नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। ईरान से तेल का आयात भारत और अमेरिका के रिश्तों में फिसलन का सबब बन रहा है। तेल आयात रुकवाने के लिए अमेरिका एड़ी-चोटी का जोर लगाए है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सोमवार शाम यहां हुई मुलाकात में अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के एजेंडे में ईरान की आर्थिक रसद काटने का मुद्दा अहम था। संतुलन साधने में लगे भारत ने हालांकि अपनी ऊर्जा सुरक्षा की दुहाई देते हुए स्पष्ट कर दिया कि उसके लिए ईरान से एक झटके में तेल आयात रोकना मुमकिन नहीं होगा।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने ईरान पर नकेल के लिए मदद का आग्रह दोहराते हुए कहा कि ईरान को बातचीत की मेज पर लाना संभव नहीं होगा। लिहाजा भारत को इसमें सहयोग करना चाहिए और अपना तेल आयात घटाना चाहिए। भारत की ओर से तेल जरूरतों की दलील पर अमेरिका बाजार में सऊदी अरब और इराक से निकल रहे तेल की उपलब्धता के तर्क दे रहा है। सूत्रों के अनुसार भारतीय पक्ष ने दो साल में ईरान से तेल आयात में कमी के आंकड़े गिनाते हुए स्पष्ट किया कि आयात निर्भरता घटाने के लिए उसे वक्त भी चाहिए और सुविधाएं भी।

भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के साथ रिश्तों पर वह अपनी मर्जी से चलेगा। हिलेरी के समानांतर दिल्ली में मौजूद ईरानी उद्योग प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात में भारतीय खेमे ने व्यापारिक संबंध मजबूत करने का नया फार्मूला भी तैयार किया। तेहरान चैंबर आफ कॉमर्स के 60 उद्योगपतियों से मुलाकात में वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर ने अंतरराट्रीय प्रतिबंध के दायरे से बाहर मौजूद उत्पादों के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने का संकल्प जताया।

गौरतलब है कि भारत, ईरान में बाजार देख रहा है। ईरान के साथ संबंधों की जरूरत समझाने के लिए उसके पास अफगानिस्तान सेना को मदद का तर्क भी है। भारत ने बीते सप्ताह ही ईरान के रास्ते 50 से ज्यादा ट्रक अफगानिस्तान सेना को मुहैया कराए हैं। उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान तक मदद पहुंचाने के लिए पाकिस्तान, भारत को रास्ता नहीं मुहैया कराता।

पाकिस्तान में छिपा है जवाहिरी

कोलकाता [जागरण ब्यूरो]। अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने आतंकी संगठन अलकायदा के नए सरगना अल जवाहिरी के पाकिस्तान में छिपे होने का दावा किया है। हिलेरी ने यहां एक परिचर्चा में कहा, 'हमें यकीन है कि जवाहिरी पाकिस्तान में ही है। आतंकी संगठनों के कई नेता भागते फिर रहे हैं और कुछ पाकिस्तान में छिपे हैं। उन्हें पकड़ने में थोड़ा वक्त लग सकता है, लेकिन हम आपके [भारत] साथ खड़े रहेंगे और इसे हकीकत में बदलकर दिखाएंगे।'

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान के लचर रुख पर नाराजगी जताते हुए हिलेरी ने कहा, 'मुंबई आतंकी हमले के दोषियों को सजा देने में विलंब हो रहा है। हमले के मुख्य आरोपी हाफिज सईद को सजा दिलवाने के लिए पाकिस्तान ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।'

तीस्ता पर गतिरोध बरकरार, सीमा समझौते में भी इंतजार

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। भारत-बांग्लादेश के बीच सोमवार को हुई संयुक्त सलाहकार आयोग की पहली बैठक में न तो तीस्ता जल बंटवारे पर बात आगे बढ़ पाई और न ही सीमा समझौते को लागू करने की तारीखों पर कोई फैसला हो सका। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की अगुआई में हुई बैठक के दौरान घरेलू राजनीति का दबाव ही भारी नजर आया। बांग्लादेशी खेमा जहां तीस्ता और सीमा मामले पर आगे बढ़ने पर जोर देता दिखा। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी के विरोध के कारण उलझन में फंसा भारतीय खेमा केवल जल्द आगे बढ़ने का आश्वासन ही दोहरा सका। हालांकि ढाका को दिलासा देने के लिए भारत ने सहयोग के कुछ नए समझौतों पर जरूर रजामंदी दी है।

भारत दौरे पर आई बांग्लादेश की विदेशमंत्री डॉ. दीपू मोनी के साथ मुलाकात के बाद मीडिया से रूबरू विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा कि हम तीस्ता समझौते को जल्द पूरा करने पर वचनबद्ध हैं। लेकिन पानी संवेदनशील मुद्दा है और भारत की लोकतांत्रिक की परंपरा के अनुरूप हम सभी संबंधित पक्षों से बात कर रहे हैं। 'हम राजनीतिक सहमति की कोशिश कर रहे हैं। यह जरूरी है कि जो लोग तीस्ता के पानी पर निर्भर हैं उनकी चिंताओं को ध्यान में रखा जाए और बोझ का समान वितरण हो।

इस दौरान मोनी ने तीस्ता जल संधि को जल्द पूरा करने का आग्रह किया। फरवरी, 2012 में कोलकाता में हुई तकनीकी समिति की बैठक में पहली बार दोनों के बीच देशों ने भारत में गोजालदोबा और बांग्लादेश में दालिया के बीच तीस्ता के प्रवाह से जुड़े आंकड़ों को अदला-बदली की है।

आयोग की बैठक में सितंबर 2011 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुए सीमा समझौते के क्रियान्वयन पर भी बात हुई। कृष्णा के अनुसार सीमांकन संबंधी नक्शे दोनों ओर से प्रतिनिधियों के दस्तखत के लिए लगभग तैयार हैं। लेकिन इसका कुछ काम बाकी है जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा। बांग्लादेशी खेमे के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार भारत की ओर से उन्हें भरोसा दिया गया है कि सीमा समझौते को अनुमोदन के लिए जल्द संसद में पेश किया जाएगा।

इन मुद्दों पर बनी रजामंदी:-

-ग्रिड संपर्क पर काम जारी, अगले साल गर्मियों तक 500 मेगावाट बिजली बांग्लादेश से लेगा भारत

-संयुक्त उपक्रम में 1320 मेगावाट कोयला आधारित ताप विद्युत केंद्र 2016 तक काम करना शुरू करेगा

-ढाका को अगले साल के अंत तक रेलवे रोलिंग स्टॉक [इंजन वैगन बोगी] की आपूर्ति शुरू हो जाएगी

-मेघालय के बाद त्रिपुरा और मिजोरम में भी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बॉर्डर हट खोले जाएंगे

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