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Kisan Budget 2026: कैसे बढ़ेगी किसानों की आय? ऋण योजनाओं से पशु पालन तक के लिए बना मास्टर प्लान

By Dr. Binod AnandEdited By: Garima Singh
Published: Sun, 01 Feb 2026 08:09 PM (IST)

बजट 2026-27 भारतीय कृषि को सहकारिता की शक्ति से मजबूत करने पर केंद्रित है। यह व्यक्तिगत प्रयासों के बजाय सामूहिक ...और पढ़ें

बजट 2026-27 कृषि में सहकारिता को मजबूत करेगा।

बजट 2026-27 कृषि में सहकारिता को मजबूत करेगा।

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डॉ. बिनोद आनंद, नई दिल्ली। भारत का किसान केवल अकेला मेहनतकश नहीं है, बल्कि वह सहकारिता की परंपरा से जुड़ा हुआ है।

दूध समितियों से लेकर बीज और विपणन तक किसान ने जब-जब संगठित होकर काम किया है, तब-तब उसने बाजार की ताकत को चुनौती दी है। बजट 2026-27 इसी भरोसे को और मजबूत करता है।

यह संकेत देता है कि भारत की कृषि अब व्यक्ति नहीं, समूह की ताकत से आगे बढ़ेगी 'भारत-विस्तार' जैसी पहल केवल किसान को जानकारी नहीं देगी, बल्कि सहकारी संस्थाओं को ज्ञान और डाटा की ताकत देगी।

बजट 2026-27 कृषि में सहकारिता को मजबूत करेगा

जब एक ही इलाके के किसान, एफपीओ, सहकारी समिति और स्वयं सहायता समूह एक साझा डिजिटल मंच पर जुड़ेंगे, तो निर्णय व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक होंगे। इससे लागत घटेगी, उत्पादन सुधरेगा और सौदेबाजी की ताकत बढ़ेगी।

सस्ती कृषि ऋण व्यवस्था और ब्याज सहायता योजनाएं अब केवल व्यक्तिगत किसानों तक सीमित नहीं रहेंगी। इनके माध्यम से पीएसीएस, दुग्ध समितियां और सहकारी एफपीओ पूंजी जुटाकर भंडारण, कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग और परिवहन में निवेश कर सकेंगे।

'भारत-विस्तार' पहल से किसानों को ज्ञान मिलेगा

यह बदलाव खेती को कच्चे माल की आपूर्ति से आगे बढ़ाकर मूल्य श्रृंखला का मालिक बनाएगा। पशुपालन में प्रस्तावित पशु चिकित्सा ढांचे का विस्तार भी सहकारिता को नई ऊर्जा देगा। दुग्ध सहकारी समितियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, डायग्नोस्टिक सुविधाएं और प्रजनन केंद्र मिलेंगे।

इससे दूध उत्पादन बढ़ेगा, गुणवत्ता सुधरेगी और 'अमूल' जैसे ग्रामीण सहकारी माडल को देश के और हिस्सों में दोहराया जा सकेगा।

उच्च मूल्य वाली फसलों नारियल, काजू, कोको, चंदन और अखरोट-बादाम के लिए प्रस्तावित विशेष कार्यक्रम 'सहकारी वस्तु क्षेत्र' (कोआपरेटिव कमोडिटी जोन्स) की नींव रख सकते हैं।

सहकारी संस्थाएं बाजार में सीधी पहुंच बनाएंगी

'शी-मार्ट' जैसी पहल सहकारिता को सामाजिक ताकत भी देगी। महिला स्वयं सहायता समूह जब सामूहिक रूप से रिटेल और विपणन संभालेंगे, तो गांवों में पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा और स्थानीय बाजार मजबूत होंगे।

भारत-विस्तार से ज्ञान मिलेगा, ऋण योजनाओं से पूंजी आएगी, पशुपालन और उच्च मूल्य फसलों से निरंतर आय बनेगी और सहकारी संस्थाएं बाजार तक सीधी पहुंच बनाएंगी।

बजट 2026-27 यह साफ करता है कि भारत का कृषि भविष्य सहकार, तकनीक और आत्मनिर्भरता के त्रिकोण पर खड़ा होगा।

जब किसान संगठित, ज्ञान से लैस होगा और बाजार में अपनी शर्तों पर उतरेगा तब 'सहकारी वस्तु क्षेत्र' कोई दूर का सपना नहीं, बल्कि गांव-गांव की हकीकत बनेंगे।