नई दिल्ली, एएनआइ। रूस ने दस सितंबर को मास्को में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक का प्रस्ताव रखा है। इस बैठक में पाकिस्तान और चीन की भागीदारी भी देखी जा सकेगी। राजनयिक सूत्रों के अनुसार उसी दिन, रूस ने ब्रिक्स विदेश मंत्री की बैठक की मेजबानी करने की भी पेशकश की है। 

समाचार एजेंसी एएनआइ ने सूत्रों के अनुसार बताया कि यह बैठक कोरोना काल के पूर्व ही निर्धारित की गई थी और भारत वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद ही अपनी भागीदारी की पुष्टि कर सकता है, क्योकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि भारत मॉस्कों में निर्धारित बैठक में भाग लेगा। 

यदि भारत ने भाग लेने का फैसला किया, तो यह पहली बार होगा जब भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर संघर्ष के बाद से भारत, पाकिस्तान और चीन के विदेश मंत्री एक ही समूह में आमने-सामने आएंगे। एलएसी पर तनाव जारी है क्योंकि सीमा पर अभी भी पूरी तरह से विघटन नहीं हुआ है, इस क्षेत्र में 40000 भारतीय सैनिकों को कथित तौर पर तैनात किया गया है और भारत और चीन दोनों ही स्थिति को हल करने के लिए सैन्य और कूटनीतिक वार्ता के दौर में हैं।

एससीओ होगा एक बड़ा राजनीतिक एजेंडा

गलवन घाटी में चीन के साथ हुए खूनी संघर्ष के बाद से भारत और चीन के बीच एलएसी पर तनाव चरम पर है। भारत ने जून में रूस द्वारा बुलाए गए आरआईसी की बैठक में हिस्सा लिया था, हालांकि उस बैठक को कोरोना संक्रमण के विषय तक सीमित कर दिया गया था। वहीं, अब SCO एक बड़ा राजनीतिक एजेंडा होगा। इसलिए यह देखा जाना बाकी है कि भारत अपनी उपस्थिति की पुष्टि करता है या नहीं।

गौरतलब है कि भारत, पाकिस्तान के साथ किसी भी वार्ता का विरोधी बना हुआ है और उसने कहा है कि वार्ता और आतंक एक साथ नहीं चल सकते हैं, इसलिए भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी बातचीत की बहुत कम संभावना है। भले ही इस बैठक में भारत भाग ले।

Posted By: Dhyanendra Singh

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