वण शर्मा, ग्वालियर। शायद बहुत कम लोग जानते हैं कि तिरंगे की भी टेस्टिंग होती है और इस काम को अंजाम देने वाली लैब ग्वालियर में है। दरअसल ग्वालियर देश का ऐसा शहर है जो तिरंगा बनाने के लिए केंद्र सरकार से अधिकृत है। इसके साथ केवल मुंबई और कर्नाटक के हुबली को ही यह गौरव हासिल है। यहां तिरंगों का मानकों पर परीक्षण और प्रमाणन होता है। फिर इन्हें बाजार में भेजा जाता है।

ग्वालियर स्थित 90 साल से ज्यादा पुराना मध्यभारत खादी संघ मध्य प्रदेश की इकलौती और देश की तीसरी संस्था है, जो तिरंगा बनाने के लिए केंद्र सरकार से अधिकृत है। मुंबई और हुबली के बाद केंद्र सरकार ने 2016 में संस्था को तिरंगा बनाने के लिए अधिकृत किया है। संस्था के जीवाजीगंज स्थिति उत्पादन केंद्र में ही तिरंगे की टेस्टिंग लैब भी है जो झंडे की गुणवत्ता सभी मानकों पर जांचती है। यहां तीन आकार में तिरंगे तैयार किए जाते हैं जो भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से प्रमाणित भी किए जाते हैं।

मध्यभारत खादी संघ के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा और सचिव रमाकांत शर्मा ने बताया कि मध्य भारत खादी संघ अब तक 50 हजार तिरंगे तैयार कर चुका है, जो देशभर में भेजे गए हैं। इसमें मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, हरियाणा सहित अन्य राज्य भी शामिल हैं।

कोरिया से आती है रस्सी

संस्था अध्यक्ष ने बताया कि तिरंगे में उपयोग की जाने वाली रस्सी कोरिया से मंगवाई जाती है। यह विशेष तरह की मजबूत रस्सी है जो तिरंगा तैयार किए जाने वाले मानकों में शामिल है। यहां तैयार होने वाले खादी के तिरंगे में बैच नंबर भी होता है। बैच नंबर के साथ मध्यभारत खादी संघ की सील भी लगती है। इससे यह पता चल जाता है कि यह तिरंगा ग्वालियर से तैयार हुआ है।

इन आकार में तैयार होते हैं तिरंगे

आकार बीआइएस मार्क नॉन बीआइएस मार्क चार गुणा छह फीट 1750 पये 1500 पये तीन गुणा साढ़े चार फीट 1450 पये 1250 पये दो गुणा तीन फीट 675 पये 600 पये

कार फ्लैग

260 पये

टेबल फ्लैग

160 पये

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