दुर्लभ खनिजों में आत्मनिर्भरता की ओर भारत का बड़ा कदम, देश में शुरू होगा परमानेंट मैग्नेट का उत्पादन
भारत इस वर्ष के अंत तक देश में स्थायी चुंबक का उत्पादन शुरू करेगा, जिससे दुर्लभ खनिजों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। ...और पढ़ें
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दुर्लभ खनिजों में आत्मनिर्भरता होने की ओर बड़ा कदम (फाइल फोटो)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत इस वर्ष के अंत तक देश में ही स्थायी चुंबक (परमानेंट मैग्नेट) का उत्पादन शुरू करने जा रहा है। कोयला एवं खनन मंत्री जी किशन रेड्डी ने यह घोषणा करते हुए कहा कि 7,280 करोड़ रुपये की पीएलआई योजना के तहत परमानेंट मैग्नेट निर्माण की नींव रखी जा चुकी है और इस वर्ष के अंत तक इसका उत्पादन शुरू हो जाएगा।
यह कदम इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि अभी तक भारत इन उच्च-प्रौद्योगिकी में इस्तेमाल होने वाले चुंबकों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर रहा है और वैश्विक स्तर पर इनके उत्पादन पर चीन का वर्चस्व है।
कहां होता है उपयोग?
परमानेंट मैग्नेट विशेष प्रकार के दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) से बनाए जाते हैं और इनका उपयोग इलेक्टि्रक वाहनों (ईवी), पवन ऊर्जा टर्बाइन, मोबाइल फोन, रक्षा उपकरण, रोबोटिक्स, फ्रिज जैसे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग में व्यापक रूप से होता है। इलेक्टि्रक मोटर, ड्रोन, मिसाइल प्रणाली और आधुनिक मैन्यूफैक्च¨रग प्लांट में इन चुंबकों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।
पिछले वर्ष चीन ने इनकी आपूर्ति बाधित कर दी थी, इसका व्यापक असर भारतीय उद्योगों (खास तौर पर आटोबाइल उद्योग) पर पड़ा था। पीएम नरेन्द्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी चिन¨फग के साथ मुलाकात में इस मुद्दे को उठाया था। ऐसे में घरेलू उत्पादन की शुरुआत भारत की रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए निर्णायक मानी जा रही है।
खनन मंत्री किशन रेड्डी यहां फिक्की द्वारा आयोजित 'इंडियन क्रिटिकल मिनरल्स लैंडस्केप' सम्मेलन में उक्त जानकारी दी लेकिन इसको विस्तार से नहीं बताया। उन्होंने कहा कि, “भारत अभी 95 प्रतिशत तक क्रिटिकल मिनरल्स के लिए आयात पर निर्भर है। इसे बदलने के लिए केंद्र सरकार “रिफार्म एक्सप्रेस मोड'' में काम कर रही है।
राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के तहत 32,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और देशभर में 4,000 से अधिक अन्वेषण गतिविधियाँ शुरू की जा चुकी हैं।सरकार ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र और गुजरात में क्रिटिकल मिनरल प्रोसे¨सग यूनिट स्थापित करने की पहचान की है ताकि खनिजों के खनन से लेकर प्रसंस्करण और उन्नत विनिर्माण तक पूरी वैल्यू चेन देश में विकसित की जा सके।
क्या है चुनौती?
बताते चलें कि उक्त खनिजों को निकालने से ज्यादा इनका प्रसंस्करण एक बड़ी चुनौती होती है। चीन ने इनके भंडारों के साथ ही प्रसंस्करण करने में भी काफी आगे है। मंत्री रेड्डी ने उद्योग जगत से अपील की कि वे उन्नत प्रौद्योगिकी, शहरी खनन (अर्बन माइनिंग), रीसाइक्लिंग और विदेशी खनिज संपत्तियों के अधिग्रहण में निवेश करें।
सरकार ने उद्योगों की सहूलियत के लिए कच्चे माल के आयात पर सीमा शुल्क में छूट और अलग फंड की व्यवस्था भी की है। इसके अलावा नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट को मजबूत किया जा रहा है। सम्मेलन में भारत स्थित कनाडा उच्चायोग के वाणिज्य मंत्री एड जेगर ने भी कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स अब वैश्विक अर्थव्यवस्था की रणनीतिक संपत्ति बन चुके हैं और कनाडा भारत का विश्वसनीय साझेदार बनने को तैयार है।
