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बांग्लादेश डिपोर्ट किए गये सोनाली खातून के परिवार की होगी वतन वापसी, सुप्रीम कोर्ट में बोली केंद्र सरकार

Published: Fri, 22 May 2026 04:09 PM (IST)

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह उन लोगों को भारत वापस लाएगी जिन्हें पहले बांग्लादेश भेज दिया गया था, जिसमें सोनाली खातून का परिवार भी शामिल है।

सोनाली खातून का परिवार

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने कुछ उन लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है, जिन्हें पहले बांग्लादेश भेज दिया गया था। वापस लाने के बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावों की जांच की जाएगी।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यह जानकारी दी। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली भी शामिल थे।

केंद्र का साफ रुख

मेहता ने कहा, 'सरकार इन्हें वापस लाएगी और उसके बाद उनकी स्थिति की जांच करेगी। जांच के नतीजे के आधार पर आगे कदम उठाए जाएंगे।'

उन्होंने साफ किया कि यह फैसला मामले के खास तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है साथ ही इसे अन्य मामलों के लिए मिसाल (precedent) के रूप में नहीं माना जाएगा।

शीर्ष विधि अधिकारी ने बताया कि इन लोगों को भारत वापस लाने में 8-10 दिन का समय लग सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई अब जुलाई के लिए स्थगित कर दी है।

हाईकोर्ट का आदेश

यह आदेश कलकत्ता हाईकोर्ट के 26 सितंबर 2025 के उस आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया है। हाईकोर्ट ने सोनाली खातून और अन्य लोगों को बांग्लादेश भेजने के केंद्र के फैसले को रद करते हुए उसे 'अवैध' करार दिया था।

पिछले साल 3 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर सुनाली खातून और उसके आठ वर्षीय बच्चे को भारत में प्रवेश की अनुमति दी थी। अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को नाबालिग की देखभाल और गर्भवती खातून को मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

परिवार का आरोप

खातून के पिता भोडू शेख की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और संजय हेगड़े ने केंद्र के रवैये को 'कुछ हद तक गलत' बताया।

परिवार का आरोप है कि वे दो दशकों से अधिक समय से दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-26 में दिहाड़ी मजदूर के रूप में रह रहे थे। 18 जून 2025 को दिल्ली पुलिस ने उन्हें बांग्लादेशी होने के शक में हिरासत में लिया और 27 जून को सीमा पार धकेल दिया।

बीरभूम जिले के रहने वाले आमिर खान ने भी अपनी बहन स्वीटी बीबी और उनके बच्चों के मामले में इसी तरह की याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया था कि निकाले गए छह लोगों को एक महीने के अंदर वापस लाया जाए।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि 'देश से निकालने की प्रक्रिया बहुत जल्दबाजी में पूरी की गई।' अदालत ने केंद्र सरकार के ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि अवैध प्रवासियों को भेजने से पहले उचित जांच जरूरी है।

हाईकोर्ट ने चेतावनी दी थी कि इस तरह का 'अत्यधिक उत्साह' गलतफहमी पैदा कर सकता है और देश के न्यायिक माहौल को प्रभावित कर सकता है।

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