी किराया बदलता है। ध्यान रहे कि बाइक हमेशा उसी ट्रेन से नहीं भेजी जाती जिसमें आप यात्रा कर रहे हों।
बाइक की डिलीवरी कैसे लें?
रसीद दिखाकर समय पर क्लेम करें। छह दिन से अधिक स्टेशन पर रहने पर अतिरिक्त शुल्क लग सकता है। मूल रसीद अनिवार्य है। इसे पोस्ट करवाएं या स्वयं ले जाएं।
इंश्योरेंस क्यों जरूरी?
वैध फर्स्ट पार्टी इंश्योरेंस होने से नुकसान या विवाद की स्थिति में मदद मिलती है। इसे पहले से सुनिश्चित कर लें। इन नियमों का पालन करके बाइक सुरक्षित और सुगमता से भेजी जा सकती है।
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