बेंगलुरू, प्रेट्र। जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ डा सीएन मंजूनाथ ने चेतावनी दी है कि भारत दुनिया में 2030 तक सबसे ज्यादा हृदयघात से होने वाली मौतों को दर्ज करने के लिए जाना जाएगा। जयदेव इंस्टीट्यूट आफ कार्डियोवास्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च के निदेशक ने 'हेल्दी मेडिकॉन 2022' विषय पर एचएएल के डाक्टरों के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने इस खतरे का मुकाबला करने के लिए एक समग्र एकीकृत दृष्टिकोण का आह्वान किया, जिसमें तनाव का प्रबंधन भी शामिल है। इसके लिए स्वस्थ जीवन शैली की आदतों को विकसित करना शामिल है।

उन्होंने कहा कि युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोगों में हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं और यह चिंताजनक है। कंपनी ने एक विज्ञप्ति में कहा कि दो दिवसीय सम्मेलन (21-22 मई) ने एचएएल डॉक्टरों को फिर से समूह बनाने, विचारों का आदान-प्रदान करने और गहन शोध से अवगत कराने में सक्षम बनाया, जिसका उद्घाटन एचएएल के सीएमडी आर माधवन ने किया।

खतरनाक वायु प्रदूषण से भी पड़ सकता है दिल का दौरा

देश के कर्इ शहरों में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल सर्कुलेशन में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, वायु प्रदूषण की चपेट में आकर एक घंटे के भीतर इंसान को दिल का दौरा पड़ सकता है। आपको बता दें कि चार आम वायु प्रदूषक, जैसे- सूक्ष्म कण पदार्थ, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड की मौजूदगी एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम (एसीएस) को जल्दी से ट्रिगर कर सकते हैं। अध्ययन के मुताबिक, हवा में मौजूद प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह सड़कों पर चल रहे वाहन, बिजली के उपकरण और निर्माण स्थलों से उठ रही धूल है। रिसर्च में यह भी बताया गया है कि वायु प्रदूषण की वजह से दुनियाभर में 42 लाख लोगों की मौत हो चुकी है।

कार्डियक अरेस्ट से महिलाओं की जान को पुरुषों की तुलना में अधिक खतरा

पुरुषों की तुलना में महिलाओं को रात के समय कार्डियक अरेस्ट का खतरा अधिक रहता है। इस बात की पुष्टि journal Heart Rhythm में छपी एक शोध से होती है। इस शोध से पता चला है कि रात में सोते वक्त कार्डियक अरेस्ट की वजह से महिलाओं की मौत होने की संभावना अधिक है।

हाल में European Heart Journal में छपी एक शोध में दावा किया गया था कि Covid-19 संक्रमित मरीजों में महिलाओं को दिल का दौरा पड़ने से अधिक मौत हुई है। वहीं, journal Heart Rhythm में छपी शोध से अन्य दावों को बल मिला है। इस शोध में बताया गया कि रात के समय कुल मरीजों में 20.6 फीसदी पुरुषों की तुलना में 25.4 फीसदी महिलाओं को कार्डियक अरेस्ट का सामना करना पड़ता है।

मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि मरीज देर रात आराम मुद्रा में रहते हैं। इस दौरान मेटाबॉलिज्म, हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। रात के समय अचानक कार्डियक अरेस्ट आने से मरीज की मौत भी हो जाती है।

Edited By: Arun Kumar Singh