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BRICS समिट से भारत को क्या मिलेगा? ट्रंप कार्ड होगा खत्म या ड्रैगन की चाल होगी धीमी

By Rajeev KumarEdited By: Garima Singh
Published: Wed, 09 Sep 2026 08:27 PM (IST)Updated: Wed, 09 Sep 2026 08:57 PM (IST)

भारत ब्रिक्स देशों के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने के लिए आगामी दिल्ली शिखर सम्मेलन में पहल करेगा।

भारत ब्रिक्स व्यापार घाटा कम करने की पहल करेगा (फाइल फोटो)

भारत ब्रिक्स व्यापार घाटा कम करने की पहल करेगा (फाइल फोटो)

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

राजीव कुमार, नई दिल्ली। पिछले पांच सालों में ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार बढ़ तो रहा है, लेकिन इसमें आयात की हिस्सेदारी अधिक है। आगामी 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट में भारत इस व्यापार घाटे को कम करने की पहल करेगा।

सदस्य देशों को अपने बाजार को भारतीय वस्तुओं के लिए लचीला बनाने की भी पैरवी करेगा। वित्त वर्ष 2021 से लेकर वित्त वर्ष 2026 के बीच भारत का ब्रिक्स देशों से व्यापार 203 अरब डालर से बढ़कर 417 अरब डालर हो गया है, लेकिन इस 417 अरब डालर के व्यापार में निर्यात की हिस्सेदारी सिर्फ 95 अरब डालर की है।

BRICS देशों से कितना व्यापार?

भारत ब्रिक्स देशों से सालाना 321 अरब डॉलर का आयात करता है। सबसे अधिक व्यापार घाटा चीन व रूस से है। चीन से भारत सालाना 130 अरब डालर तो रूस से 55 अरब डालर का आयात करता है।

हालांकि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में चीन में भारत का निर्यात बढ़ रहा है, लेकिन अभी चीन में भारतीय निर्यात को बढ़ाने की काफी गुंजाइश है और चीन के साथ इस मसले पर ब्रिक्स सम्मेलन के साइडलाइन में बात की जा सकती है। रूस भी भारत के मुकाबले चीन से कई गुना अधिक माल खरीदता है।

किन क्षेत्रों में अधिक निर्यात?

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के अध्यक्ष एस.सी. रल्हन ने बताया कि भारत इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्युटिकल्स, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स , ऑटोमोबाइल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य और कृषि उत्पादों, रिन्युएबल एनर्जी, हेल्थकेयर सेवा में निर्यात करने में सक्षम है।

भारत ब्रिक्स देशों में विकसित हो रहे उद्योगों की वैल्यू चेन का बड़ा हिस्सा बन सकता है। भारत को भी सदस्य देशों से महत्वपूर्ण खनिज व अन्य टेक्नोलाजी की मदद मिल सकती है।

क्या कहतें हैं आकड़ें?

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इंशिएटिव के आंकड़ों के मुताबिक ब्रिक्स देशों के बीच होने वाले व्यापार में चीन का दबदबा है। चीन ब्रिक्स देशों को 550.8 अरब डालर का निर्यात करता है तो इन देशों से 465 अरब डालर का आयात करता है। ब्रिक्स देशों में ब्राजील, चीन, मिस्त्र, इथोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और यूएई शामिल हैं।

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के मुताबिक ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार को लेकर जो असंतुलन की स्थिति है, उसे संतुलित करने को लेकर इस सम्मेलन में भारत को पहल करनी चाहिए। भारत को चीन, रूस, इंडोनेशिया जैसे देशों में अपने बाजार के विस्तार को लेकर इन देशों से बातचीत करना चाहिए।

इंडोनेशिया, ईरान में भी भारत का निर्यात पिछले पांच सालों में कम हुआ है। रूस में भारत का निर्यात पिछले पांच सालों में 69 प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन दूसरी तरफ रूस से होने वाले आयात में 909 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इन सभी देशों में सिर्फ दक्षिण अफ्रीका और मिस्र के साथ हमारा व्यापार घाटे में नहीं लाभ में है।

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