समुद्र में भारत की बड़ी छलांग, UAE के साथ मिलकर बनाएंगे शिप रिपेयर इकोसिस्टम; डॉलर में होगी कमाई
भारत और यूएई के बीच एक नए जॉइंट वेंचर से कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड कोच्चि में एक अंतरराष्ट्रीय शिप रिपेयर फैसिलिटी चलाएगा।

भारत-यूएई का जॉइंट वेंचर कोच्चि में शिप रिपेयर फैसिलिटी चलाएगा

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) और दुबई की कंपनी 'ड्रायडॉक्स वर्ल्ड' के बीच एक नए जॉइंट वेंचर से भारत और UAE के बीच समुद्री सहयोग और मजबूत होने जा रहा है। 50:50 की पार्टनरशिप वाले इस वेंचर का उद्देश्य कोच्चि में 'इंटरनेशनल शिप रिपेयर फैसिलिटी' को चलाना और उसका आगे बढ़ाना है।
इस ज्वाइंट वेंचर का लक्ष्य भारत और पूरे हिंद महासागर क्षेत्रके लिए जहाजों की मरम्मत का एक बड़ा केंद्र बनाना है। शुरुआती स्टेप्स में,80 से ज्यादा जहाजों की मरम्मत होने की उम्मीद है बाद में इसके वर्कस्टेशन की संख्या 6 से बढ़ाकर 16 की जाएगी।
जहाजों के रिपेयर का हब बनेगा भारत
इससे कमर्शियल जहाजों, टैंकरों, कंटेनर कैरियर, ऑफशोर सपोर्ट वेसल और खास समुद्री प्लेटफॉर्म जैसे कई तरह के जहाजों की मरम्मत करने की क्षमता मिलेगी। इसका मकसद उन अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सुविधा देना है जो अभी मरम्मत और रखरखाव के लिए दुबई और सिंगापुर जाते हैं। ऐसे में इस कारोबार का कुछ हिस्सा भारत लाने का लक्ष्य है।
यह वेंचर भारत के जहाज निर्माण और मरम्मत इकोसिस्टम के लिए अहम है। जहाज की मरम्मत का असर स्टील, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स और इलेक्ट्रिकल सिस्टम जैसे कई संबंधित क्षेत्रों पर भी पड़ता है, साथ ही इससे रोजगार और विदेशी मुद्रा की कमाई भी होती है।
यह पार्टनरशिप एक बहुत बड़े राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा है। भारत के जहाज निर्माण रोडमैप के तहत, सरकार ने पिछले साल सितंबर में 69,725 करोड़ रुपये की जहाज निर्माण और समुद्री सुधार योजनाएं शुरू की थीं, जो चार मुख्य स्तंभों पर आधारित हैं।
भारत को कितना फायदा?
24,736 करोड़ रुपये की 'शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम' भारतीय शिपयार्ड को सीधे आर्थिक मदद और शिप-ब्रेकिंग क्रेडिट नोट देती है। 25,000 करोड़ रुपये का 'मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड' शिपिंग क्षमता और शिपयार्ड इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए निवेश और ब्याज पर प्रोत्साहन देने पर ध्यान केंद्रित करता है।
19,989 करोड़ रुपये की 'शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम' ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर के लिए पूंजीगत सहायता और जोखिम कवरेज प्रदान करती है। चौथा स्तंभ कानूनी और नीतिगत सुधारों से संबंधित है, जिसमें बड़े जहाजों को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा देना शामिल है ताकि सस्ता और दीर्घकालिक वित्तपोषण मिल सके।
CSL ने बनाया था INS विक्रांत
CSL देश का सबसे बड़ा ड्राई डॉक भी चलाता है और यही वह शिपयार्ड है जहां INS विक्रांत बनाया गया था। विक्रांत भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित विमान वाहक पोत है।
इस शिपयार्ड ने नौसेना के लिए कई अन्य जहाज भी बनाए हैं और वर्तमान में इसके लिए छह 'नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल्स' (NGMV) बना रहा है। इन सुविधाओं के जुड़ने से भारत की रणनीतिक जहाज निर्माण क्षमता मजबूत होती है।
नौसेना की योजना 2035 तक 200 जहाज संचालित करने की है, और इस क्षेत्र में बढ़ी हुई क्षमता घरेलू उद्योग को उस लक्ष्य की दिशा में काम करने में मदद करेगी।
क्या है 'मैरीटाइम इंडिया विजन 2030'?
'मैरीटाइम इंडिया विजन 2030' और 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' के तहत सरकार का व्यापक लक्ष्य भारत को 2030 तक दुनिया के शीर्ष 10 जहाज निर्माण करने वाले देशों में और 2047 तक शीर्ष पांच देशों में शामिल करना है।
'ड्राईडॉक्स वर्ल्ड' भारत में अन्य जगहों पर भी सुविधाएं विकसित कर रहा है, जबकि सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर पांच प्रमुख जहाज निर्माण क्लस्टर को मंजूरी दी है।
कोचीन शिपयार्ड और मझगांव डॉक ने अलग-अलग तमिलनाडु की एजेंसियों के साथ 15,000 करोड़ रुपये के जहाज निर्माण परिसर के लिए समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसकी वार्षिक क्षमता दस लाख टन होगी।
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