विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

नाविकों की मौत के बाद भारत-अमेरिका आमने-सामने, रुबियो ने जयशंकर से कहा- 'होर्मुज से गुजरने पर हमारा आदेश मानना होगा'

By Jai Prakash RanjanEdited By: Swaraj Srivastava
Published: Sat, 13 Jun 2026 08:40 PM (GMT+05:30)

भारत और अमेरिका के बीच होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन को लेकर गहरा टकराव सामने आया है, जिसमें ...और पढ़ें

जयशंकर ने खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के हमलों पर भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया है (फोटो: रॉयटर्स)

जयशंकर ने खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के हमलों पर भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया है (फोटो: रॉयटर्स)

HighLights

  1. होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत।

  2. अमेरिका ने नाकेबंदी उल्लंघन पर आदेश मानने को कहा, भारत का कड़ा विरोध।

  3. भारत ने संयुक्त राष्ट्र में उठाया मुद्दा, पीएम मोदी ने अस्वीकार्य बताया।

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन को लेकर भारत और अमेरिका के बीच खुला टकराव सामने आ गया है।

अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत की तरफ से हर स्तर पर कड़ा विरोध दर्ज कराने पर तो अमेरिका ने साफ जवाब दिया है कि, नाकेबंदी का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं होगा, हमारे आदेशों का पालन करना ही होगा।

यह जवाब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से शुक्रवार को फोन पर बातचीत के दौरान दी। जयशंकर ने खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के हमलों पर भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

इसके पहले तीन दिनों में भारतीय विदेश मंत्रालय ने दो बार अमेरिकी दूतावास के शीर्ष अधिकारी को सम्मन कर अपना विरोध प्रकट किया है।

जयशंकर ने एक्स पर लिखा, “आज शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से बात की। मैंने खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के उन हमलों पर भारत का कड़ा विरोध दोहराया जिनमें तीन भारतीय नाविक मारे गए। वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ ऐसी घातक कार्रवाई उचित नहीं है।”

इसके काफी देर बाद अमेरिकी विदेश विभाग के प्रिंसिपल डिप्टी स्पोक्सपर्सन टामी पिगोट का जवाब आया है कि, “अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कल भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात की। दोनों ने होर्मुज स्ट्रेट की हालिया घटनाओं पर चर्चा की। मंत्री ने जोर देकर कहा कि सभी वाणिज्यिक जहाजों को अमेरिकी बलों के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए क्योंकि वे स्ट्रेट (होर्मुज) में शांति और सुरक्षा बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल का अवैध परिवहन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

अमेरिकी बयान एक तरह से भारतीय कूटनीतिक विशेषज्ञों के इस आरोप को सही साबित कर रहा है कि अमेरिका भारत को सबक सिखाने के लिए उसके जहाजों पर जान बूझ कर पिछले कुछ दिनों के दौरान हमला किया है। कुछ वाणिज्यिक जहाज अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और तकरीबन इन सभी में भारतीय नाविकों की संख्या काफी ज्यादा है।

8 जून को एमटी मैरिवेक्स पर हमला, 10 जून को एमटी सेटेबेलो में तीन भारतीय नाविक शहीद, और 11 जून को एमटी जलवीर पर मिसाइल हमला हुआ था। इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई और साथ ही 65 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए ओमान सरकार की मदद लेनी पड़ी है।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में भी इस मुद्दे को उठाया है और पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमले की निंदा की है। पीएम नरेन्द्र मोदी सार्वजनिक तौर पर इसे अस्वीकार्य करार कर चुके हैं।अमेरिकी विदेश विभाग का उक्त बयान शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय जहाजों पर हमलों का आरोप ईरान पर लगाने के आरोप की कलई भी खोल दी है।

ट्रंप ने कहा था कि ईरानी द्रोन भारतीय जहाजों पर हमला कर रहे हैं जो स्वीकार्य नहीं होगा। वैसे अमेरिकी सैन्य कमांड खुद ही भारतीय नाविकों से भरे जहाज पर हमले की बात स्वीकार कर चुका है। बहरहाल, ईरान ने भी ट्रंप के उक्त आरोप को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ईरानी दूतावास ने इसे बेबुनियाद बताया और कहा कि अमेरिका अपनी कार्रवाइयों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है।

यह भी पढ़ें- '3 भारतीय नाविकों की मौत के पीछे अमेरिका...' ट्रंप के दावों पर भड़का ईरान, आरोपों को बताया बेबुनियाद