टैरिफ पर तनाव के बाद भी क्यों साथ हैं भारत-अमेरिका? लोकतांत्रिक देशों की अहम बैठक, अश्विनी वैष्णव भी हुए शामिल
भारत और अमेरिका आयात शुल्क तनाव के बावजूद महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग कर रहे हैं। अमेरिका ने भारत को 'पैक्स ...और पढ़ें

ब्रिटेन, इटली, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, फ्रांस के वित्त मंत्रियों ने हिस्सा लिया (फाइल फोटो)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आयात शुल्क को लेकर भारत और अमेरिका के बीच भले ही अभी तनाव चल रहा हो लेकिन क्रिटिकल मिनिरल्स के क्षेत्र में वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने पर दोनों देश सहमत हैं। एक दिन पहले नई दिल्ली में अमेरिका के नये राजदूत सर्जियो गोर ने क्रिटिकल मिनरल्स पर नये संगठन 'पैक्स सिलिका' का सदस्य बनने का प्रस्ताव भारत के समक्ष रखा।
इस प्रस्ताव के कुछ ही देर बाद वाशिंगटन में अमेरिका के वित्त मंत्री स्काट बेसेंट की अगुआई में हुई लोकतांत्रिक देशों की एक बैठक में भारत के रेलवे, आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हिस्सा लिया है। इस बैठक को दुनिया में क्रिटिकल मिनरल्स के खानों व प्रसंस्करण पर चीन के बढ़ते दबदबे के खिलाफ लोकतंत्रिक देशों को एकजुट करने के तौर पर माना जा रहा है ताकि सेमीकंडक्टर, सौर ऊर्जा व अन्य प्रौद्योगिकी आधारित मैन्यूफैक्चरिंग के लिए दुर्लभ धातुओं की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

साझा सहयोग पर बनी सहमति
बैठक मे जापान, इजरायल, कनाडा, ब्रिटेन, इटली, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, फ्रांस के वित्त मंत्रियों ने हिस्सा लिया। बैठक में एक महत्वपूर्ण सहमति बनी है कि सभी सहभागी देशों ने एक-दूसरे के साथ शोध और अनुसंधान साझा करने पर सहमति जताई, ताकि क्रिटिकल मिनरल्स की खोज, निष्कर्षण और प्रसंस्करण में सहयोग बढ़ाया जा सके। वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए इस बैठक को जरूरी बताते हुए अमेरिकी सरकार ने कहा है, 'चर्चा के दौरान सभी प्रतिभागियों ने एकमत से इस बात पर जोर दिया कि महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखलाओं में प्रमुख कमजोरियों को जल्द से जल्द दूर किया जाना चाहिए।'
सेक्रेटरी बेसेंट ने आशा व्यक्त की है कि देश जोखिम कम करने की नीति अपनाएंगे और वे महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखलाओं में वर्तमान कमियों को ठीक करने की जरूरत को भलीभांति समझते हैं। दुर्लभ खनिज के 60 से 90 प्रतिशत वैश्विक भंडारों पर कब्जा जमाए चीन की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि ये आपूर्ति शृंखलाओं अब काफी हद तक केंद्रित हो चुकी हैं, जिससे व्यवधान पैदा करने या हेरफेर करने की संभावना बढ़ गई है।

दुर्लभ धातुओं को किया गया चिह्नित
भारतीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद कहा है, 'सुरक्षित क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन विकसित भारत के लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। हमने बैठक में विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की, जिसमें शोध साझा करना और नई तकनीकों का विकास शामिल है।' वैष्णव ने आगे जोड़ा कि भारत इन खनिजों की घरेलू खोज को बढ़ावा दे रहा है और वैश्विक साझेदारी से इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करेगा।
अमेरिकी सरकार की तरफ से 60 व और भारत सरकार की तरफ से 35 दुर्लभ धातुओं को चिह्नित किया गया है जिसमें लिथियम, कोबाल्ट, निकल, ग्रेफाइट, रेअर अर्थ एलिमेंटस, सिलिकॉन, कापर, बेरेलियम, जर्मेनियम, बिस्मथ आदि शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की 'ग्लोबल क्रिटिकल मिनरल्स आउटलुक 2025' रिपोर्ट के अनुसार, चीन 20 में से 19 प्रमुख खनिजों के रिफाइनिंग में प्रमुख भूमिका निभाता है, जहां उसकी औसत बाजार हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत है।
विशेष रूप से, दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) के खनन और रिफाइनिंग में चीन का 70 से 90 प्रतिशत नियंत्रण है, जो सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा पैनल आदि के निर्माण में बेहद जरूरी है। बैट्रियों व उर्जा भंडारण के लिए जरूरी लिथियम के रिफाइनिंग में 60 प्रतिशत और सिंथेटिक ग्रेफाइट में 90 प्रतिशत से अधिक का प्रभुत्व चीन का है। आईईए की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2030 तक चीन की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है।
