विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 31, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

त्वरित टिप्पणी: 'देश बदल रहा है' और विश्व बैंक की रिपोर्ट उस पर मुहर है

By Manish NegiEdited By:
Published: Tue, 31 Oct 2017 08:03 PM (IST)Updated: Wed, 01 Nov 2017 11:53 AM (IST)

प्रधानमंत्री का नारा रहा है- देश बदल रहा है। ईज आफ डूइंग बिजनेस की नवीनतम रिपोर्ट ने इस पर मजबूती से मुहर लगा दी है।

त्वरित टिप्पणी: 'देश बदल रहा है' और विश्व बैंक की रिपोर्ट उस पर मुहर है
त्वरित टिप्पणी: 'देश बदल रहा है' और विश्व बैंक की रिपोर्ट उस पर मुहर है

प्रशांत मिश्र। देश के दूर दराज क्षेत्रों में बैठे लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है आखिर ईज आफ डूइंग बिजनेस पर विश्व बैंक की रिपोर्ट उनकी जिंदगी कैसे बदलेगी? जवाब उल्टा है- उनके आसपास के बदले माहौल का असर ही है यह रिपोर्ट। जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने वाले कारक बदल रहे हैं और विश्व पटल पर इसे महसूस किया जा रहा है।

दरअसल, विश्व बैंक की रिपोर्ट इस बात की स्वीकारोक्ति है कि भारत सरकार ने हाल के वर्षो में भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए जो कदम उठाये हैं वे सही दिशा में जा रहे हैं। अब कारोबार करने के लिए बाबुओं की जेब गर्म करने की जरूरत नहीं है। फैक्ट्री में बिजली व पानी कनेक्शन के लिए महीनों इंतजार करने के दिन लद रहे हैं। स्वरोजगार और रोजगार के लिए राह थोड़ी आसान हो रही है।

प्रधानमंत्री का नारा रहा है- देश बदल रहा है। ईज आफ डूइंग बिजनेस की नवीनतम रिपोर्ट ने इस पर मजबूती से मुहर लगा दी है। एक बार में तीस अंक की छलांग लगाकर भारत सौवें नंबर पर आ गया है। इस बड़ी उपलब्धि का जाहिर तौर पर भाजपा राजनीतिक इस्तेमाल भी करेगी और कांग्रेस समेत उन विपक्षी दलों को करारा जवाब भी देगी जो अर्थव्यवस्था की सुस्ती का हवाला देकर नीतियों पर सवाल खड़ा कर रहे थे। गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव अभियानों मे भी इसका असर दिखेगा।

पर राजनीति से परे हटकर भी देखें तो रिपोर्ट का सीधा संदेश है कि पारदर्शिता अब शासन प्रशासन भी दिखने लगी है। दरअसल देश में कारोबार की प्रक्रिया सुगम बनाने के लिए मोदी सरकार ने सत्ता संभालते ही शुरुआत कर दी थी। औद्योगिक नीति एवं संव‌र्द्धन विभाग (डीआइपीपी) ने 98 बिन्दु की एक कार्ययोजना तैयार कर सभी राज्यों को भेजी थी ताकि व्यवसाय शुरु करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके। प्रत्येक राज्य अपने यहां व्यवसाय के अनुकूल माहौल बनाए इसके लिए राज्यों की रैंकिंग की व्यवस्था शुरु की गयी।

सुधारों के मोर्चे पर मोदी सरकार ने राजनीतिक लाभ-हानि नहीं देखी। अर्थव्यवस्था की सेहत सुधारने के लिए कड़वे घूंट पिलाने से भी कभी परहेज नहीं किया। राजनीतिक तौर पर संवेदनशील माने जाने वाले आर्थिक क्षेत्रों को विदेशी निवेश के लिए खोला, संसद में लंबित जीएसटी विधेयक और दिवालियापन पर विधेयकों को पारित कराया। फंसे कर्ज के संकट से जूझ रहे बैंकों को भी उबारने का उपाय किया। सबसे बड़ी बात यह है कि मोदी सरकार ने लालफीताशाही को खत्म किया। रेड टेपिज्म से परेशान उद्यमियों के लिए रेड कारपेट कार्यशैली विकसित की। वही सुधार रिपोर्ट के रूप में सामने आया है।

रोजगार को विपक्ष ने हाल के चुनावों में भी मुद्दा बनाया है। विश्व बैंक की रिपोर्ट उसका भी जवाब देती है। साथ ही यह आशा भी जगाती है कि भारत की रैकिंग को और बेहतर करना हमारी क्षमता के दायरे में है। ध्यान रहे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार बार रोजगार मांगने वालों की बजाय रोजगार देने वाला बनने की अपील की है। मुद्रा से लेकर स्टार्ट अप तक योजनाएं इसी दिशा में शुरू की गई थी। वहीं जाहिर है कि इस रिपोर्ट के बाद निवेशकों को लाने के लिए शायद मशक्कत भी कम करनी पड़े।

यह भी पढ़ें: सरकारी बैंकों के मर्जर के लिए हुआ समिति का गठन, अरुण जेटली करेंगे नेतृत्व

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।