बेंगलुरु, एजेंसी। भारत उपग्रह आधारित नेविगेशन और वृद्धि सेवा क्षेत्र को विकास के ऊंचे पायदान तक पहुंचाने की तैयारियों में जुटा है। इसके प्रभावी विकास, संचालन और रखरखाव के लिए एक नीतिगत प्रस्ताव लाया जाएगा। अंतरिक्ष विभाग (जीओएस) सेटेलाइट आधारित नेविगेशन के लिए एक 'व्यापक और मूल' राष्ट्रीय नीति तैयार करने की योजना बना रहा है। इसे भारतीय उपग्रह नेविगेशन नीति 2021 (सैटनैव नीति- 2021) का भी नाम दिया गया है। इसके मसौदे को अब सार्वजनिक परामर्श के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की वेबसाइट पर रखा गया है। इसके बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। यह उपलब्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने, उपयोग बढ़ाने, सेवाओं के प्रगतिशील विकास की दिशा में काम करने और अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने पर जोर देने के साथ उपग्रह आधारित नेविगेशन और वृद्धि सेवाओं में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना चाहता है।

पिछले कुछ दशकों में अंतरिक्ष आधारित नेविगेशन सिस्टम द्वारा प्रदान की जाने वाली स्थिति, वेग और समय (पीवीटी) सेवाओं पर भरोसा करने वाले प्रयोगों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। सूचना व मोबाइल फोन प्रौद्योगिकी के आने के साथ भारत भर में करोड़ों उपयोगकर्ता जीवन के लगभग हर क्षेत्र में पीवीटी आधारित अनुप्रयोगों पर बहुत अधिक निर्भर हैं। ग्लोबल नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम अंतरिक्ष आधारित नेविगेशन सिस्टम हैं जो दुनिया भर में नेविगेशन सिग्नल प्रदान करते हैं।

वर्तमान में, चार जीएनएसएस हैं- जैसे अमेरिका से जीपीएस, रूस से ग्लोनास, यूरोपीय संघ से गैलीलियो और चीन से बेईदो विश्व स्तर पर पीवीटी समाधान देता है। इसके अलावा, दो क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणालियां हैं। इसमें भारत से एनएवीआइसी और जापान से क्यूजेडएसएस परिभाषित कवरेज क्षेत्र के लिए नेविगेशन सिग्नल प्रदान करते हैं।

नेविगेशन सिग्नलों को हवाई, अंतरिक्ष, समुद्री और भूमि अनुप्रयोगों से लेकर ट्रैकिंग, टेलीमैटिक्स, स्थान आधारित सेवाओं (सेल फोन और मोबाइल उपकरणों का उपयोग करके), आटोमोटिव, सर्वेक्षण, मैपिंग और जीआइएस और विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए फ्री-टू-एयर की पेशकश की जाती है। जीएनएसएस विशेष रूप से अपने संबंधित देशों के रणनीतिक प्रयोगों के लिए सुरक्षित नेविगेशन सिग्नल भी प्रदान करता है क्योंकि फ्री-टू-एयर सिग्नल विरोधियों के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं।