सरकार ने बचाए लोगों के 6500 करोड़ रुपये, लाखों फर्जी मोबाइल नंबर किए बंद
भारत सरकार ने डिजिटल सुरक्षा प्रयासों से नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी से 6,500 करोड़ रुपये का नुकसान होने से बचाया है।
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साइबर धोखाधड़ी से बचाए 6,500 करोड़ रुपये (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
साइबर धोखाधड़ी से नागरिकों के 6,500 करोड़ रुपये बचाए गए।
प्रतिदिन स्पैम कॉल्स में 99 प्रतिशत तक की कमी आई।
संचार साथी पहल से लाखों फर्जी मोबाइल नंबर बंद किए गए।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत सरकार के डिजिटल सुरक्षा प्रयासों के तहत नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी से बचाकर लगभग 6,500 करोड़ रुपये का नुकसान होने से रोका गया है।
सरकार द्वारा उठाए गए सख्त कदमों के कारण देश में प्रतिदिन आने वाली स्पैम कॉल्स में 99 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई है। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 3.5 करोड़ स्पैम कॉल आती थीं, वहीं सरकार के एंटी-फ्रॉड सिस्टम और दूरसंचार सुरक्षा उपायों के चलते इनमें उल्लेखनीय कमी आई है।
सरकार ने स्पैम कॉल्स पर लगाई लगाम
सरकार ने दूरसंचार विभाग की संचार साथी पहल के तहत अब तक करीब 55 से 56 लाख मोबाइल नंबरों को बंद किया है। इस पहल का उद्देश्य फर्जी कॉल, साइबर धोखाधड़ी और दूरसंचार सेवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाना है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन सुविधा भी लागू की गई है। इसके तहत 4जी और उससे ऊपर के नेटवर्क का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को इनकमिंग कॉल के दौरान कॉल करने वाले का नाम दिखाई देगा। इससे मोबाइल उपभोक्ताओं को अनजान और संदिग्ध कॉल की पहचान करने में मदद मिलेगी।
डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (डीआइपी) को भी मजबूत किया गया है। इस प्लेटफॉर्म से अब लगभग 1,600 से 1,800 हितधारक जुड़ चुके हैं।
इनमें बैंक, वित्तीय संस्थान, दूरसंचार कंपनियां और कानून प्रवर्तन एजेंसियां शामिल हैं। इसका उद्देश्य विभिन्न संस्थाओं के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाकर साइबर अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई करना है।
वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए FRI की अहम भूमिका
वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (एफआरआइ) भी अहम भूमिका निभा रहा है। आरबीआइ ने सभी वित्तीय संस्थानों के लिए इस व्यवस्था को अनिवार्य किया है। इसके माध्यम से करोड़ों बैंक खातों को चिह्नित किया गया है, जिससे संदिग्ध लेनदेन को समय रहते रोकने में मदद मिली है।
इस बीच, संचार साथी पोर्टल को लगभग 35 करोड़ बार देखा जा चुका है, जबकि इसके मोबाइल एप को करीब 3.5 से चार करोड़ बार डाउनलोड किया गया है।
एक अधिकारी ने कहा कि दूरसंचार उपभोक्ताओं की सुरक्षा और साइबर सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और इस मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
(समाचार एजेंसी एएनआइ के इनपुट के साथ)
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